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रियालिटी शो का जानलेवा दबदबा
रियलिटी शो में होने वाली डाँट-डपट के कारण शिंजिनी सेनगुप्ता लकवाग्रस्त हो गईं और अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है। इस घटना से रियलिटी शोज का यह भयानक रूप सामने आया, जिससे पता लगता है कि इनमें भाग लेने वाले प्रतियोगी कितने सहमे हुए रहते हैं क्यूंकि जीत के सिवाय उन्हें कुछ दिखाई नहीं देता। देखा जाये तो रियलिटी शोज सफल और लोकप्रिय होने के शॉर्टकट हैं। यही कारण है कि ये दिन-प्रतिदिन लोकप्रिय होते जा रहे हैं। टीवी पर आकर प्रस्तुति देने की वजह से प्रतियोगियों के बारे में लोग जानने लगते हैं। ये मंच उन लोगों को अवसर देते हैं, जो प्रतिभाशाली होने के बावजूद सही लोगों तक नहीं पहुँच पाते। लेकिन विजेता के चयन की प्रणाली सही नहीं होने की वजह से कई बार गड़बड़ हो जाती है। चुनाव के लिये एसएमएस प्रणाली के चलते कई बार कम प्रतिभाशाली प्रतियोगी विजेता बन जाता है। ऐसे में जीत के सही हकदार को घोर निराशा होती है। इसके अतिरिक्त प्रस्तुति देने के बाद एक सप्ताह तक परिणाम का इंतजार करना भी प्रतियोगी के लिये जानलेवा साबित होता है। देखा जाये तो इन शो में जजों को भूमिका क्या होती है? जब परिणाम में इनका योगदान होता ही नहीं तो फिर इनकी आवश्यकता क्या रह जाती है? हो सकता है कि जज उन लोगों को राह दिखाते हैं जो संगीत या अभिनय की बारिकियाँ ठीक से समझ नहीं पाते, साथ ही वे प्रतियोगी की त्रुटियों की ओर उनका ध्यान आकर्षित करते हैं ताकि वे बेहतर परफॉर्मेंस दे सकें। यदि ऐसा है तो ये सुधारक या शिक्षक आदि कुछ भी हो सकते हैं, परंतु जज नहीं। शिंजिनी की हालत बताती है कि इन शोज में प्रतियोगी कितने घबराए या सहमे हुए होते हैं कि कमजोर दिल वालों का हाल शिंजिनी जैसा हो जाता है। टीवी के जरिए पूरी दुनिया उन्हें देखती है, तब भी जब जज उन्हें सरेआम डाँटते हैं। ऐसे में जजों को अपनी बात प्यार से समझानी चाहिए। इस बारे में माता-पिता की भूमिका को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। जीतने का दबाव वे अपने बच्चों पर इस तरह डालते हैं कि मानो यह जीवन-मरण का प्रश्न हो। सभी को पहले नंबर पर पैसा और ग्लैमर दिखाई देता है, किंतु जीतता तो कोई एक ही है। बाकी प्रतियोगियों के हिस्से में तो निराशा और हताशा ही आती है। अत: प्रतियोगिता दबाव मुक्त और खुशहाल वातावरण में करवाई जाए तो प्रतियोगी ज्यादा बेहतर प्रदर्शन कर पाएँगे। शायद इस घटना से अन्य रियाल्टी शोज के जज और प्रतियोगियों के माता-पिता सबक ले पाएं। बुकमार्क किजिए
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