विख्यात मार्वल कॉमिक्स के पात्र को लेकर कुछ वर्ष पहले `द इनकेडिबल हल्क' फिल्म बनी थी। अब उसी पात्र को लेकर कहानी को आगे बढ़ाया गया है उसकी अगली कड़ी के रूप में। फिल्म की शुरूआत में पहली फिल्म की कहानी . .
कलाकार - एड नॉर्टन, टिम रॉथ, लिव टेलर
निर्देशक - लुई लटेरिअर
विख्यात मार्वल कॉमिक्स के पात्र को लेकर कुछ वर्ष पहले `द इनकेडिबल हल्क' फिल्म बनी थी। अब उसी पात्र को लेकर कहानी को आगे बढ़ाया गया है उसकी अगली कड़ी के रूप में। फिल्म की शुरूआत में पहली फिल्म की कहानी को संक्षिप्त में बताया गया है कि किस प्रकार एक वैज्ञानिक गामा-किरणों से प्रभावित होता है और उसे अमानुषी स्वरूप प्राप्त होता है।
निर्देशक लुई लटेरिअर के फिल्म की इस दूसरी कड़ी में वैज्ञानिक ब्रूस बैनर को अपनी स्थिति को सम्हालने में कुछ हद तक कामयाब बताया गया है। वह अपने-आप पर नियंत्रण रखना सीख गया है। कई महीनों से उसके स्वरूप में परिवर्तन भी नहीं हुए। अब वह अपनी प्रेमिका के साथ नई ज़िंदगी शुरू करने की सोचता है। परंतु दुनिया की सत्ता-पिपासु अमेरिकन सरकार उसे कैसे छोड़ सकती है। उसके अमानवी रूप और शक्ति पर वह अपना अधिकार जमाना चाहती है। इस `हल्क' को वह अपना गुलाम बनाना चाहती है। एक और वैज्ञानिक टिम भी विज्ञान के दुप्रयोग से `हल्क' बन जाता है।' इस नये `हल्क' का आकार, शक्ति और रूप वैज्ञानिक ब्रूस के `हल्क' से अधिक बड़ा और अधिक खतरनाक होता है। फिल्म की कहानी वैज्ञानिक ब्रूस के मानवी बनने के प्रयत्नों से हट कर दोनों हल्कों के संघर्ष पर केन्द्रित हो जाती है। दर्शक गौर करें कि आजकल फिल्मों में बताए जा रहे संघर्ष में कैसे-कैसे बदलाव हो रहे हैं। इस फिल्म में भी दोनों हल्कों का संघर्ष अद्भुत कम्प्यूटर द्वारा निर्मित पात्रों के बीच संघर्ष के रुप में बताया गया है। दर्शकों को वह अवश्य बांधे रख सकता है, पर केवल फिल्म को देखते समय तक। दिल और दिमाग को दृश्य छू नहीं पाते। ऐसी फिल्मों का तकनीक स्तरीय होना अनिवार्य है। कम्प्यूटर के बनाये दोनों हल्क सचमुच प्रभावित कर जाते हैं। गौर से देखने वाले दर्शकों को ब्राजील की झोपड़-पट्टी प्रभावित करेगी और मानवी शरीर से उपजने वाले हल्क का चित्रांकन भी।