Cylinder

ईंधन की कीमतों में अब तक की सर्वाधिक वृद्धि करते हुए सरकार ने आज पेट्रोल की कीमत पाँच रुपये प्रति लीटर, डीजल की कीमत तीन रुपये प्रति लीटर और रसोई गैस की कीमत 50 रुपये प्रति सिलेण्डर बढ़ाने का फैसला किया।

सरकार ने हालाँकि केरोसिन के दाम यथावत रखे हैं, लेकिन आज के फैसले का उसके सहयोगी दलों और विपक्षी दलों ने जमकर विरोध किया है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह रात साढ़े आठ बजे राष्ट्र को संबोधित पर बताएँगे कि कीमतें बढ़ाने का औचित्य क्या था।

अब जबकि आगामी लोकसभा चुनाव होने में साल भर से भी कम समय बाकी है पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में बढ़ोत्तरी का असर संभवत: मतदाताओं की पसंद पर देखने को मिले। वाम दलों ने फैसले की समीक्षा की माँग करते हुए राष्ट्रव्यापी आंदोलन छेड़ने का ऐलान किया है, जबकि भाजपा ने कहा कि संप्रग सरकार आम आदमी के खिलाफ आर्थिक आतंकवाद फैला रही है।

पूर्व पेट्रोलियम-मंत्री एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता राम नाइक ने कहा, `कांग्रेस को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।' बढ़ी हुई कीमतें आज मध्यरात्रि से लागू हो जाएँगी। दिल्ली में अब पेट्रोल 50.56 रुपये प्रति लीटर, डीजल 31.8 रुपये से बढ़कर 34.8 रुपये प्रति लीटर हो जाएगा, जबकि एलपीजी की कीमत 50 रुपये बढ़कर 344.75 रुपये प्रति सिलेण्डर हो जाएगी। राजनीतिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीपीए) की बैठक के बाद पेट्रोलियम-मंत्री मुरली देवड़ा ने खचाखच भरी प्रेस कॉफ्रेंस में कहा, `हमारे पास और कोई चारा नहीं था।'

देवड़ा ने कहा कि यदि ये कदम नहीं उठाये जाते तो सरकारी स्वामित्व वाली पेट्रोलियम विपणन कंपनियों- इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसी), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) और हिन्दुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) को चालू वित्त वर्ष के दौरान 2,45,305 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान उठाना पड़ता। उन्होंने कहा, `कच्चे तेल के अंतर्राष्ट्रीय दामों में लगातार हो रही भारी वृद्धि के कारण जरूरी हो गया था कि बढ़े हुए बोझ का कुछ हिस्सा मामूली बढ़ोत्तरी के जरिये उपभोक्ता के कंधों पर डाला जाए।' इससे पहले पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फरवरी में बढ़ोत्तरी की गयी थी। सरकार के फैसले के बाद बढ़ी हुई कीमतें आज मध्यरात्रि से लागू हो जाएँगी। न्यूयॉर्क में आज हालाँकि कच्चे तेल की कीमतें 124.01 डॉलर प्रति बैरल चलच रही थीं जो 22 मई के उच्चतम स्तर से 11 डॉलर कम है। 22 मई को कच्चे तेल की कीमत 135 डॉलर प्रति बैरल हो गयी थी।

इसके अलावा सरकार ने पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क एक रुपये प्रति लीटर कम कर 13.45 रुपये तथा डीजल पर भी उत्पाद शुल्क एक रुपये प्रति लीटर कम कर 3.60 रुपये कर दिया है।

पेट्रोलियम सचिव एम.एस. श्रीनिवासन ने कहा कि ईंधन कीमतों में बढ़ोत्तरी से तेल रिटेल कंपनियों को 21,153 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय होगी, जबकि सरकार शुल्क कटौती के जरिये 22,660 करोड़ रुपये की राहत देगी। देवड़ा ने बताया कि उन्होंने माकपा के प्रकाश कारत और भाकपा के गुरुदास दासगुप्ता सहित वाम नेताओं से बातचीत पर उन्हें बढ़ोतरी के पीछे सरकार की मजबूरी से अवगत कराया है। `मैं यह नहीं कह सकता कि उन्होंने बढ़ोतरी के फैसले का समर्थन किया है, लेकिन वे समझ रहे थे।'

भाजपा ने इस फैसले को देश में `आर्थिक आतंकवाद' फैलाने वाला करार दिया तो पूर्व पेट्रोलियम-मंत्री राम नाइक ने कहा, `कांग्रेस को इसकी कीमत चुकानी होगी।' सरकार ने ईंधन की राशनिंग करने की खबरों का खंडन करते हुए कहा कि सभी उचित माँगे पूरी की जा रही हैं और भविष्य में भी पूरी की जाएँगी।

श्रीनिवासन ने कहा, `घरेलू एलपीजी की आपूर्ति को नियंत्रित करने का कोई प्रस्ताव नहीं हैं। यह पूरी तरह गलत खबर है। आपको जितनी गैस चाहिए आप जला सकते हैं।'सरकार ने यह भी तय किया है कि ओएनजीसी और ऑयल इंडिया लिमिटेड जैसी तेल उत्पादन कंपनियाँ चालू वित्त वर्ष के दौरान 45,000 करोड़ रुपये का योगदान करेंगी। इन कंपनियों ने पिछले वित्त वर्ष के दौरान 25,708 करोड़ रुपये का योगदान किया था। ओएनजीसी और ऑयल इंडिया रिफाइनरियों को बेचे जाने वाले कच्चे तेल पर छूट भी देंगे। इंडियन ऑयल, बीपीसीएल और एचपीसीएल जैसी तेल रिटेल कंपनियाँ इस साल ईंधन की बिक्री से होने वाले नुकसान में से 20,000 करोड़ रुपये की भरपाई कर लेंगी। पिछले साल यह आँकड़ा 16,125 करोड़ रुपये था।

श्रीनिवासन ने कहा कि शेष 35 000 करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान की भरपायी के लिए वित्त मंत्रालय हर तिमाही में तेल बांड जारी करेगा। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इससे पहले फरवरी में बढ़ोत्तरी की गयी थी, जब भारतीय बॉस्केट के कच्चे तेल की कीमत 67 डॉलर प्रति बैरल थी। आज की बढ़ोत्तरी में 113 रुपये प्रति बैरल के आँकड़े को ध्यान में रखा गया है। श्रीनिवासन ने कहा कि ईंधन कीमतों में बढ़ोत्तरी का मुद्रास्फीति की दर पर 0.5 प्रतिशत से 0.6 प्रतिशत का असर होगा और सामान्य कीमतों पर भी इतना ही असर देखने को मिलेगा।

पेट्रोलियम-मंत्री मुरली देवड़ा ने पेट्रोल की कीमत में दस रुपये, डीजल की कीमत में पाँच रुपये प्रति लीटर तथा घरेलू कुकिंग गैस की कीमत में 50 रुपये प्रति सिलेण्डर के हिसाब से बढ़ोत्तरी की माँग की थी। साथ ही उन्होंने शुल्कों में जबर्दस्त कटौती की माँग भी उठायी थी। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में पूर्व में मामूली बढ़ोत्तरी इसीलिए की गयी थी, ताकि मुद्रास्फीति की दर पर काबू रखा जा सके। मुद्रास्फीति की दर इस समय 45 महीने के उच्चतम स्तर 8.1 प्रतिशत पर पहुँच गयी है। देवड़ा ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय लागत के अनुरूप घरेलू कीमतों में बढ़ोतरी की आवश्यकता थी। इस हिसाब से पेट्रोल पर 21.43 रुपये प्रति लीटर डीजल पर 31.58 रुपये प्रति लीटर, एलपीजी सिलेण्डर पर 352.99 रुपये तथा केरोसिन पर 35.98 रुपये प्रति लीटर बढ़ोत्तरी होनी चाहिए थी। उन्होंने कहा, `हमने आम आदमी के ईंधन केरोसिन के साथ छेड़छाड़ नहीं की है।' इस बीच, राजस्व सचिव ने कहा कि शुल्क कटौती के सरकार के राजस्व पर असर का आकलन बाद में किया जाएगा। इंडियन ऑयल के अध्यक्ष सार्थक बेहूरिया ने कहा कि आज घोषित पैकेज से रिटेल कंपनियों के मुनाफे और नकदी से जुड़े मुद्दों का समाधान हो गया है।

तीनों पेट्रोलियम विपणन कंपनियों को ईंधन बिक्रि पर 725 करोड़ रुपये रोज का नुकसान हो रहा था। इन कंपनियों में से बीपीसीएल और एचपीसीएल ने कच्चा तेल खरीदने के लिए अगस्त से धन नहीं होने की बात कही तो इंडियन ऑयल के पास सितंबर के बाद कच्चा तेल खरीदने के लिए नकदी नहीं बच रही थी। कच्चे तेल के सीमा शुल्क को पाँच प्रतिशत से घटाकर शून्य कर दिया गया है, इससे सरकार को 15,500 करोड़ रुपये राजस्व नुकसान होगा, जबकि पेट्रोलियम उत्पादों के आयात शुल्क में कटौती से सरकार को 500 करोड़ रुपये का नुकसान होगा। पेट्रोल, डीजल पर उत्पाद शुल्क में कटौती से सरकार को 6,660 करोड़ रुपये का नुकसान होगा। चालू वित्त वर्ष के शेष बचे दस महीनों के दौरान पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हर एक रुपये की बढ़ोत्तरी पर क्रम 1,036 करोड़ रुपये और 4575 करोड़ रुपये की अतिरिव्त आय होगी। इंडियन ऑयल, बीपीसीएल और एचपीसीएल को पेट्रोल की बिक्री पर रोजाना 64.8 करोड़ रुपये, डीजल की बिक्री पर 464.8 करोड़ रुपये, एलपीजी की बिक्री पर 64.8 करोड़ रुपये तथा केरोसिन की बिक्री पर 134.5 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है।