Mehabooba Mufti

अमरनाथ यात्रा श्राइन बोर्ड को जमीन अलाट करने के मुद्दे पर पीपुल्स डेमोकेटिक पार्टी अर्थात् पीडीपी ने कांग्रेस से समर्थन वापसी की घोषणा करते हुए अपने सभी मंत्रियों के इस्तीफे राज्यपाल एनएन वोहरा को सौंप दिए हैं। पीडीपी के समर्थन वापसी के फैसले के बाद कांग्रेस नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार अल्पमत में आ गई है।

आज पीडीपी की अध्यक्षा महबूबा मुफ्ती के निवास पर पीडीपी विधायकों की एक मैराथन मीटिंग के बाद यह फैसला लिया गया। पार्टी के सभी मंत्रियों ने अपने इस्तीफे राज्यपाल को भेज दिए हैं। इस घटनाक्रम के बाद महबूबा मुफ्ती ने पत्रकारों को बताया कि उन्होंने कथ बार आजाद सरकार को अमरनाथ श्राइन बोर्ड को जमीन देने को लेकर आगाह किया था लेकिन उनकी बात अनसूनी कर दी गथ। वे कहती थीं :'आखिर हम भी सरकार के हिस्सा थे और वे हमारी बात को कैसे अनसुना कर सकते थे।`

महबूबा ने कहा कि इसे लेकर विधानसभा में हमारे और कांग्रेस के विधायकों के बीच कथ बार तीखी बहस हुथ तब मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद भी उपस्थित थे लेकिन उन्होंने इसे गंभीरता से नहप लिया। उन्होंने कहा कि ऐसे में जब घाटी मे हर रोज 2-3 लोग मारे जा रहे हों वह सरकार के साथ नहीं रह सकतीं। पीडीपी द्वारा कांग्रेस से समर्थन वापसी के बाद 87 विधानसभा सीटों वाली राज्य विधानसभा में पीडीपी के 18 विधायक हैं और कांग्रेस के पास सिर्प 21 विधायक हैं। अभी तक वह पीडीपी तथा निर्दलीय विधायकों के संगठन पीडीएफ के समर्थन पर चल रही थी।

मालूम हो कि अमरनाथ श्राइन बोर्ड को जमीन दिए जाने के विवाद पर सत्ताधारी कांग्रेस राज्य में अकेले पड़ गई थी क्योंकि नेशनल कांपेंस, पीडीपी समेत अगर कश्मीर केंद्रित सभी पार्टियां सरकार के विरोध में उतर चुकी थीं तो अलगाववादी नेता भी जनांदोलन की बागडोर थामे हुए थे।

सरकार की सहयोगी पार्टी पीडीपी ने पहले ही धमकी दी थी कि अगर जल्द ही इस मुद्दे को नहप सुलझाया गया तो वो सरकार से समर्थन वापस ले लेगी। इससे पहले राज्य सरकार ने गठबंधन के दटक दल पीडीपी को मनाने के लिए अमरनाथ श्राइन बोर्ड के सीथओ को हटाने का फैसला किया लेकिन पीडीपी पर राज्य सरकार के इस कदम का कोथ असर नहप पड़ा। अमरनाथ श्राइन बोर्ड के सीईओ डा अरूण कुमार के बयान के बाद ही दाटी में बवाल शुरू हो गया था।