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यूरेनियम बिक्री मामला - नहीं माना ऑसी!
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By विनय वीर
प्रकाशित 06/24/2008
 
India - Australia Uranium ऑस्ट्रेलिया ने कहा है कि वह भारत को यूरेनियम बेच सकता है बशर्ते भारत सुरक्षा मानकों पर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की चिंताओं को दूर करते हुए अमेरिका के साथ परमाणु करार करे।

यूरेनियम बिक्री मामला - नहीं माना ऑसी!
India - Australia Uranium

ऑस्ट्रेलिया ने कहा है कि वह भारत को यूरेनियम बेच सकता है बशर्ते भारत सुरक्षा मानकों पर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की चिंताओं को दूर करते हुए अमेरिका के साथ परमाणु करार करे। ऑस्ट्रेलिया के विदेश-मंत्री स्टीफन स्मिथ ने आज यहाँ विदेश-मंत्री प्रणब मुखर्जी के साथ मुलाकात के दौरान यह बात कही। मुलाकात के बाद संवाददाता सम्मेलन में श्री स्मिथ ने कहा कि हालाँकि ऑस्ट्रेलिया की स्पष्ट नीति है कि वह परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर न करने वाले देश को यूरेनियम नहीं बेचेगा लेकिन मौजूदा लेबर पार्टी सरकार भारत-अमेरिका परमाणु करार पर गंभीरता से नजर रखे हुए है।

ऑस्ट्रेलिया के विदेशमंत्री ने कहा कि 123 समझौते के अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) या परमाणु आपूर्तिकर्ता देशों के समूह (एनएसजी') में पहुँचने के बाद ही ऑस्ट्रेलिया भारत को यूरेनियम की आपूर्ति के बारे में विचार करेगा। श्री स्मिथ ने कहा जब हम इस बारे में विचार करेंगे उस समय भारत के लिए इसके महत्व और इस बारे में उसकी दलीलों को दिमाग में रखकर ही कोई फैसला करेंगे। हालाँकि दोनों नेताओं ने भारत और ऑस्ट्रेलिया के परमाणु निरस्त्रीकरण रिकॉर्ड बेहतर होने का हवाला देते हुए यूरेनियम आपूर्ति की संभावना के संकेत दिये।

साथ ही श्री मुखर्जी और श्री स्मिथ ने इसकी तुलना ऐसी रेलगाड़ी से की जिसके गंतव्य पर पहुँचने का समय अभी निर्धारित नहीं किया गया है। श्री मुखर्जी ने कहा जिस समय हमें यूरेनियम की जरूरत होगी स्वाभाविक रूप से तब तक इस दिशा में वांछित प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी और ऑस्ट्रेलिया से आपूर्ति का सवाल भी तब ही उठेगा। गौरतलब है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरत का महज तीन प्रतिशत ही परमाणु ऊर्जा से पूरी करता है और अमेरिका के साथ परमाणु करार कर इसे 2016 तक नौ प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य है।

दोनों नेताओं ने कहा कि उन्होंने भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच आर्थिक और सुरक्षा मामलों में आपसी सहयोग बढ़ाने पर विचार-विमर्श किया। इसके अलावा आतंकवाद से निपटने में साझा प्रयास से जुड़े समझौते पर हस्ताक्षर भी किये गये। इसके तहत दोनों देशों के बीच रक्षा और खुफिया मामलों पर सालाना बातचीत करने और अपराधियों के प्रत्यर्पण का भी जिक्र किया गया है।

श्री मुखर्जी ने कहा कि दोनों देशों के बीच पिछले साल दस अरब डॉलर का आपसी व्यापार हुआ जिसमें अधिकांश हिस्सा ऑस्ट्रेलिया से निर्यात होने वाले सोना और कोयले का रहा। उन्होंने कहा कि इसे देखते हुए दोनों देश ऑस्ट्रेलिया के खनिजों का भारत को निर्यात बढ़ाने की दिशा में काम करेंगे। श्री स्मिथ ने कहा कि वैश्विक मंच पर भारत के निरंतर बढ़ते महत्व के बारे में कोई शंका नहीं है। उन्होंने कहा कि इसके मद्देनजर सुरक्षा परिषद के विस्तार के साथ भारत को इसकी सदस्यता दी जानी चाहिए।