सुख-दु:ख, दिल का टूटना, हँसी के ठहाके, गाने और मारपीट युक्त इस फिल्म के नायक हैं, जयसिंह राठौर (इमरान खान) और नायिका अदिति महंत (जेनेलिया)। जय अदिति को मियाऊँ कहकर पुकारता है
सुख-दु:ख, दिल का टूटना, हँसी के ठहाके, गाने और मारपीट युक्त इस फिल्म के नायक हैं, जयसिंह राठौर (इमरान खान) और नायिका अदिति महंत (जेनेलिया)। जय अदिति को मियाऊँ कहकर पुकारता है, जबकि अदिति की नजर में वह चूहे की तरह डरपोक है। अदिति को इस नाम से केवल जय ही पुकार सकता है, अन्यथा पुकारने वाले की शामत तय है।
इन दोनों को देखकर ऐसा लगता है कि दोनों की जोड़ी बनाने में भगवान का जरूर कुछ खास मकसद होगा। दोनों के स्वभाव एकदम विपरीत हैं। जय एक अहिंसात्मक राजपूत है। इसके विपरीत अदिति बहुत ही अधीर और उग्र स्वभाव की है। उससे पंगा लेने पर वह गालियों की बौछार करते हुए सामने वाले को नोंच डालती है और यह कार्यक्रम तब तक जारी रहता है, जब तक जय नहीं आ जाता। एकमात्र जय ही इस जंगली बिल्ली को काबू में ला सकता है।
अदिति के इस व्यवहार के लिये जय उसके माता-पिता को दोषी मानता है। यदि बचपन से ही वे उस पर ध्यान देते तो नौबत यहाँ तक नहीं पहुँचती। जय के अहिंसक व्यवहार से अदिति बिलकुल भी प्रभावित नहीं है। उसके अनुसार वह अब तक जितने भी लोगों से मिली है उनमें जय सबसे बड़ा डरपोक है।
दोनों में भले ही ढेर सारे अंतर हों, लेकिन उनकी जोड़ी `मेड फॉर इच अदर' लगती है। यह बात बाकी सब जानते हैं, लेकिन क्या यह बात जय और अदिति जानते हैं? क्या दो लोग अपने दिल का राज जान सकते हैं? वे कैसे ये जानेंगे कि दिल की बात सच है? उन्हें कैसे पता चलेगा कि ये प्यार है? म्यूजिकल-रोमांटिक-कॉमेडी से भरी `जाने तू... या जाने ना' में इन मौज-मस्ती से भरे प्रसंगों को दिखाया गया है।
इनके अतिरिक्त फिल्म में कुछ अन्य पात्र भी हैं-रोतलू मन ही मन अदिति के लिए रोता है। बॉम्बस् का दिल जय के लिए धड़कता है, तो जिग्गी और शालीन के भी अपने किस्से हैं।