सारगर्भित फिल्म `समर 2007'
अनुपम खेर के पुत्र सिकंदर खेर ने अपनी पहली फिल्म के रूप में `समर 2007' ही साइन की थी, लेकिन प्रदर्शन के मामले में यह उसकी दूसरी फिल्म है। फिल्म में आसमान छूती महंगाई और किसानों की समस्याओं को उठाया गया है। बताया गया है कि खेतों और जमीनों एवं कर्जों से संबंधित तथा अन्य प्रकार की जो समस्याएं किसानों को झेलनी पड़ती हैं, उनका असर समस्त ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। फिल्म में पाँच मेडिकल छात्रों के माध्यम से इस विषय पर प्रकाश डाला गया है। शहरी सुख- सुविधाओं में पले पाँच मेडिकल छात्रों को महाराष्ट्र के एक दूर- दराज के छोटे से गाँव में ट्रेनिंग कैंप के सिलसिले में जाना पड़ता है। पाँचों को गाँव में तरह-तरह की परेशानियां और कठिनाइयाँ झेलनी पड़ती हैं, किंतु ग्रामीण जीवन का प्रभाव भी उन पर पड़ता है। वे धीरे-धीरे गाँव वालों की कठिनाइयों और परेशानियों को समझने ही नहीं लगते बल्कि उन्हें सुलझाने का प्रयास भी करते हैं। इस दौरान, उन्हें अनेक प्रकार के अनुभव होता हैं। अंत में, जब कैंप समाप्त होने पर उनका जाने का वक्त आता है, तो उन्हें समझ में आता है कि उनमें कितना जबरदस्त बदलाव आया है? वे सही मायने में बेहतर और जिंदादिल इन्सान बनने के साथ-साथ मजबूत भी बन गये हैं। फिल्म में विश्व में माइक्रो क्रेडिट की अवधारणा पेश करने वाले ग्रामीण बैंक के मोहम्मद युनुस के जीवन से प्रेरित महत्वूपर्ण किरदार को निभाया है, सचिन खेडेकर ने। कुल मिलाकर फिल्म यह संदेश प्रसारित करती है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की समस्याओं के प्रति आज के युवाओं को जागरूक और गंभीर होना होगा। |
|