Bhagwan Vishnu - Vaman Avatar

भगवान् विष्णु के दशावतारों में से पांचवां अवतार वामन का है। इनका जन्म अदिति के पुत्र के रूप में हुआ था। दैत्येश्वर बलि का आधिपत्य देखकर देवताओं ने ब्रह्मा सहित विष्णु की प्रार्थना की। उनमें अदिति भी थी। वह अपने पुत्र इंद्र के लिए विशेष चिंतित थी। भगवान् ने अदिति को आश्वासन दिया कि वे कश्यप के अंश में स्वयं उसके गर्भ में प्रवेश करेंगे। इस वर-प्रसाद के आधार पर विजया द्वादशी को अभिजित मुहूर्त में वामन भगवान् ने शंख, चक्र, गदा, पद्मधारी चतुर्भुज रूप में जन्म लिया।

बलि को पाताल भेजने के लिए वामन का अवतार हुआ था। ब्रह्मर्षियों ने इनका उपनयन किया। भगवान् एक ब्राह्मण के वेष में कुरुक्षेत्र में संपन्न होने वाले बलि के यज्ञ में पहुंचे और अग्निहोत्र के लिये तीन कदम भूमि मांगी। बलि की स्वीकृति मिलने पर भगवान ने समस्त लोकों को दो कदमों में नाप लिया तथा तीसरा कदम बलि के सिर पर धर कर उसे पाताल में भेज दिया।

अष्ट दिग्गजों में से एक यमराज के हाथी का नाम भी वामन है। यह दक्षिण दिशा का पालक है। इसकी पत्नी पिंगला नामक हथिनी है।