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मनमोहन 9 को बुश से मिलेंगे
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By विनय वीर
प्रकाशित 07/5/2008
 
Manmohan Singh got time till 7th परमाणु मुद्दे पर सरकार से समर्थन वापस लेने के कगार पर पहुँचे वाम दलों ने आज उससे तीन दिन के भीतर इस बात का सीधा जवाब देने को कहा कि क्या वह इस करार के क्रियान्वयन की दिशा में आगे बढ़ रही है।

वाम ने दी 7 तक मोहलत
Manmohan Singh got time till 7th

परमाणु मुद्दे पर सरकार से समर्थन वापस लेने के कगार पर पहुँचे वाम दलों ने आज उससे तीन दिन के भीतर इस बात का सीधा जवाब देने को कहा कि क्या वह इस करार के क्रियान्वयन की दिशा में आगे बढ़ रही है। परमाणु करार पर सरकार के मुख्य वार्ताकार और विदेश-मंत्री प्रणव मुखर्जी को लिखे पत्र में वाम दलों ने उनसे पूछा `हम आपसे इस बात का निश्चित जवाब चाहते हैं कि क्या सरकार आईएईए के बोर्ड आफ गवर्नर्स से सुरक्षा समझौते को मंजूरी दिलाने की ओर बढ़ रही है।'

वाम दलों की बैठक के बाद माकपा महासचिव प्रकाश करात ने संवाददाताओं को बताया कि पत्र में कहा गया `कृपया आप इस बारे में अपनी स्थिति 7 जुलाई तक हमें स्पष्ट करें।' यह पूछे जाने पर कि सरकार ने अगर `हाँ' कहा तो वाम दल क्या करेंगे उन्होंने कहा `वाम दल 8 जुलाई को सरकार के जवाब पर विचार करेंगे।' पत्र में कहा गया `कुछ केन्द्राrय मंत्रियों और सत्तारूढ़ गठबंधन के नेताओं द्वारा परमाणु करार पर आगे बढ़ने के बारे में काफी कुछ कहा जा रहा है।' करात ने कहा कि ऐसे में सरकार द्वारा परमाणु करार पर अपनी स्थिति स्पष्ट करना जरूरी हो गया है। बैठक में जहाँ सरकार को तीन दिन का अल्टीमेटम दिया गया वहीं ऐलान किया गया कि भाजपा और उसके सहयोगियों द्वारा राजनीतिक लाभ और चुनावी समर्थन के लिए साम्प्रदायिक धुविकरण को बढ़ाने का वाम दल पर्दाफाश करके वे उसका विरेध करेंगे। करात ने कहा कि वाम दल सभी सेकुलर शक्तियों से अपील करते हैं कि वे इस प्रयास में उसका साथ दें। करात ने कहा `वाम दलों ने भारत-अमेरिका परमाणु करार पर अपने विरोध को जनता को समझाने के लिए 14 जुलाई से देशव्यापी अभियान शुरू करने का भी फैसला किया है। उन्हेंने कहा इस अभियान में मुद्रास्फीति और कमर तोड़ महँगाई को नियंत्रित करने में `सरकार की असफलता और उसकी अन्य जन विरोधी नीतियों के बारे में भी जनता को बताया जाएगा। बैठक के बाद संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में करात के साथ भाकपा महासचिव ए. बी. बर्धन, फॉरवर्ड ब्लॉक के महासचिव देबब्रत बिस्वास और आरएसपी के महासचिव टी. जे. चन्द्रचडन भी उपस्थित थे।

परमाणु करार पर मतभेद दूर करने के लिए गठित संप्रग-वाम समिति के बारे में पूछे जाने पर फॉरवर्ड ब्लॉक के महासचिव देबब्रत बिस्वास ने कहा `लगता है सरकार ने समझौते पर आगे बढ़ने का मन बना लिया है और ऐसे में समिति की अन्य बैठक की कोई जरूरत नहीं रह गई है।'

उल्लेखनीय है कि पिछली बैठक के बाद दोनों पक्षों ने घोषणा की थी कि `उचित समय पर' अगली बैठक बुलाई जाएगी। देबब्रत ने कहा कि समिति की अब तक हुई नौ बैठकों में हमने करार से संबंधित कई पहलुओं पर विचारों का आदान-प्रदान किया और इसे लेकर सभी राजनीतिक एवं तकनीकी चर्चाएँ पूरी हो चुकी थीं। उसमें यह निर्णय भी हुआ था कि अब तक की चर्चाओं के निष्कर्ष को अंतिम रूप देने के लिए एक और बैठक बुलाई जाएगी। लेकिन सरकार के वर्तमान रवैये को देखते हुए समिति की अगली बैठक करना बेमानी है। उन्होंने कहा कि इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए `हम आज की बैठक में इस नतीजे पर पहुँचे कि सरकार से अब यह साफ-साफ बताने को कहा जाए कि क्या वह आईएईए से सुरक्षा समझौते की मंजूरी लेने जा रही है।

समाजवादी पार्टी के बदले रुख के बारे में पूछे जाने पर वाम नेता ने कहा `जो वह कर रहे हैं उन्हें वह करने दीजिए। जनता जानती है कि वाम दलों ने सैद्धांतिक रुख अपनाया है और हम अभी भी उस पर एकमत हैं।' बिस्वास ने कहा कि संसद की कार्यवाही के रिकॉर्ड गवाह हैं कि परमाणु करार पर किस पार्टी ने क्या-क्या कहा। सदन की भावना इस करार के खिलाफ थी।