भारत ने आज कहा कि परमाणु अप्रसार के मुद्दे पर उसकी प्रतिबद्धता `किसी दूसरे से कम नहीं है, लेकिन ऑस्ट्रेलिया के साथ यूरेनियम खरीद का मामला तभी आएगा जब परमाणु व्यापार अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था के अनुरूप लागू हो जाए।

विदेश-मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा कि यूरेनियम विक्रय के बारे में अभी कुछ भी कहना `जल्दबाजी' होगी क्योंकि अमेरिका के साथ परमाणु करार पर देश में अभी बहस जारी है। विदेश-मंत्री ने एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा `मैं यहाँ आस्ट्रेलिया से यूरेनियम प्राप्त करने जैसे किसी एक मुद्दे को लेकर नहीं आया हूँ। यूरेनियम के बारे में लेबर पार्टी की स्थिति से पिछले कुछ समय से हम वाकिफ हैं। अप्रसार के मुद्दे पर ऑस्ट्रेलिया की प्रतिबद्धता को भी हम जानते हैं और उसका हम आदर करते हैं।' उन्होंने कहा `जहाँ तक हमारी यूरेनियम की आवश्यकता का सवाल है तो मैं सोचता हूँ कि इस मुद्दे पर मंत्री स्मिथ ने जैसा कहा है कुछ कहना जल्दबाजी होगी मैं अमेरिका के साथ 123 करार करने के संबंध में घरेलू राजनीतिक मोर्चे पर व्यस्त हूँ।'

मुखर्जी ने कहा `यह एक ऐसा विषय है जो हड़बड़ी में नहीं हो सकता है। इसकी कोई संभावना नहीं है अथवा यह कब हो पाएगा इसके बारे में भी हम कुछ नहीं कह सकते हैं। मुखर्जी ने कहा `एक बार समूची प्रक्रिया पटरी पर आ जाए और अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था के अनुसार यूरेनियम के व्यापार के लिए भारत को अनुमति मिल जाए तब यह प्रश्न उठेगा।' स्मिथ ने कहा कि जब यह 123 समझैता आईएईए और एनएसजी तक जाएगा उसके बाद ही ऑस्ट्रेलिया अपनी व्यवस्था के बारे में विचार करेगा। `हमने अमेरिकी सरकार से कह दिया है कि जब ऐसा होगा तो उसी के बाद ऑस्ट्रेलिया इस प्रस्ताव पर विचार करेगा।'

मुखर्जी ने यह स्वीकार किया कि परमाणु अप्रसार के मामले में भारत की प्रतिबद्धता `किसी अन्य देश से कम' नहीं है और परमाणु मुक्त दुनिया के साझा लक्ष्य में दोनों देशों की हिस्सेदारी है। विदेश-मंत्री ने कहा कि भारत ने ऑस्ट्रेलिया से उसके परमाणु निरस्त्राrकरण आयोग की विस्तृत जानकारी माँगी है। ऑस्ट्रेलिया में यह आयोग हाल ही में स्थापित किया गया था।

इस कदम के लिए ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री केविन रड की प्रशंसा करते हुए मुखर्जी ने कहा `आज से 20 साल पहले इसी दिन हमारे पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने परमाणु मुक्त दुनिया का अपना दृष्टिकोण रखा था।' उन्होंने कहा `हमें इस बारे में परीक्षण करना होगा तथा इसे देखना होगा कि हम अपने इस इच्छित लक्ष्य तक कैसे पहुँच पाएँगे।' विदेश-मंत्री ने कहा `जहाँ तक अप्रसार के बारे में हमारी प्रतिबद्धता का सवाल है तो यह पूरी तरह है सही दिशा में है।' भारत, जापान, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका की चार पक्षीय सुरक्षा वार्ता के बारे में मुखर्जी ने कहा `जापान ने इस दिशा में पहला कदम उठाया था। लेकिन कुछ चर्चाओं को छोड़ कर यह आगे नहीं बढ़ पाया। यह कहना उचित नहीं होगा कि चीन की चिंताओं के कारण हमें बातचीत में रुचि नहीं है।' उन्होंने कहा `इसके कई पहलू हैं जिसका हम परीक्षण कर रहे हैं कि इसे कैसे शुरू किया जाए।' मुखर्जी ने कहा कि विभिन्न मुद्दों पर मतभेदों के बावजूद भारत चीन और पाकिस्तान जैसे अपने पड़ोसियों के साथ आपसी सहयोग को बढ़ावा देने के लिए काम रहा है।