तप रही है घाटी - हिंसक प्रदर्शनों ने रोकी अमरनाथ यात्रा
आधिकारिक तौर पर अमरनाथ यात्रा को आज दूसरे दिन भी जम्मू से रोके जाने का कारण चाहे संगम के स्थान पर ग्लेशियर का गिरना या फिर पड़ावस्थलों पर भारी भीड़ को बताया जा रहा है, पर सच्चाई यह है कि कश्मीर में अमरनाथ यात्रा श्राइन बोर्ड को आवंटित की गई जमीन के विरोध में हो रहे हिंसक प्रदर्शनों से डरे हुए प्रशासन ने अमरनाथ यात्रा को रोका है। हिंसा का तांडव आज भी जारी रहा। अपुष्ट सूचनाओं के मुताबिक, गंदरबल में आज भी प्रदर्शनकारियों ने उन कुछ वाहनों पर पथराव किया जो सीधे अमरनाथ यात्रा में शामिल होने के लिए जा रहे थे। प्रवक्ता के बकौल, तीर्थयात्रियों की भारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आज दूसरे दिन भी अमरनाथ यात्रा को स्थगित रखा गया। अधिकारियों ने यहाँ बताया कि गंदरबल जिले के बालटाल तथा पहलगाम आधार शिविर पर तीर्थयात्रियों की भारी भीड़ के कारण भगवती नगर स्थित आधार शिविर से श्रद्धालुओं को आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी जा रही है। पर सरकार सीधे जाने वाले श्रद्धालुओं को रोक पाने में कामयाब नहीं हो पा रही है। पहलगाम तथा बालटाल मार्ग के रास्ते श्रद्धालुओं की संख्या तेजी से बढ़ने के कारण यात्रा शुरू होने के दिन से लेकर कल शाम तक 2.83,924 श्रद्धालु पवित्र हिमलिंग के दर्शन कर चुके हैं। यात्रा की शुरुआत 17 जून को हुई थी। अधिकारियों ने बताया कि मंगलवार को संगम में ग्लेशियर का हिस्सा गिरने से यात्रा मार्ग बाधित हो गया। संगम 14500 फुट की ऊँचाथ पर स्थित गुफा से मात्र 3 किलोमीटर दूर वह स्थान है, जहाँ पर पहलगाम और बालटाल मार्ग मिलते हैं। हालांकि श्रद्धालुओं को पहलगाम के रास्ते पवित्र गुफा की ओर जाने की इजाजत दी गई है। इससे पहले खराब मौसम तथा बारिश के कारण 20 जून को यात्रा स्थगित करनी पड़ी थी। यह आधिकारिक कारण था। पर सच्चाई यह है कि अमरनाथ यात्रियों को प्रदर्शनकारियों की हिंसा से बचाने के लिए उन्हें आगे नहीं बढ़ने दिया जा रहा है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि श्रीनगर तथा कश्मीर घाटी के प्रमुख कस्बों में आज तीसरे दिन भी हड़ताल जारी रहने से जनजीवन अस्त-व्यस्त रहा। श्राइन बोर्ड को जमीन के आवंटन का विरोध कर रहे लोगों पर पुलिस बल के कथित इस्तेमाल को लेकर यह हड़ताल हो रही है। शहर में पिछले 3 दिन के दौरान पथराव कर रहे प्रदर्शनकारियों और पुलिसकर्मियों के बीच झड़प में एक व्यक्ति की मौत हो गई है, जबकि 32 पुलिसकर्मियों सहित तकरीबन 200 अन्य घायल हो गए। इस हड़ताल का आह्वान किसी गुट ने नहीं किया है, पर दुकानें, व्यावसायिक व शैक्षिक संस्थान बंद हैं। श्रीनगर व गंदरबल जिलों में सड़कों से वाहन नदारद हैं। इससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। परिवहन के अभाव में सरकारी कार्यालयों में उपस्थिति काफी कम रही। खबरों में कहा गया है कि नौहटा खान्यार तथा बेमिना में युवकों के समूहों ने आज सुबह पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों पर पथराव किया। पुलिस ने उन्हें तितर-बितर करने के लिए लाठियाँ चलाई तथा आंसू गैस के गोले छोड़े। इसमें कई लोग घायल हो गए। अन्य जिलों तथा घाटी के प्रमुख कस्बों से मिली खबरों के अनुसार, दक्षिण तथा उत्तरी कश्मीर में आंशिक से लेकर पूर्ण हड़ताल रही। वहाँ दुकानें तथा व्यावसायिक संस्थान बंद रहे। सत्तारुढ गठबंधन सरकार के घटकों कांग्रेस तथा पीडीपी के बीच मतभेद एक बड़ा विवाद बन गया है। पीडीपी बोर्ड को 800 कनाल भूमि के आवंटन का विरोध कर रही है। सारा विवाद जम्मू-कश्मीर सरकार द्वारा जंगल की जमीन तीर्थयात्रियों की व्यवस्था के लिए अमरनाथ श्राइन बोर्ड को दिए जाने का राज्य सरकार का कहना है कि उसने तीर्थयात्रियों के लिए अस्थायी झौपड़ियां व शौचालय बनाने के लिए यह जमीन दी है। इसका विरोध सबसे पहले पर्यावरण क्षेत्र से जुड़े श्रीनगर के कार्यकर्ताओं ने किया। इसके बाद स्थानीय नेता भी इसमें शामिल हो गए और अब यह मामला सांप्रदायिक रूप इसलिए धारण कर चुका है, क्योंकि हिंसक भीड़ अमरनाथ श्रद्धालुओं को भी निशाना बना रही है। बुकमार्क किजिए
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