De Taali Hindi Movie

कलाकार - रितेश देशमुख, आयषा ताकिया, आफताब शिवदासानी, रिमी सेन, सौरभ शुक्ल, अनुपम खेर

संगीत - विशाल-शेखर

निर्देशक - ई. श्रीनिवास

याद कीजिए, आखिरी बार कब आपने स्नेह व ममता से भरा उद्गार `दे ताली' कहते हुए अपना हाथ आगे बढ़ाया था? ठीक वैसा ही स्नेह और ममता भरा वातावरण निर्देशक ई. श्रीनिवास ने अपनी फिल्म `दे ताली' में रचा है। उसे महसूस किया जा सकता है।

लोकप्रिय गीत `दे ताली' के साथ उजागर होती है रितेश देशमुख, आयषा ताकिया और आफताब की मोहित करने वाली दोस्ती। उस दोस्ती को न तो पैसों की दीवार और न ही स्त्री-पुरुष के भेद बिगाड़ सकते हैं। एक-दूसरे के विभिन्न स्वभावों को सहते हुए उनकी घनिष्टता कायम रहती है। अमीर आफताब के प्यार के सिलसिले अधूरे ही रह जाते हैं। और फिर रिमी सेन के साथ उसका प्रेम शादी तक पहुँच जाता है। दोस्त रितेश एवं आयषा चिंतित होते हैं, क्योंकि उन्हें पता होता है कि रिमी उनके दोस्त आफताब से नहीं, उसकी अमीरी से प्यार करती है।

रितेश एवं आयषा खूब प्रयत्न करते हैं आफताब को समझाने का, रिमी को उससे दूर करने का, पर सब व्यर्थ जाता है। दोस्तों से झगड़ा कर आफताब रिमी से शादी करने निकलता है। और फिर कहानी में जबरदस्त मोड़ आता है। रितेश द्वारा रिमी का अपहरण कर लिया जाता है, जिससे वह शादी पर नहीं पहुंच पाती। परंतु आफताब का प्यार कम नहीं होता। रितेश रिमी की पुरानी ाE़जदगी के सच को कुरेदता है। जिसे देखते-देखते दर्शक रिमी से नफरत करने लगते हैं। कहानीकार अब्बास टायरवाला ने कुशलता से शराब की आदत से छूटकारा पाने के प्रयत्न में लगे समूहों, सपोर्ट ग्रूप के कार्य को कहानी में पिरोया है। हर शहर में ऐसे ग्रुप्स होते हैं जिनकी सहायता ली जा सकती है।

कहानी नये पहलुओं को उजागर करती हुई आगे बढ़ती है। रिमी सेन स्वार्थी अवश्य है, पर बाद में दर्शकों को उससे सहानुभूति होती है। आफताब को भी उसका प्रेम मिल जाता है। लीक से हटकर अनुभूति देने वाली इस फिल्म की गति धीमी और दृश्य त्रुटिपूर्ण होने के बावजूद दर्शकों के निजी मूल्यों को इसकी कहानी बल प्रदान करती है। रितेश, आयषा एवं रिमी का अभिनय जानदार है। दो गीत लोकप्रिय बन चुके हैं, अन्य गीतों में `मैं बूंद हूं बारिश की' जैसी सुंदर पंक्तियाँ मन को खुश करती हैं। यह फिल्म और अच्छी बन सकती थी।