PPD Gulam Hasan Meer Azad

सोमवार 7 जुलाई को विधानसभा में बहुमत साबित करने के जुगाड़ में जुटी प्रदेश कांग्रेस को आँकड़ों के इस खेल में पीडीपी खेमे पर ही भरोसा है। यही नहीं, पीडीपी की चिंता इसके प्रति संकेत कही जा सकती है कि आजाद को पीडीपी खेमे पर ही बहुमत साबित करने का भरोसा है।

पीडीपी के समर्थन वापसी के बाद कश्मीर में आंकड़ों का खेल शुरू हो गया है। एसोसिएटिड सदस्यों को मिला कर कांग्रेस के पास 38 विधायकों का समर्थन है। उसे कुल 44 विधायकों का समर्थन बहुमत साबित करने के लिए चाहिए। कांग्रेस के अपने 21 विधायक हैं और 15 इंडिपेंडेंट विधायकों का समर्थन वह अपनी जेब में समझती है। माकपा के दो विधायक भी कांग्रेस के साथ ही हैं।

पीडीपी के गुलाम हसन मीर आजाद को समर्थन देने का संकेत देते हैं तो बसपा के अकेले विधायक मंजीत सिंह की भी यही मंशा है। यह समर्थन जम्मू या कश्मीर के मुद्दे पर नहीं बल्कि पीडीपी से राजनीतिक रंजिश निकालने की खातिर घोषित किया जा रहा है।

पीडीपी के सरफराज खान भी पीडीपी से नाराज हैं जो आजाद के समर्थन में वोट देने की फिराक में हैं। वैसे छोपियां के गुलाम हसन खान को पार्टी ने सस्पेंड किया हुआ है। जबकि पंपोर के जहूर मीर पार्टी अध्यक्षा से खफा हैं। नतीजतन अगर इन खफा पीडीपी विधायकों का समर्थन कांग्रेस पा लेती है तो उसे सिर्प दो और विधायकों का समर्थन चाहिए होगा।

इतना जरूर है कि मुफ्ती मुहम्मद सईद के विदेश में होने के कारण पीडीपी का एक वोट कम हो गया है और आजाद द्वारा जम्मू के हितों की खातिर वोट देने के लिए लगाई गई गुहार के चलते जम्मू के कुछ नेकां विधायक भी सरकार को वोट देकर बचा सकते हैं। अगर वे ऐसा करेंगें तो यह उनकी फेस सेविंग की कवायद होगी।