Truck Strike

ट्रक परिचालनकर्ताओं ने देशव्यापी हड़ताल के तहत आवश्यक चीजों एवं ईंधन को छोड़कर सामान की ढुलाई का काम बंद कर दिया है। ट्रक परिचालनकर्ताओं ने टोल कर एवं डीजल में उच्च शुल्क लगाने समेत अन्य मुद्दों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की है।

हड़ताल समाप्त करने के लिये आज सुबह केंद्रीय राजमार्ग एवं सड़क परिवहन मंत्री टी.आर. बालू और अखिल भारतीय मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के प्रतिनिधियों के बीच हुई बातचीत विफल हो गई। बालू ने स्पष्ट तौर पर कहा कि टोल कर में हुई बढ़ोत्तरी को वापस लेना संभव नहीं है।

बालू ने अखिल भारतीय मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के प्रतिनिधियों को आज बताया, `हाँ फरवरी में टोल कर में की गई बढ़ोत्तरी काफी अधिक थी, लेकिन यह संसद में पारित कानून के जरिये की गई है- बढ़े हुए कर को वापस लेना संभव नहीं है।' एआईएमटीसी के अध्यक्ष चरण सिंह लोहारा ने बालू के साथ हुई बै"क के बाद संवाददाताओं को बताया, `हम अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी रखेंगे।'

बालू ने हालाँकि यह जरूर कहा कि उन्होंने ट्रक परिचालनकर्ताओं की माँगों को लेकर पेट्रोलियम मंत्रालय से बातचीत की है। उधर, ट्रकों की राज्य व्यापी हड़ताल से आंध्र-प्रदेश बुरी तरह प्रभावित रहा।

इस हड़ताल के कारण राजधानी हैदराबाद के वनस्थलीपुरम क्षेत्र स्थित पार्किंग स्थल से हज़ारों ट्रक नहीं निकले। इसके अलावा विशाखापट्टनम, विजयवाड़ा, वरंगल, राजमंड्री, तिरुपति तथा कर्नूल में भी चलते ट्रक रोक दिए गए। प्रदेश से गुज़र रहे दूसरे राज्यों को जाने वाले ट्रक भी राजमार्गों के बगल में रोक दिए गए हैं।

अखिल भारतीय ट्रांसपोर्ट असोसिएशन के आह्वान पर मंगलवार की आधी रात से शुरू हुई इस हड़ताल के कारण अत्यावश्यक वस्तुओं को छोड़कर सभी चीजों का परिवहन रोक दिया गया है। पेट्रोल तथा डीज़ल का परिवहन भी रोक दिया गया है। इससे वाहन मालिक इस बात को लेकर परेशान हैं कि यदि हड़ताल जारी रही, तो उन्हें ईधन की किल्लत का सामना करना पड़ सकता है। विजयवाड़ा के बेंज सर्पल में ट्रक मालिकों ने धरना दिया, लेकिन पुलिस ने इन्हें गिरफ्तार कर लिया।

इस बीच, परिवहन-मंत्री कन्ना लक्ष्मीनारायण ने कहा कि जरूरी चीजों के परिवहन की वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है। इस संबंध में रेलवे से भी सहयोग की अपील की गई है। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि ट्रक मालिकों की माँग राज्य सरकार के क्षेत्राधिकार में नहीं आती। उन्होंने कहा कि उनकी माँगों का हल केवल केन्द्र सरकार ही निकाल सकती है। राज्य केवल वैकल्पिक व्यवस्था कर सकते हैं।