Mulayam Singh and Chandra Babu Naidu

सपा को अपनी ओर लाने के कांग्रेस के जोरदार प्रयासों के बीच लगता है कि यूएनपीए ने आज अपनी एकजुटता का इजहार करते हुए सपा को परमाणु करार के बारे में अपने पत्ते अभी नहीं खोलने पर राजी कर लिया है। समाजवादी पार्टी के नेता अमर सिंह के निवास पर करीब चार घंटे चली बै"क के बाद यूएनपीए नेताओं ने कहा कि उनका ग"बंधन पूरी तरह एकजुट है और वह भारत -अमेरिकी परमाणु करार पर राष्ट्रीय बहस चाहता है, क्योंकि कई ऐसे पहलू हैं, जिस पर स्पष्टीकरण की जरूरत है।

हालाँकि यूएनपीए के सबसे बड़े घटक समाजवादी पार्टी ने यह कहते हुए कांग्रेस के प्रति अपने झुकाव का संकेत दिया कि सांप्रदायिकता परमाणु करार से ज्यादा बड़ा खतरा है।  सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव, तेलुगु देशम के नेता चन्द्रबाबू नायुडू, इंडियन नेशनल लोकदल के ओम प्रकाश चौटाला, असम गण परिषद के प्रमुख वृंदाबन गोस्वामी और झारखंड विकास मंच के बाबूलाल मरांडी की मौजूदगी में सपा महासचिव अमर सिंह ने कहा, `मैंने कल भी यह बात कही थी और मैं आज पुन: यह दुहराता हूँ कि सांप्रदायिकता परमाणु करार से ज्यादा बड़ा खतरा है।'

यूएनपीए नेताओं ने कहा कि परमाणु करार पर प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी स्पष्टीकरण से वे संतुष्ट नहीं हैं और इस बारे में अंतिम फैसला करने से पहले वैज्ञानिकों की राय लेंगे। चौटाला ने कहा, `परमाणु मुद्दे पर यूएनपीए जहाँ से चला था, वहीं आज भी खड़ा है। परमाणु करार पर राष्ट्रीय स्तर पर बहस होनी चाहिए। इस करार को लेकर आम आदमियों के बीच कुछ शंकाएँ हैं । जब तक इन शंकाओं को दूर नहीं किया जाएगा, राष्ट्रीय बहस नहीं करायी जाएगी, हम इसका समर्थन नहीं करेंगे।' उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि प्रधानमंत्री के जी-आ" की बै"क में हिस्सा लेने के लिए सात जुलाई को जापान जाने के पहले यूएनपीए डील के लिए कोई सर्टिफिकेट नहीं देगा।

राष्ट्रीय बहस के बारे में संवाददाताओं द्वारा बार-बार पूछे जाने पर चौटाला ने कहा कि यह अकेले  सिर्फ सरकार और संसद का मुद्दा नहीं है, यह एक राष्ट्रीय मुद्दा है और इस पर राष्ट्रीय बहस होनी चाहिए। संप्रग सरकार को समर्थन देने के बारे में पूछे गये एक सवाल के जवाब में सपा नेता अमर सिंह ने कहा, `यह प्रश्न क्यों उ"ा रहे हैं, अभी तो वामदलों का संप्रग सरकार से तलाक नहीं हुआ है।' उन्होंने कहा कि यूएनपीए परमाणु करार के मुद्दे पर ऐसे विख्यात वैज्ञानिक की राय लेगा और इस सिलसिले में यूएनपीए नेता पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम से कल रात मुकालात और करार पर उनकी राय लेंगे। जिसकी देश में साख हो और जिसके विचार पूरे देश को स्वीकार्य हो। यह वैज्ञानिक कौन होगा, यह उनके नेता मुलायम सिंह यादव तय करेंगे।

यह पूछे जाने पर कि क्या वे पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम से राय लेंगे, यूएनपीए के एक नेता ने कहा कि वे एक महान वैज्ञानिक हैं । एक सवाल के जवाब में अमर सिंह ने कहा कि उनकी पार्टी ने सरकार को समर्थन देने के एवज में वित्त मंत्री पी. चिदम्बरम और पेट्रोलियम-मंत्री मुरली देवड़ा के इस्तीफे की माँग नहीं नहीं की है, लेकिन साथ ही जोड़ा कि यह संप्रग सरकार को सोचना है कि वह आवश्यक वस्तुओं और पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में वृद्धि के लिए जिम्मेदार मंत्री को बनाये रखना चाहते हैं या हटाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि महँगाई और किसानों की आत्महत्या के मुद्दे पर संप्रग सरकार से विरोध रहा है और यह विरोध यथावत जारी है और संघर्ष आगे भी करते रहेंगे।

चौटाला ने कहा, `हम यह साफ कर देना चाहते हैं कि यूएनपीए चट्टान की तरह मजबूत है। कोई भी किसी दूसरे दल में शामिल नहीं होने जा रहा है। अगली सरकार यूएनपीए की बनेगी।'  नेशनल कांफ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला की अनुपस्थिति के बारे में चौटाला ने कहा कि जम्मू-कश्मीर बंद के कारण वह नहीं आ सके। उनकी अनुपस्थिति का यह कतई मतलब नहीं है कि वे हमसे सहमत नहीं है। वे पूरी तरह सहमत हैं। उन्होंने कहा कि परमाणु करार कोई सरकार का या कैबिनेट का मुद्दा नहीं है यह एक राष्ट्रीय मुद्दा है और सरकार इस डील को स्पष्ट करे। इस पर राष्ट्रीय बहस हो। हम इस पर विशेषज्ञों की राय लेंगे। कलाम से भी राय लेंगे।

मुलायम सिंह ने संवाददाताओं के सवालों के जवाब में कहा, `हम राष्ट्रीय हितों के खिलाफ कोई कदम नहीं उ"ाएँगे। कोई ऐसा काम नहीं करेंगे, जिससे सांप्रदायिक शक्तियों को फायदा मिले।'