2-3 रुपये बढ़ेगा पेट्रोल
पेट्रोलियम उत्पादों की अर्से से लंबित मूल्यवृद्धि को सरकार द्वारा शीघ्र ही कदाचित कल की काबीना बैठक में हरी झण्डी दिखाये जाने के समाचार हैं। जानकार सूत्रों के अनुसार, दिनभर चली उच्चस्तरीय बैठकों के दौरान तेल कंपनियों की आर्थिक खस्ताहाली को दूर करने संबंधी विकल्पों के अभाव में सरकार/संप्रग अध्यक्षा उक्त दूरगामी परिणामों वाला कड़वा घूँट पीने को बाध्य रहे। इसकी औपचारिक घोषणा काबीना की मोहर लगने के बाद अपेक्षित है। यद्यपि कोई भी फिलहाल दावे के साथ यह कहने की स्थिति में नहीं कि उक्त वृद्धि कितनी होगी, किन्तु चूँकि बकौल स्वयं पेट्रोलियम मंत्री मुरली देवड़ा फैसला पेट्रोलियम पदार्थों की मूल्यवृद्धि, करों में कटौती तथा तेल बांड जारी किये जाने के मिले-जुले उपाय का नतीजा होगा, इसलिए यह कहना कदाचित गलत न होगा कि पेट्रोल-डीजल की वृद्धि क्रमश: 10 रुपये और 5 रुपये से काफी कम होगी। पेट्रोल की कीमतों में 2 से 3 रुपये वृद्धि की चर्चा/अटकलें हैं। स्थिति कितनी गंभीर है और फैसला कितना कठिन रहा है, इसका अंदाजा इसी तथ्य से लगाया जा सकता है कि समय रहते बातचीत पूरी न हो सकने के चलते आज होने वाली काबीना बैठक को कल तक के लिए टाल दिया गया। विशेषकर इस तथ्य के मद्देनजर कि संप्रग अध्यक्षा होने के नाते श्रीमती सोनिया गांधी फैसले को लेकर संप्रग के दूसरे घटक दलों विशेषकर वाम मोर्चे को विश्वास में लेने के हक में थीं। बकौल श्री देवड़ा सभी को विश्वास में ले सहमति हासिल करने का प्रयास हुआ है। वृद्धि विशेषकर करों में कटौती के मुद्दे पर पेट्रोलियम तथा वित्त मंत्रालयों के मध्य जारी रस्साकशी के मद्देनजर आज सुबह ही प्रधानमंत्री ने एक विशेष बैठक आहूत की। इसमें पेट्रोलियम-मंत्री के अतिरिक्त विदेश-मंत्री व मुख्य संकटमोचक प्रणव मुखर्जी, वित्त-मंत्री पी. चिदम्बरम, योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया तथा प्रधानमंत्री के मुख्य सचिव श्री टी. के. नायर शामिल हुए। बकौल श्री देवड़ा जब प्रधानमंत्री तथा वित्त-मंत्री ने तेल कंपनियों के वित्तीय घाटे तथा अन्तर्राष्ट्रीय मूल्यवृद्धि का लेखा-जोखा देखा, तो उन्हें समझना आ गया कि तेल कंपनियों को दरअसल युद्ध स्तर पर सहयोग की जरूरत है। दिलचस्प रूप से तेल कंपनियों ने संवाददाता सम्मेलनों के जरिये गत एक-दो दिनों से अपनी खस्ताहाली का ब्यौरा/रोना पेश कर माहौल बनाने का सुनियोजित कार्यक्रम चलाया हुआ था। इसके चलते ही आज की बैठक में वित्त-मंत्री वृद्धि विशेषकर करों में कटौती संबंधी प्रस्तावों का भारी विरोध नहीं कर सके। प्रधानमंत्री की उक्त बैठक ने मूल्यवृद्धि संबंधी आर्थिक फैसला भले ही लिया हो, पर असली और राजनीतिक फैसले को आज शाम सोनिया गांधी के निवास पर हुई बैठक में लिये जाने के समाचार हैं। उक्त बैठक में प्रणव मुखर्जी, रक्षा-मंत्री ए.के. एंटोनी, अहमद पटेल तथा पार्टी महासचिव जनार्दन द्विवेदी शामिल हुए। बकौल सूत्र इस बैठक ने एक ओर तो उक्त वृद्धि के राजनीतिक नफे-नुकसान का आकलन किया। दूसरी ओर, संप्रग के नेताओं तथा वामपंथी नेताओं को मनाने/पटाने का प्रयास किया। वैसे देर रात प्रधानमंत्री और सोनिया गांधी ने भी भेंट कर इस पर चर्चा की। बकौल सूत्र तेल कंपनियों की नुकसान भरपाई हेतु करों के ढाँचे में फेरबदल तो होगा ही। उनके द्वारा कर्ज लेने की सीमा में भी वृद्धि की जाएगी। अन्तत: मूल्यवृद्धि कल, कैसी कितनी होगी यह कहना कठिन है, पर इसमें दो राय नहीं कि विपक्षी ही नहीं, समर्थक वाम मोर्चा भी इसके विरुद्ध आवाज उठाने में न तो देर करेंगे, न संकोच। |
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