कश्मीर में शांति लौट आई है। पर जम्मू अभी भी जल रहा है। अमरनाथ जमीन मुद्दे पर हो रही हिंसा ने आज अन्य इलाकों को चपेट में ले लिया। हिंसा, प्रदर्शनों और पुलिस फायरिंग के बाद जम्मू संभाग के कई अन्य कस्बों में कर्फ्यू लगा दिया गया है।
कश्मीर में शांति लौट आई है। पर जम्मू अभी भी जल रहा है। अमरनाथ जमीन मुद्दे पर हो रही हिंसा ने आज अन्य इलाकों को चपेट में ले लिया। हिंसा, प्रदर्शनों और पुलिस फायरिंग के बाद जम्मू संभाग के कई अन्य कस्बों में कर्फ्यू लगा दिया गया है। कई जगह हालात पर काबू पाने के लिए नागरिक प्रशासन सेना की मदद ले रहा है। प्रदर्शनकारियों के पथराव से अगर 25 पुलिसकर्मी आज जख्मी हुए तो पुलिस की कार्रवाई में आज भी डेढ़ सौ से अधिक प्रदर्शनकारी जख्मी हुए हैं। भद्रवाह में आतंकियों द्वारा प्रदर्शनकारियों पर हथगोले से हमले के बाद हुई सांप्रदायिक झड़पों के बाद सेना को बुलाया गया है और कर्फ्यू लगाया गया है।
जम्मू में आज तीसरे दिन भी हिंसा नहीं थमी है। हालात के बिगड़ने के बाद कल पुराने शहर में कर्फ्यू लगाया गया था। आज जम्मू के नए व पुराने शहरों के अतिरिक्त नगरोटा, सांबा तथा भद्रवाह कस्बे में भी कर्फ्यू लगा दिया गया। सांबा में हिंसक घटनाओं के कारण बिगड़ती स्थिति को थामने के लिए नागरिक प्रशासन ने सेना को तलब किया है।
डोडा जिले के भद्रवाह कस्बे में स्थिति उस समय सांप्रदायिक हो गई, जब भाजपा व संघ के प्रदर्शनकारियों पर आतंकियों ने हथगोले से हमला किया तो 3 केरिपुब जवानों समेत 15 प्रदर्शनकारी जख्मी हो गए। इसके बाद सांप्रदायिक हिंसा के बाद प्रशासन ने कर्फ्यू लगा दिया। हालात पर काबू पाने के लिए अर्द्ध सैनिक बलों को तैनात किया गया है।
राजौरी, पुंछ, बनिहाल, उधमपुर, कटड़ा, रामबन आदि कस्बों से भी हिंसा होने की खबरें मिली हैं। जहाँ उधमपुर में कश्मीर जाने वाले वाहनों पर हमले किए गए वहीं बनिहाल में अमरनाथ यात्रियों पर एक समुदाय विशेष के लोगों द्वारा हमले किए गए। कई अमरनाथ यात्री गंभीर रूप से जख्मी हुए हैं।
हालाँकि राज्य सरकार द्वारा अमरनाथ श्राइन बोर्ड के लिए जमीन देने के आदेश को रद्द करने के बाद कश्मीर घाटी में प्रदर्शनों के रुकने के साथ ही श्रीनगर और कश्मीर घाटी के अन्य स्थानों में आज आम जन-जीवन सामान्य हो गया है। दस दिनों की हिंसा के बाद दुकानों पर लोगों का जमावड़ा लग गया और व्यापारिक प्रतिष्ठानों में काम शुरू हो गया। मुख्य शहरों में शैक्षणिक संस्थान भी फिर से खुल गए हैं।
हुर्रियत कॉफ्रेंस के दोनों धड़ों द्वारा आंदोलन वापस लेने के बाद ऐसा हुआ है। सरकार द्वारा मंगलवार को भूमि आदेश को रद्द करने के बाद उसने लोगों को फिर से अपने कामकाज पर लौटने को कहा। सरकारी कार्यालयों और बैंकों में कामकाज शुरू होने के साथ ही आंदोलन के दौरान ठप पड़े वाहनों की आवाजाही बहाल हो गयी है। घाटी में पिछले 10 दिनों में पुलिस गोलीबारी, प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़पों में सात लोग मारे गए और 100 पुलिसकर्मियों सहित 550 से अधिक लोग घायल हुए।