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खरीदारी करना भी एक कला है
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By विनय वीर
प्रकाशित 05/25/2008
 
Womens Shopping

जिन्दगी की जरूरतें पूरी करने के लिए हमें बाजार जाकर घरेलू या दूसरी वस्तुं खरीदनी पड़ती हैं। कई बार दुकानदार हमारी गाढ़े पसीने की कमाई अपनी चालाकी की वजह से आसानी से ऐठ लेता है। हर वस्तु खरीदते समय चार बार सोचें।


खरीदारी करना भी एक कला है
Womens Shopping

जिन्दगी की जरूरतें पूरी करने के लिए हमें बाजार जाकर घरेलू या दूसरी वस्तुं खरीदनी पड़ती हैं। कई बार दुकानदार हमारी गाढ़े पसीने की कमाई अपनी चालाकी की वजह से आसानी से ऐठ लेता है। हर वस्तु खरीदते समय चार बार सोचें।

एक नहीं चार दुकानों से दाम पूछकर खरीदें। कुछ सावधानियां आपकी खरीददारी को सुविधाजनक बना सकती हैं।

कभी भी सस्ती वस्तु नहीं खरीदें, क्योंकि `सस्ता रोये बार-बार, महंगा रोये एक बार'। एक बार अच्छी क्वालिटी की वस्तु खरीदने पर आपको उसकी रिपेयरिंग पर बार-बार खर्च नहीं करना पड़ेगा।

जिस वस्तु की जरूरत नहीं है, वह भले ही कितनी भी सस्ती हो नहीं खरीदनी चाहिए। जरूरत के बिना ज्यादा वस्तु खरीदने से हानि होती है, लाभ नहीं होता है। उसी पैसे से आप कोई अन्य लाभदायक वस्तु खरीद सकते हैं। अच्छा दुकानदार तो गंजे को भी कंघी खरीदने के लिए तैयार करने में पारंगत होता है।

समय का टांका नौ के बराबर होता है। घर में पड़ी खराब वस्तुओं को रिपेयर करवाकर उन्हें प्रयोग करें। उनको दोबारा न खरीदें। इससे आपके धन की बचत होगी।

कभी कोई वस्तु सस्ती मिले, तो वह सारी की सारी मत खरीदें। जरूरत के अनुसार उचित मात्रा में ही खरीदें। समयानुसार तथा जरूरत के अनुसार ही सामान खरीदें। दैनिक प्रयोग, साप्ताहिक प्रयोग एवं वार्षिक प्रयोग की वस्तुओं के अनुसार ही उसकी खरीददारी करें।

सस्ती चीजें बढ़िया नहीं होतीं और बढ़िया चीजें सस्ती नहीं होतीं, इस स्वर्णिम नियम को आप जीवन में अपनाएंगे तो आपके धन की बर्बादी नहीं होगी।

सस्ता सौदा महंगा पड़ता है और महंगा सौदा सस्ता पड़ता है, क्योंकि उसके गुण आपके लिए लाभकारी होंगे। आपके लिए बार-बार रिपेयर का टंटा नहीं रहेगा। कुछ लोग जरूरत होने पर सोना, घर, प्रॉपर्टी, फर्नीचर, व्हीकल बेच देते हैं। जांच-पड़ताल करके आप खरीद सकते हैं। खरीदते समय देखें कि मकान पर कर्ज या बैंक लोन न हो, व्हीकल चोरी का न हो, फर्नीचर में घुन न लगा हो। धोखे से सदा बचें। किसी पर भी विश्वास न करें।

`नौ नकद न तेरह उधार' कभी उधार सामान नहीं खरीदें, क्योंकि दुकानदार अपनी मनमर्जी का रेट लगाकर आपको वस्तु जबरर्दस्ती थमा देता है। हो सकता है कि आउट ऑफ फैशन वस्तु आपको महंगे दाम में दे दे।

उधार करके ज्यादा सामान घर में लाने से अच्छा है, थोड़ा नगद खर्च करके थोड़ा-सा ही सामान खरीदा जाए। इससे आपके धन की बर्बादी नहीं होगी।

सुबह देनदार के रूप में उठने से अच्छा है कि रात्रि को भूखा ही सोया जाए। जहां तक हो सके ऋण मत लें। यदि लेना ही पड़े तो यथासमय वापिस भी कर दें। कर्जदार होना सबसे बड़ी दरिद्रता है। कर्ज लेना हो, तो किसी बैंक से लें। ब्याज भी कम लगेगा।

जब आप ज्यादा वस्तुं खरीदें तो कृपया टोटल जरूर चैक कर लें, क्योंकि दुकानदार की गलती आपके जेब पर भारी पड़ सकती है।

उधार में फंसा हुआ व्यक्ति जाल में फंसे हुए पक्षी के समान है, क्योंकि उधार नुकसानदायक होता है। यदि उधार करना पड़े तो तुंत अदा करें, चुकता करके चिन्ता मुक्त हो जाएं। दोस्त को उधार मत दें, क्योंकि मांगने पर वह दुश्मन बन जाएगा। उधार देने से ग्राहक छूट जाते हैं।

जो व्यक्ति अपना माल उधार बेचता है, उसके पास ग्राहक तो बहुत आते हैं, परन्तु पैसा कम आता है। अक्सर उधार का पैसा डूब जाया करता है। समय पर वापिस आया धन अच्छा रहता है। अपने घर की पुरानी चीजें बेच दें और नई तकनीक की वस्तुं खरीदें। क्योंकि नवीनता सदा सुखदायी होती है। हर नई चीज बढ़िया होती है। `नया नौ दिन, पुराना सौ दिन' परन्तु नये के अपने गुण होते हैं।

यदि आप खरीददारी में पारंगत हैं तो अपने गाढ़े पसीने के धन को सदुपयोग में ला सकते हैं। एक जागरूक नागरिक कभी भी धोखा नहीं खाता। खरीददारी सचमुच एक कला है। अपने बच्चों को बचपन से ही बाजार से खरीददारी कराना सिखाएं। ताकि आने वाले जीवन में वे ठगे न जाएं, धोखा न खाएं।