लालू, पासवान और पवार से मिलीं सोनिया
संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) एवं कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी परमाणु करार को लेकर सरकार तथा वामपंथी दलों के बीच बने गतिरोध को दूर करने के लिए बीच का कोई रास्ता निकलने में जुट गयी है और इस सिलसिले में उन्होंने आज घटक दलों के नेताओं से बातचीत की। श्रीमती गांधी ने यहाँ अपने निवास पर अलग-अलग बैठकों में इस संबंध में राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव, लोक जनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष रामविलास पासवान तथा राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष शरद पवार के साथ विचार-विमर्श किया। इन बैठकों में करार पर आगे बढ़ने की सरकार की मंशा तथा इस स्थिति में वाम दलों के समर्थन वापस लेने और सरकार गिराने की चेतावनी से उत्पन्न हालात पर विचार किया गया। घटक दल करार पर तो सरकार के साथ हैं, लेकिन वे वाम दलों को पूरी तरह किनारे करने तथा तत्काल चुनाव के पक्ष में नहीं हैं। अमेरिका के साथ करार को बुश प्रशासन के कार्यकाल में अंतिम रूप देने के लिए कांग्रेस के समक्ष इसी माह निर्णायक कदम उठाने की चुनौती है। श्रीमती गांधी से मुलाकात के बाद तीनों ही नेताओं ने कहा कि इस मुद्दे पर बातचीत से ही कोई रास्ता निकाल सकता है। श्री यादव का कहना था कि यह चुनाव का समय नहीं है, लेकिन कोई चुनाव से भागता भी नही हैं। उन्होंने कहा कि करार देश के हित में है, हमें यह बात वाम दलों को समझानी है और उनकी आशंकाओं को भी समझना है। श्री यादव ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के नेता लालकृष्ण आडवाणी सत्ता में आने के लिए छटपटा रहे हैं, लेकिन संप्रग और वाम दल उनका सपना पूरा नहीं होने देंगे। श्री पासवान ने कहा कि देश हित में जो काम हो वह होना चाहिए, लेकिन वाम दलों की आशंकाओं का भी बातचीत से हल निकलना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार और वाम दलों दोनों का ही लक्ष्य देशहित है, लेकिन दोनों अलग-अलग तरह से सोच रहे हैं। संप्रग-वाम समिति की बैठक में हल खोजा जाएगा। बैठक 25 जून को होनी है। उन्होंने कहा कि सरकार भी रहेगी और वाम दलों का भी साथ रहेगा। राकांपा अध्यक्ष शरद पवार ने पहले श्रीमती गांधी के साथ बैठक की और उसके बाद मार्क्सवादी कांग्रेस पार्टी के महासचिव प्रकाश करात ने उनके साथ बातचीत की। श्री पवार ने संवाददाताओं से परमाणु करार के बारे में सिर्प इतना कहा कि वह लोकतंत्र में बातचीत पर भरोसा करते हैं। बातचीत से रास्ता निकलना चाहिए। उन्होंने कहा कि वह श्रीमती गांधी से किसानों के ऋण माफी के क्रियान्वयन के मामले में मिले थे, जबकि श्री करात से उनकी बातचीत केरल में वाम, लोकतांत्रिक मोर्चा और राकांपा के संबंधों को लेकर हुई। इस बीच सूत्रों का कहना है कि घटक दलों के साथ कांग्रेस अध्यक्ष की इन बैठकों का एक मकसद यह संकेत देना भी कि पार्टी करार को आगे बढ़ाने के लिए तत्पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को अकेले नहीं छोड़ रही है। |
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