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श्राइन बोर्ड ने जमीन पर छोड़ा दावा यात्रा की जिम्मेदारी सरकार के हवाले
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By विनय वीर
प्रकाशित 06/30/2008
 
Jammu Kashmir Sign Board जैसा कि पहले ही आशंका जताई गई थी कि राज्यपाल एन.एन. वोहरा `दबाव की राजनीति' के चलते आबंटित की गई जमीन पर दावा छोड़ने की तैयारी में हैं, उन्होंने इससे एक कदम आगे बढ़ते हुए यात्रा की पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार के हवाले . .

श्राइन बोर्ड ने जमीन पर छोड़ा दावा यात
Jammu Kashmir Sign Board

जैसा कि पहले ही आशंका जताई गई थी कि राज्यपाल एन.एन. वोहरा `दबाव की राजनीति' के चलते आबंटित की गई जमीन पर दावा छोड़ने की तैयारी में हैं, उन्होंने इससे एक कदम आगे बढ़ते हुए यात्रा की पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार के हवाले कर कश्मीर में शांति लौटाने का प्रयास किया है। श्राइन बोर्ड द्वारा जमीन और यात्रा की जिम्मेदारी राज्य सरकार को सौंप दिए जाने के बाद मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद ने कहा कि सरकार अमरनाथ श्रद्धालुओं की हर जरूरत का पूरा ख्याल रखेगी।

इसके साथ ही अमरनाथ यात्रा जमीन मुद्दे का सरकारी तौर पर अंत हो गया है। इस आशय का पत्र राज्यपाल ने देर रात को मुख्यमंत्री को भेजा था। इस पत्र में राज्य सरकार से यह पूछा गया था कि क्या वह अमरनाथ यात्रा का जिम्मा संभालने की स्थिति में है, तो इसका आज सुबह जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने इस जिम्मेदारी को स्वीकार करते हुए कहा कि राज्य सरकार अमरनाथ यात्रा में शामिल होने वालों की सुरक्षा, खाने-पीने और रहने की व्यवस्थाएँ अब आप ही करेगी। याद रहे वर्ष 2002 से पहले तक अमरनाथ यात्रा का संचालन राज्य सरकार द्वारा ही किया जाता था। राज्य सरकार द्वारा अमरनाथ यात्रा की जिम्मेदारी संभाल लिए जाने के बाद जमीन का मसला भी खत्म समझा जा रहा है, क्योंकि अब वन विभाग को उसकी जमीन वापस मिलने की उम्मीद है, क्योंकि राजनीतिक पंडित कहते हैं कि जब यात्रा का जिम्मा राज्य सरकार का हो गया, तो जमीन भी राज्य सरकार की हो जाएगी। हालाँकि जमीन के मुद्दे पर आंदोलन छेड़ने वाले गुटों का कहना था कि जमीन की औपचारिक वापसी के लिए कानूनी कार्रवाई पूरी होनी बाकी है, जबकि सरकारी दस्तावेजों के मुताबिक, सरकार ने अभी तक श्राइन बोर्ड को यह जमीन ट्रांसफर ही नहीं की थी।

श्राइन बोर्ड द्वारा ऐसा कदम उठाने की शंका तीन दिन पहले उसी समय प्रकट की गई थी, जब एन.एन. वोहरा ने राज्यपाल पद संभाला था और मुख्यमंत्री ने उनसे मुलाकात कर ऐसा हल तलाशने का आग्रह किया था, जिससे सांप भी मर जाता और लाठी भी न टूटती। हुआ भी यही है। जमीन को वापस करने का सीधा आग्रह तो श्राइन बोर्ड ने नहीं किया, लेकिन उसने अमरनाथ यात्रा की सभी जिम्मेदारियाँ राज्य सरकार को सौंप कर जमीन भी उसे सौंप दी है।