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भारत-अमेरिका परमाणु करार पर संप्रग-वाम समिति की बैठक से पहले विदेश-मंत्री प्रणव मुखर्जी ने मार्कसवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) महासचिव प्रकाश करात से मुलाकात की है और वामपंथी पार्टियों से कहा कि वे सरकार को आईएईए के साथ परमाणु सुरक्षा मानक समझौता करने की इजाजत दें। मुखर्जी ने कहा कि यह भारत को रूस और फंस के साथ परमाणु व्यापार करने में मदद करेगा, लेकिन समझा जाता है कि माकपा महासचिव ने मुखर्जी से कहा कि उन्हें यह प्रस्ताव स्वीकार्य नहीं है क्योंकि इससे 123 संधि कार्यान्वित हो जाएगी।

करात से जब संपर्क किया गया तो उन्होंने बैठक की पुष्टि करने से इनकार कर दिया। बहरहाल सूत्रों का कहना है कि दोनों नेताओं के बीच यह मुलाकात कल देर रात हुई है। संप्रग-वाम समिति की बैठक कल यहाँ होगी, जिसमें करार के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की जाएगी। जहाँ तक अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के निदेशक मंडल से भारत केन्द्रित सुरक्षा मानक समझौते को मंजूरी दिलाने का मुद्दा है वामपंथी पार्टियाँ लगातार कह रही हैं कि यह उन्हें स्वीकार्य नहीं है क्योंकि इसे भारत-अमेरिका परमाणु करार के संदर्भ में किया जा रहा है।

जहाँ तक रूस और फंस के साथ परमाणु व्यापार का मामला है अभी आईएईए के पास जाने की तात्कालिक जरूरत नहीं है क्योंकि दोनों ही देशों ने भारत के साथ किसी द्विपक्षीय परमाणु करार पर कोई हस्ताक्षर तक नहीं किए हैं। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की रूस की पिछली यात्रा के दौरान इस तरह के द्विपक्षीय परमाणु करार पर हस्ताक्षर का मामला टाल दिया गया था।

उल्लेखनीय है कि माकपा पोलित ब्यूरो सदस्य सीताराम येचुरी इस मुद्दे पर वामपंथी पार्टियों के रुख पर अपना पक्ष स्पष्ट करते हुए यह कह चुके हैं कि `हमारा ऐतराज आईएईए पर नहीं है। हमारा ऐतराज (भारत अमेरिका असैनिक परमाणु ऊर्जा सहयोग करार के कार्यान्वित को लेकर) 123 संधि कर है जो हमारे हिसाब से (अमेरिका के) हाईड ऐक्ट से गहराई से जुड़ा है।' भारत -अमेरिका असैनिक परमाणु ऊर्जा सहयोग करार पर सरकार और उसके वामपंथी सहयोगियों के बीच के मतभेद को दूर करने के लिए पिछले साल नवंबर में गठित संप्रग-वामपंथ समिति की बैठक कल होगी, जिसमें इस पर चर्चा होगी कि मनमोहन सरकार को आईएईए के साथ परमाणु सुरक्षा मानक समझौत पर हस्ताक्षर के लिए कदम आगे बढ़ाना चाहिए या नहीं।

मनमोहन सरकार को उम्मीद है कि वामपंथी पार्टियों से उसे परमाणु सुरक्षा मानक समझौता मुकम्मल करने के लिए हरी झंडी मिल जाएगी। सरकार को यह भी उम्मीद है कि वामपंथी पार्टियाँ उसे परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह से उसके दिशानिर्देशों से छूट पाने की इजाजत दे देंगी, ताकि वह अंतरराष्ट्रीय परमाणु व्यापार में शामिल हो सके। उल्लेखनीय हैं कि ये दो कदम परमाणु करार को कार्यान्वित करने की दिशा में उठाना अनिवार्य है।