Mangoes

`फलों का राजा' माने जाने वाले आम का स्वाद तो हर कोई चखना पसंद करता है, खासतौर पर भारतीय उच्च गुणवत्ता वाले आम की विदेशों में भी भारी माँग है। इसी को ध्यान में रखते हुए मराठवाड़ा में लातूर, बीड़, उस्मानाबाद तथा नांदेड़ के लिए एक विशेष विभागीय आम खरीदी बोर्ड की स्थापना की गयी है। इस बोर्ड के माध्यम से क्षेत्र के कुछ चुनिन्दा आम बागानों को अन्तर्राष्ट्रीय मानकों वाले ग्लोबल गैप द्वारा प्रमाणित किया गया है। बोर्ड के माध्यम से इस बार अब तक 25 टन आम का निर्यात किया गया है, जिसमें खासतौर पर आम की साईकेशरी किस्म शामिल है।

उल्लेखनीय है कि मराठवाड़ा से निर्यात किये जाने वाले आम का 60 प्रतिशत हिस्सा लातूर ज़िले का है। मराठवाड़ा के उक्त 4 ज़िलों में गुणवत्तापूर्ण आम उत्पादन करने वाले 35 बागान हैं, जिनमें से 22 बागानों को ग्लोबल गैप द्वारा प्रमाणित किया गया है। अन्य ज़िलों की तुलना में   लातूर ज़िले के आम अधिक समय तक रह सकते हैं तथा वह अधिक रसीले पाये गये हैं, इसी कारण लातूर के आम की माँग काफी अधिक है। हालाँकि इस बार अन्य देशों की तुलना में मराठवाड़ा से आम के लिए जापान से काफी माँग मिल रही है। इसी कारण जापान के लिए अब तक 25 टन आम का निर्यात हो चुका है।

लातूर ज़िला आम उत्पादक संघ के सचिव मनोज बाजपेयी के अनुसार, लातूर ज़िले में कुल डेढ़ सौ हेक्टेयर क्षेत्र में आम का उत्पादन किया जा रहा है। फिलहाल आम के लिए माँग काफी अधिक न होने के कारण आम पर प्रक्रिया भी धीमी गति से चल रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, निर्यात के लिए हरे बिना दाग वाले आम चुने जाते हैं। उसके बाद सभी आमों पर गर्म भाप की वेपर हीट प्रक्रिया की जाती है। तत्पश्चात रेडिएशन की प्रक्रिया कर उनकी पैकिंग की जाती है। फिलहाल यह सुविधा मात्र नासिक के पास स्थित लासलगाँव तथा मुम्बई के पास स्थित वाशी में उपलब्ध है। श्री बाजपेयी के अनुसार, दो-तीन जगह पर ही यह सुविधा होने के कारण आम निर्यात काफी धीमी गति से हो पा रहा है। उनके अनुसार, एक टन आम के निर्यात पर 50,000 रुपये की विदेशी मुद्रा हासिल होती है। मराठवाड़ा के चार ज़िलों से शुरू हुआ आम निर्यात के कारण इस क्षेत्र में विदेशी मुद्रा भी आ रही है।

उल्लेखनीय है कि इस वर्ष आम के पेड़ काफी बौराए थे, लेकिन तेज़ हवा के साथ हुई बेमौसमी बरसात के कारण आम की फसल को बड़े पैमाने पर क्षति पहुँची। इसके बाद भी दोबारा आम के पेड़ बौर से ढके नज़र आए, लेकिन इसका असर फलों के आकार पर पड़ा। फिलहाल अधिकांश पेड़ों पर आम के फलों का आकार भिन्न नज़र आ रहा है। इसी कारण आम उतारने का सिलसिला आगामी जून माह तक जारी रहने के आसार व्यक्त किये जा रहे हैं। श्री बाजपेयी ने यह भी बताया कि इस बार गर्मी काफी अधिक होने के कारण आम का रंग भी प्रभावित हो रहा है। इसी कारण निर्यात के लिए ग्रेडिंग में कम ही आम निकल पा रहे हैं। इस बार ज़िलाधीश एकनाथ डवले ने आम उत्पादक किसानों के साथ बैठ क का आयोजन कर गैर-रासायनिक खादों का उपयोग आम उत्पादन के लिए करने का आग्रह किया था। इसी कारण इस बार कुछ किसानों ने भी गैर-रासायनिक खादों का उपयोग कर साई केशरी आम के विभिन्न किस्मों के पौधे लगाये हैं। पिछले 4-5 वर्षों से इस किस्म के आम इंग्लैण्ड, जापान तथा अमेरिका में काफी पसंद किये जा चुके हैं। गैर-रासायनिक पद्धति से आमों के उत्पादन के कारण जापान से भी इन आमों के लिए भारी माँग मिल रही है। इसी कारण क्षेत्र के किसानों को भी विदेशी मुद्रा प्राप्त हो रही है।