केसरिया लहर, दक्षिण में खिला कमल
येदियुरप्पा 28 को लेंगे शपथविधायक दल की बै क आज
दक्षिण भारत में अपनी सरकार बनाने की लंबे समय से लालसा रखने वाली भाजपा की मुराद आज पूरी हो गयी, जब कर्नाटक विधानसभा में उसने लगभग बहुमत हासिल कर लिया, लेकिन तीन सीटों की कमी रह गयी। नब्बे के दशक के शुरुआत में रामजन्मभूमि आंदोलन की पृष् भूमि में शनै:- शनै: कदम बढ़ाने वाली भाजपा ने कर्नाटक की 224 सदस्यीय विधानसभा में 110 सीटें हासिल की हैं, जो बहुमत से तीन कम हैं। पिछली दफा के मुकाबले कांग्रेस के प्रदर्शन में भी सुधार हुआ है और उसने 80 सीटों पर कब्जा किया। पिछले साल कर्नाटक के सबसे कम समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले 66 वर्षिय बी.एस. येदियुरप्पा के 28 मई को राज्य के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने की संभावना है। पिछली दफा वह मात्र सात दिन तक राज्य के मुख्यमंत्री रहे थे। भाजपा विधायक दल की कल बै क बुलाई गयी है, जिसमें येदियुरप्पा को नेता चुना जाएगा, जिसके बाद वह सरकार बनाने का दावा करने के लिए राज्यपाल से मिलेंगे। कर्नाटक में जीत से उत्साहित भाजपा नेतृत्व ने कहा कि इन परिणामों ने अगले लोकसभा चुनावों की लड़ाई में पार्टी को दौड़ में आगे पर दिया है। कांग्रेस और भाजपा के साथ राज्य में सत्ता का लुत्फ उ ाने के बाद उनके नीचे से गलीचा खींचने वाली जनता दल सेव्युलर सिर्फ 28 सीटों पर सिमट गयी है, जो 2004 में उसे हासिल सीटों से 30 कम हैं। जद (एस) ने पिछले नवंबर में भाजपा का दामन छोड़ दिया था। कर्नाटक में सत्ता तक पहुँचने का भाजपा का सफर आसान नहीं रहा। कर्नाटक में पिछले विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा जहाँ ग बंधन के जरिये सिर्फ 20 महीने तक ही सत्ता का सुख भोग सकी, वहीं इस बार पार्टी ने अपने दम पर राज्य विधानसभा में लगभग बहुमत हासिल पर कर्नाटक को दक्षिण भारत का अपना प्रवेश द्वार बनाने में सफलता पायी है। भाजपा ने कर्नाटक विधानसभा चुनाव में पहली बार अपना खाता वर्ष 1983 में खोला। पार्टी ने उस वर्ष 110 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किये थे और उसे 18 सीटों पर कामयाबी मिली। उस वर्ष पार्टी 7.9 प्रतिशत वोट हासिल करने में सफल रही। वर्ष 1983 में कांग्रेस ने 221 उम्मीदवार खड़े किए थे और उसे 82 सीटों पर सफलता हासिल हुई। पार्टी को उस वर्ष 40.4 प्रतिशत वोट हासिल हुए थे। उस वर्ष हालाँकि 95 सीट जीत पर जनता दल (एस) सबसे बड़ी पार्टी बनी। दक्षिण भारत में भाजपा का अभियान यहीं नहीं रूपा। वर्ष 1994 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 223 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किये और उसे 40 सीटों पर सफलता हासिल हुई। पार्टी को मिले वोटों का प्रतिशत 17 हो गया। वर्ष 1994 में कांग्रेस ने 222 स्थानों पर उम्मीदवार खड़े किये थे और उसे 35 सीटें ही प्राप्त हुई थीं। पार्टी को इस चुनाव में सिर्फ 27.2 प्रतिशत मत प्राप्त हुए थे। उस वर्ष 114 सीटें जीत पर जनता दल (यू) ने सरकार बनायी थी। वर्ष 1994 के चुनाव में माकपा और जेडी (एस) को एक-एक सीट मिली थी, जबकि बहुजन समाज पार्टी पहली बार प्रदेश में एक सीट जीतने में सफल रही। वर्ष 1999 के विधानसभा चुनाव में भी भाजपा ने अपने दक्षिण अभियान की रफ्तार बनाये रखी। इस वर्ष पार्टी को 44 सीटें मिलीं और उसे 20.7 प्रतिशत मत प्राप्त हुए। इस वर्ष कांग्रेस को 132 सीटें मिली और वह 40.8 प्रतिशत वोट हासिल पर प्रदेश में सरकार बनाने में सफल रही। इस चुनाव में जेडी (यू) को 18 सीटें प्राप्त हुईं और वह 13.5 प्रतिशत वोट हासिल करने में सफल रही। इस वर्ष जेडी (एस) को 10 सीटों पर जीत हासिल हुई और वह 10.4 प्रतिशत वोट हासिल करने में सफल रही। भाजपा के दक्षिण अभियान के लिहाज से वर्ष 2004 का विधानसभा चुनाव कई मायने में महत्वपूर्ण रहा। इस वर्ष पार्टी ने 198 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किये और 79 सीटों पर जीत दर्ज करने में सफल रही। पार्टी को चुनाव में 28.3 प्रतिशत मत प्राप्त हुए। वर्ष 2004 में कांग्रेस को 65 सीटें पर जीत हासिल हुई और वह 35.3 प्रतिशत वोट हासिल करने में सफल रही। इस वर्ष जेडी (एस) को 58 सीटे हासिल हुई तथा जेडी (यू) को पाँच सीटों पर कामयाबी मिली। |
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