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दिल्ली नज़दीक दिखी भाजपा को
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By विनय वीर
प्रकाशित 06/2/2008
 
BJP National Leaders कर्नाटक के रूप में पहली बार दक्षिण भारत में `कमल खिलने' से उत्साहित भाजपा ने आज कहा कि अब दिल्ली दूर नहीं और शीघ्र ही प्रधानमंत्री पद के उसके उम्मीदवार लालकृष्ण आडवाणी ऐतिहासिक लालकिले की प्राचीर से तिरंगा फहराएँगे।

दिल्ली नज़दीक दिखी भाजपा को
BJP National Leaders

कर्नाटक के रूप में पहली बार दक्षिण भारत में `कमल खिलने' से उत्साहित भाजपा ने आज कहा कि अब दिल्ली दूर नहीं और शीघ्र ही प्रधानमंत्री पद के उसके उम्मीदवार लालकृष्ण आडवाणी ऐतिहासिक लालकिले की प्राचीर से तिरंगा फहराएँगे।

कर्नाटक विजय के बाद आज यहाँ शुरू हुई भाजपा राष्ट्रीय कार्यकारिणी की दो दिवसीय बैठक में अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने कहा, दिल्ली की गद्दी अब हमारे लिए दूर नहीं है। भारत की जनता भाजपा को तहेदिल से सत्ता सौंपना चाहती है। वह दिन दूर नहीं, जब लालकिले की प्राचीर से हमारे प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार लालकृष्ण आडवाणी पूरे राष्ट्र को संबोधित करेंगे।

सिंह ने कहा, `हमारे लिए यह आह्लाद का क्षण है कि सात राज्यों में हम अपने बूते सरकार में हैं। पाँच राज्यों में गठबंधन की सरकारें हैं। मैं आशा करता हूँ कि आने वाले चुनाव में हम मध्य-प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान सहित दिल्ली में भाजपा की सरकार बनाएँगे।' उन्होंने कहा, `अब भाजपा भारत की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बन गयी है। कर्नाटक विजय के बाद राष्ट्रीय परिदृष्य पर देखें तो उत्तर में पंजाब और हिमाचल, पश्चिम में गुजरात और राजस्थान, पूर्व में उड़ीसा और बिहार, पूर्वोत्तर में मेघालय और नागालैंड, मध्य में मध्य-प्रदेश और छत्तीसगढ़ और अब दक्षिण में कर्नाटक में भाजपा एवं हमारे गठबंधन की सरकारें स्पष्ट संकेत दे रही हैं कि भाजपा ही देश की सबसे बड़ी पार्टी है।' उन्होंने कहा कि भाजपा और उसके सहयोगी दलों के शासन वाले इन राज्यों में लोकसभा की 200 से अधिक सीटें हैं। जबकि कांग्रेस तथा उसके गठबंधन की सरकारें जिन राज्यों में हैं, उनमें कुल मिलाकर 125 से भी कम लोकसभा सीटें आती हैं।

धर्मनिरपेक्षता के मुद्दे को उठाते हुए भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि भारत की व्यवस्था `धर्मनिरपेक्ष' बनपर नहीं चल सकती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री से लेकर देश के सामान्य नागरिक इस शब्द का संवैधानिक प्रयोग न कर सके इसके लिए एक राजाज्ञा के जरिये प्रतिबंध लगाया जाए।

सिंह ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा `भारत न कभी धर्मनिरपेक्ष था न धर्मनिरपेक्ष है और जब तक इसका अस्तित्व रहेगा यह न कभी धर्मनिरपेक्ष हो सकता है।' उन्होंने माँग की कि `धर्मनिरपेक्ष' शब्द के संवैधानिक प्रयोग पर प्रतिबंध लगाकर इसकी जगह `पंथनिरपेक्ष' का इस्तेमाल किया जाए।

सिंह ने मुसलमानों से मुखातिब होते हुए कहा, `मैं इस अवसर पर देश के अल्पसंख्यकों से आग्रह करना चाहता हूँ कि अब वे पंथनिरपेक्षता की आड़ में राजनीति करने वालों से सावधान हो जाएँ। भाजपा अल्पसंख्यकों को वोट बैंक की बजाय प्रतिबद्ध नागरिक मानती है।'

भाजपा के हिन्दुत्व के मुद्दों को नहीं छोड़ने का इशारा करते हुए सिंह ने कहा, `सांस्कृतिक राष्ट्रवाद, धारा 370, समान नागरिक संहिता, प्रबलतम पंथ निरपेक्षता के साथ-साथ राष्ट्रीय एकता और अखंडता को अक्षुण्ण रखने के लिए हम प्रतिबद्ध हैं।' हालाँकि इसमें राम मंदिर का कोई उल्लेख नहीं किया गया, जिसका आन्दोलन पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार आडवाणी ने ही शुरू किया था।

आतंकवाद के विषय पर आते हुए राजनाथ सिंह ने आरोप लगाया कि मुसलमानों की `सहानुभूति' पाने के उद्देश्य से ही संप्रग सरकार ने कोटा कानून को समाप्त किया है। `इस सरकार ने आतंकवाद के विरुद्ध हो रही कार्यवाहियों को अल्पसंख्यक समुदाय विशेषकर मुस्लिम समुदाय के विरुद्ध हो रहे कार्य के रूप में स्थापित करने का प्रयास किया।

आतंकवाद के खिलाफ हाल में ही दारुल उलूम देवबंद द्वारा जारी फतवे की सराहना करते हुए सिंह ने कहा कि आज `देवबंद मुसलमानों को आतंकवाद से अलग करके देख रहा है लेकिन केन्द्र सरकार मुसलमानों को आतंकवाद से जोड़कर रखना चाहती है और इसी आधार पर आतंकवाद विरोधी कानून को नकारती रहती है। शायद सरकार अपने आपको मुसलमानों का मदरसों से भी बड़ा हिमायती सिद्ध करना चाहती है।' कोटा जैसे कानून की सख्त ज़रूरत बताते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार आने पर वह ऐसा कड़ा कानून लाएगी।

आतंकवाद पर काबू पाने के लिए संघीय जाँच एजेंसी बनाने की प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अपील पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा, `उन्हें संघीय जाँच एजेंसी की आवश्यकता महसूस होती है करन्तु कानून की आवश्यकता महसूस नहीं होती। यानी फौज की जरूरत है पर फौज को हथियार देने की जरूरत नहीं है।'