जीतेगी भाजपा - जीतेगा भारत
कर्नाटक सहित कई राज्यों की विजय से उत्साहित भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार लालकृष्ण आडवाणी ने आज `भविष्यवाणी' की कि अगले लोकसभा चुनावों में कांग्रेस का `वंशवादी नेतृत्व' धूल चाटेगा और उनकी पार्टी के नेतृत्व वाला राजग सरकार बनाने की दौड़ में सबसे आगे होगा। आडवाणी ने पिछले साल गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान नरेंद्र मोदी के नारे `जीतेगी भाजपा-जीतेगा गुजरात' की तर्ज पर `जीतेगी भाजपा-जीतेगा भारत' का नया नारा दिया। आडवाणी ने यहाँ पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की दो दिवसीय बैठक के अपने समापन भाषण में कहा कि कर्नाटक विजय के बाद भाजपा आगामी संसदीय चुनाव की दौड़ में सबसे आगे निकल गयी है, लेकिन हमें इसे `निश्चित विजय' में बदलने के लिए अपना सब कुछ झोंकना होगा। आडवाणी ने इस `निश्चित विजय' को सुनिश्चित करने के लिए पार्टी जन का आह्वान किया कि वे मुसलमानों और ईसाइयों सहित समाज के सभी वर्गों से संपर्क स्थापित करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ें। उन्होंने इशारों-इशारों में यह भी कहा कि अगली सरकार बनाने में अन्य दलों पर अधिक निर्भर नहीं रहने के लिए भाजपा को अपने बल पर अधिक से अधिक सीट जीतने का जी तोड़ प्रयास करना चाहिए। आडवाणी ने उत्तर-प्रदेश का नाम लिये बिना कहा कि कर्नाटक सहित कुछ राज्यों के चुनावों में यह रुझान देखने को मिला है कि जनता `स्थिर सरकार के पक्ष में मतदान कर रही है।' उन्होंने कहा, `जो बात राज्य स्तर पर सही है वह राष्ट्रीय स्तर पर भी सही है। भारत एक और कमजोर सरकार का बोझ नहीं उठा सकता।' आडवाणी ने सोनिया गांधी या राहुल गांधी का नाम लिये बिना कहा कि मई, 2004 से 12 राज्यों में कांग्रेस को हार का मुँह देखना `इस बात का सबूत है कि न तो कांग्रेस का वंशवादी नेतृत्व और न ही प्रधानमंत्री और उनकी टीम भारत की जनता में अपने लिए कोई विश्वास पैदा कर पायी है।' उन्होंने कहा कि `वंशवाद के चापलूसों' को छोड़कर सभी इस वास्तविकता को देख रहे हैं। यहाँ तक कि कांग्रेस के सहयोगी दल भी मान चुके हैं कि जहाँ तक आगामी 15वीं लोकसभा के चुनाव का सवाल है संप्रग का `सफाया' निश्चित है। आडवाणी ने कहा कि सब यह देख रहे हैं कि `एक कमजोर सरकार शक्तिहीन प्रधानमंत्री और अवसरवादी कांग्रेस वाम समझौता देश को खतरे में डाल रहे हैं।' पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार ने कहा, `इन परिस्थितियों में यह स्वाभाविक सवाल है कि विकल्प क्या है, अगले संसदीय चुनाव में भाजपा और राजग दौड़ में सबसे आगे हैं। हालाँकि यह काफी नहीं है हमारी पार्टी और गठबंधन के सामने चुनौती यह है कि हम दौड़ में आगे रहने की स्थिति से बढ़कर निश्चित विजय की स्थिति सुनिश्चित करें।' उन्होंने कहा कि इसके लिए पार्टी को कई उपाय करने होंगे, जिनमें भाजपा शासित राजस्थान, मध्य-प्रदेश और छत्तीसगढ़ के आगामी विधानसभा चुनाव में जीत सुनिश्चित करना शामिल है। इन राज्यों में शासन विरोधी कारकों पर पार पाने के लिए उन्होंने पिछले गुजरात विधानसभा चुनाव में अपनायी गयी रणनीति का अनुसरण करने का सुझाव दिया, जहाँ बड़ी संख्या में तत्कालीन विधायकों के टिकट काट दिये गये थे। विश्वास से भरे आडवाणी ने कहा कि एक स्थिर सरकार देने के लिए भाजपा को 2009 के लोकसभा चुनाव में 1999 के अपने अब तक के सबसे अच्छे प्रदर्शन से भी बढ़िया करके दिखाना होगा। तब भाजपा को 182 सीटें मिलीं थीं। उन्होंने कहा, `2009 के चुनाव में न सिर्फ हमें अपने 2004 के प्रदर्शन से आगे जाना है, बल्कि 1999 के रिकॉर्ड को भी तोड़ना है, क्या यह संभव है। जी हां यह संभव है।' पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक को संबोधित करते हुए आडवाणी ने कहा कि एक बार भाजपा को `निश्चित विजयी' के रूप में देखे जाने पर स्वाभाविक है कि राजग के आकार और मजबूती पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा तथा और अधिक दल हमारे गठबंधन में शामिल होंगे। आडवाणी ने इस `निश्चित विजय' को हासिल करने के उपायों में जहाँ भाजपा शासित राज्यों के विधानसभा के आगामी चुनावों में जनता का विश्वास खो चुके पार्टी विधायकों को टिकट नहीं देने की सलाह दी वहीं पार्टी के लोगों का आह्वान किया कि वे `मुसलमानों और ईसाइयों सहित समाज के उन सभी वर्गों से बड़े पैमाने पर जनसंपर्क का कार्यक्रम चलायें जो तबके अब तक भाजपा से अलग-थलग रहे हैं।' अल्पसंख्यकों के संदर्भ में उन्होंने कहा `हमें इस बात पर जोर देना चाहिए हमारी पार्टी एक गैर-विघटनकारी और समन्वित एजेंडे के जरिये तथा तुष्टिकरण अथवा धर्म आधारित आरक्षण के बिना अल्पसंख्यकों का सर्वांगीण विकास और सहभागिता चाहती है।' प्रधानमंत्री पद के लिए भाजपा उम्मीदवार आडवाणी ने पार्टी जन का आह्वान किया `राष्ट्रीय कार्यकारिणी की इस बैठक में हम सभी ये प्रण करें कि अगले लोकसभा चुनाव में भाजपा को हिला न सकने वाली एक मजबूत ताकत बनाने हेतु राजग के लिए निर्णायक बहुमत हासिल करने के अपने लक्ष्य को पाने के लिए न एक भी दिन गँवाए न एक भी कार्य छोड़ें और न ही एक भी जीती जा सकने वाली सीट को नजरंदाज करें।' उन्होंने कहा कि जून अभी शुरू ही हुआ है और अगर संसदीय चुनाव निर्धारित समय के अनुरूप होते हैं तो लोकसभा भंग करने और नये चुनावों की घोषणा की अधिसूचना संभव फरवरी तक हो जाएगी। आडवाणी ने कहा, `जून और फरवरी के बीच 272 दिन हैं। स्वाभाविक रूप से यह संख्या हम सबके लिए बहुत महत्व रखती है भले ही यह चुनाव कभी भी क्यों न हों।' गौरतलब है कि लोकसभा में बहुमत के जादुई अंक 272 ही है। |
|