कश्मीर में शांति की खातिर श्राइन बोर्ड की उदारता
अमरनाथ यात्रा श्राइन बोर्ड को आबंटित जिस जमीन को लेकर कश्मीर जल उठा है, उस पर श्राइन बोर्ड स्वयं ही दावा छोड़ने को राजी हो गया है। इसकी घोषणा राज्यपाल एन.एन. वोहरा द्वारा बोर्ड के चेयरमेन के तौर पर किसी भी समय की जा सकती है। इस बीच, जमीन मुद्दे पर विभिन्न गुटों द्वारा कश्मीर में हड़ताल के आह्वान के मद्देनजर जम्मू से अमरनाथ यात्रा को रोक दिया गया है। यात्रियों को सीधे भी नहीं जाने दिया जा रहा है। अमरनाथ यात्रा श्राइन बोर्ड के सूत्रों के बकौल, मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद ने कल देर रात राज्यपाल से मुलाकात कर इस मसले पर गहन विचार-विमर्श किया। इसके बाद राज्यपाल ने जमीन को छोड़ देने की हामी भर दी है। हालाँकि अभी इसकी औपचारिक घोषणा नहीं की गई है। सूत्र कहते हैं कश्मीर में शांति लौटाने के लिए राज्यपाल एकाध दिन में यह घोषणा कर सकते हैं। सूत्र कहते हैं कि मुख्यमंत्री नहीं चाहते कि मामले का अवांछित तत्वों द्वारा अनुचित लाभ उठाया जाए, इसलिए उन्होंने कल देर रात राज्यपाल से जो आग्रह किया, उससे वे समझते हैं कि सांप भी मर जाएगा और लाठी भी नहीं टूटेगी। इस बीच, विभिन्न गुटों के आह्वान पर जमीन विवाद पर आज 5वें दिन भी कश्मीर में हड़ताल और हिंसक प्रदर्शनों का सिलसिला जारी रहा। प्रदर्शनकारियों ने बटमालू, नौहट्टा, शौरा चौक और डल गेट पर सुरक्षाबलों पर पथराव किया, जिस कारण दो केरिपुब के जवान गंभीर रूप से जख्मी हो गए। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में 25 के करीब प्रदर्शनकारी जख्मी हुए हैं। हालाँकि आज विभिन्न गुटों द्वारा कश्मीर में हड़ताल का आह्वान किए जाने के मद्देनजर प्रशासन ने जम्मू से अमरनाथ श्रद्धालुओं के जत्थे की रवानगी स्थगित कर दी। इतना जरूर था कि प्रशासन द्वारा बार-बार यात्रा को रोके जाने से श्रद्धालु क्षुब्ध होकर बिना दर्शनों के वापस भी लौटने लगे हैं। अमरनाथ यात्रा को बार-बार स्थगित करने के कारण वैष्णो देवी के तीर्थस्थान में भीड़ बढ़ने से श्राइन बोर्ड उसे कई बार रोक चुका है। |
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