संजू को मान्यता
बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त और उनकी पत्नी मान्यता को बड़ी राहत देते हुए सत्र न्यायालय ने दोनों को मजिस्ट्रेट की अदालत के समक्ष पेश होने के आदेश को रद्द कर दिया। मान्यता के पूर्व पति द्वारा दायर मुकदमे को लेकर दोनों को मजिस्ट्रेट अदालत में पेश होना था। उसकी शिकायत के अनुसार मान्यता की गलत ढंग से दूसरी शादी की है, व्योंकि उन्होंने अपने पहले पति मेहराज उर रहमान से कानूनी तौर पर तलाक नहीं लिया है। मान्यता द्वारा दायर आवेदन की सुनवाई करते हुए अतिरिव्त सत्र न्यायाधीश एस.एन. सरदेसाई ने गौर किया कि मेहराज और मान्यता के बीच तलाक कानूनी है, इसलिए मान्यता ने एक पति के साथ शादीशुदा रहते दूसरे विवाह नहीं किया है। मान्यता ने बांद्रा मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट अदालत द्वारा जारी आदेशों के खिलाफ सत्र न्यायालय में आवेदन किया था। मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट के आदेशों के तहत मान्यता और दत्त को अदालत के समक्ष उपस्थित रहने और अपने विवाह तथा मेहराज के साथ तलाक की वैधता को साबित करने के लिए कहा गया था। मेहराज के अनुसार, उसका मान्यता के साथ कानूनी तलाक नहीं हुआ है, क्योंकि उसने काजी के जरिये नोटिस नहीं भेजा है। मुस्लिम पर्सनल लॉ के अनुसार निकाह कराने वाला काजी पति और पत्नी को नोटिस भेजकर दोनों के बीच तलाक भी करा सकता है। न्यायाधीश ने हालाँकि यह कहा कि मेहराज को नोटिस भेजे गये थे, इसलिए मान्यता ने माना कि उन्हें तलाक मिल गया है। मान्यता के वकील रिजवान मर्चेंट ने `प्रेस ट्रस्ट' को बताया `हमने अदालत के समक्ष काजी के जरिये मेहराज को भेजे गये नोटिस पेश किये। मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत एक-दूसरे से तलाक लेने के लिए पत्नी को पति की और पति को पत्नी की रजामंदी की जरूरत नहीं होती।' मान्यता ने अपने आवेदन में यह भी कहा था कि वह और दत्त कानूनी तौर पर शादीशुदा नहीं हैं, क्योकि उनका विवाह अमान्य हो गया है। मर्चेंट ने कहा, `इस विवाह का कोई कानूनी आधार नहीं है, इसलिए दत्त या मान्यता ने एक साथी के साथ शादीशुदा रहते दूसरा विवाह नहीं किया है।' मेहराज की अब बंबई उच्च अदालत में सत्र न्यायालय के फैसले को चुनौती देने की योजना है। मेहराज के वकील तस्लीम खान ने कहा, `न्यायालय ने काजी की विश्वसनीयता से जुड़ी हमारी दलीलों पर विचार नहीं किया।' |
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