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थोड़ा प्यार, थोड़ा मैजिक
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By विनय वीर
प्रकाशित 07/2/2008
 
Review of Hindi Movie Thoda Pyar Thoda Magic जितेन्द्र की हिन्दी फिल्म `परिचय' तथा ऐसी ही थीम पर आधारित अन्य अंग्रेजी फिल्मों को लेकर बनी कुणाल कोहली की फिल्म `थोड़ा प्यार, थोड़ा मैजिक' भारी प्रचार के साथ प्रदर्शित हुई है।

थोड़ा प्यार, थोड़ा मैजिक
Review of Hindi Movie Thoda Pyar Thoda Magic

कलाकार- सैफ अली, रानी मुखर्जी, अमीषा पटेल, ऋषि कपूर

संगीत - शंकर-एहसान-लॉय

निर्देशक - कुणाल कोहली

जितेन्द्र की हिन्दी फिल्म `परिचय' तथा ऐसी ही थीम पर आधारित अन्य अंग्रेजी फिल्मों को लेकर बनी कुणाल कोहली की फिल्म `थोड़ा प्यार, थोड़ा मैजिक' भारी प्रचार के साथ प्रदर्शित हुई है। दर्शकों को विज्ञापनों के प्रभाव से हटकर इस फिल्म को देखना-परखना चाहिए। वैसे, बच्चों को लेकर बनी साफ-सुथरी मनोरंजक फिल्म परिवार के साथ देख सकते हैं, किन्तु इसे बच्चों की फिल्म कतई नहीं कहा जा सकता है। फिल्म की शुरूआत ही आपत्तिजनक लग सकती है। अमीर उद्योगपति सैफ अली की गाड़ी से एक दम्पत्ति की मृत्यु हो जाती है।

उनके चार बच्चे अनाथ हो जाते हैं। ऐसे दृश्य बच्चों की फिल्मों से दूर रखे जाते हैं। फिर आता है, अदालत का विचित्र फैसला। सैफ को उन चारों बच्चों की परवरिश की जिम्मेदारी दी जाती है। ऐसे ही हालात में राजेश खन्ना को `दुश्मन' में मीना कुमारी की परवरिश की सजा दी गयी थी। किन्तु इस फिल्म में माता-पिता की हत्या करने वाले व्यक्ति को ही उनके बच्चों की जिम्मेदरी का काम सौंपने वाली बात कुछ हजम नहीं होती है।

बच्चे सैफ अली को तंग करने लगते हैं। उनके तंग करने के तरीके कोई खास दिलचस्पी नहीं बना पाते हैं। एक ही परिवार के बच्चे वाहे गुरु, गॉड और भगवान से मदद मांगते हैं तो दर्शकों को अल्लाह की याद आ जाती है। आसमान से परी रानी मुखर्जी गुलाबी साइकल चलाती हुई नीचे आती है और उन बच्चों की मदद करने सैफ के यहाँ दाया का काम करने लगती है। इस दृश्य से फिल्म में कुछ रौनक आ जाती है। वह सैफ के साथ बच्चों के संबंध सुधारने लगती है।

पर जाने क्यों परी रानी सैफ की प्रेमिका अमीषा पटेल से उसके संबंध नहीं सुधारती है, बल्कि खुद ही सैफ से प्रेम करने लगती है। दर्शकों के मनोरंजन के लिए शायद इतना कुछ काफी नहीं होगा और टिकट-खिड़की पर पैसे जमा नहीं होंगे, इस इरादे से कहानीकार कुणाल ने रानी एवं बच्चों को दांडी मार्च और विश्व महायुद्ध की यात्रा करवा दी। यह सब कहां तक ठीक लगता है, यह तो दर्शकों पर निर्भर करता है।

फिल्म में अंग्रेजी दाया की पोशाक में रानी ने जान डाली है। बच्चे भी ठीक लगे हैं। प्रसून के लिखे `प्यार के लिए' गीत की पंक्तियां याद रह जाती हैं तथा `बुलबुला' और `िनहाल हो गई' गीत अच्छे जमे हैं। फिल्म में कम्प्यूटर ग्राफिक्स का भी उपयोग दिलचस्प तरीके से किया गया है। किन्तु फिल्म की कथा व पटकथा कुछ खास होती तो अच्छा रहता।