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करार का बहिष्कार ऐतिहासिक भूल
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By विनय वीर
प्रकाशित 07/6/2008
 
Anil Kakodkar परमाणु ऊर्जा आयोग के प्रमुख अनिल काकोड़कर ने भारत-अमेरिका परमाणु समझौते का एक बार फिर जोरदार समर्थन किया है और कहा है कि यदि करार नहीं हुआ तो इतिहास हमें कभी माफ नहीं करेगा। काकोड़कर का यह बयान कल . .

करार का बहिष्कार ऐतिहासिक भूल
Anil Kakodkar

परमाणु ऊर्जा आयोग के प्रमुख अनिल काकोड़कर ने भारत-अमेरिका परमाणु समझौते का एक बार फिर जोरदार समर्थन किया है और कहा है कि यदि करार नहीं हुआ तो इतिहास हमें कभी माफ नहीं करेगा। काकोड़कर का यह बयान कल वाम दलों द्वारा संप्रग सरकार को दी गई चेतावनी के बाद आया।

वाम दलों ने कल कहा था कि यदि सरकार परमाणु करार पर आगे बढ़ी तो वे संसद में संप्रग सरकार के खिलाफ मतदान करेंगे। परमाणु ऊर्जा आयोग प्रमुख अनिल काकोड़कर ने `विकासशील भारतीय परमाणु कार्यक्रम औचित्य और परिप्रेक्ष्य विषय' पर आयोजित कार्यक्रम में अपने जन संबोधन में कहा, `यह एक अवसर है जब हम अपने सिद्धांतों से समझौता किए बगैर भविष्य के लिए ऊर्जा सेतु की स्थापना कर सकते हैं।

इस कार्यक्रम का आयोजन भारतीय विज्ञान अकादमी द्वारा किया गया। करार का उल्लेख किए बिना, लेकिन इस बारे में पर्याप्त संकेत देते हुए काकोड़कर ने जो कहा, उसका सही मतलब यह है, `यदि हमने इसे अभी नहीं किया तो इतिहास हमें कभी माफ नहीं करेगा।' उन्होंने करार को भविष्य के ऊर्जा सेतु का अत्यधिक प्रभावी और व्यवहार्य रास्ता बताया। संवाददाताओं ने जब उनसे यह पूछा कि अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा मानक समझौते को लेकर अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) से संपर्क करने की समयसीमा क्या है और क्या करार को इस साल के अंत तक अमलीजामा पहनाया जा सकता है, काकोड़कर ने कहा, `जल्द, लेकिन आप जानते हैं कि सबकुछ मेरे हाथ में नहीं है।'

कार्यक्रम में मौजूद एक व्यक्ति द्वारा करार पर जारी राजनीतिक गहमागहमी के बारे में किए गए सवाल पर काकोड़कर ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, `यह राजनीति का हिस्सा है। मैं राजनीति में नहीं जाता।'

यह पूछे जाने पर कि करार पर जल्दबाजी क्यों की जा रही है, काकोड़कर ने कहा, `यदि इसे 2020 में किया गया तो इसमें 10 साल की देरी हो जाएगी।' उन्होंने जोर देकर कहा, `हमने उस ऊर्जा अंतराल को महसूस नहीं किया है जिसका हम सामना कर रहे हैं। हमें अपने विकल्पों को अवश्य विस्तारित करना चाहिए।'

काकोड़कर ने कहा कि परमाणु ऊर्जा विभाग यूरेनियम की खानें विकसित करने के लिए `साहसिक' प्रयास कर रहा है, लेकिन सार्वजनिक बहस और राज्य सरकारों की ओर से जरूरी हरी झंडी के कारण इसमें आठ या नौ साल का समय लग सकता है। उन्होंने कहा कि देश में यूरेनियम की कमी है और भारतीय परमाणु रिएक्टर सिर्फ 50 से 55 प्रतिशत की क्षमता वाले एक संयंत्र से संचालित हो रहे हैं। उन्होंने कहा, `मुझे इस बात का भरोसा है कि एक समय पर मैं यूरेनियम की कमी के अंतराल को भर दूँगा।'