भारत-अमेरिका परमाणु करार के मुद्दे पर सरकार का समर्थन करने के समाजवादी पार्टी के फैसले से खुद को अलग कर लेने के ओम प्रकाश चौटाला के नेतृत्व वाले इनेलो और असम गण परिषद के कदम से यूएनपीए आज विभाजन की ओर अग्रसर हो गया।
भारत-अमेरिका परमाणु करार के मुद्दे पर सरकार का समर्थन करने के समाजवादी पार्टी के फैसले से खुद को अलग कर लेने के ओम प्रकाश चौटाला के नेतृत्व वाले इनेलो और असम गण परिषद के कदम से यूएनपीए आज विभाजन की ओर अग्रसर हो गया।
चौटाला ने यहाँ संवाददाताओं से कहा `कांग्रेस पहले भी उनका (समाजवादी पार्टी का) एक बार अपमान कर चुकी है। अब लगातार तीसरी बार वे अपमानित होना चाहते हैं। यह उनकी अपनी सोच है।' परमाणु करार के मुद्दे पर वाम दलों की समर्थन वापसी की स्थिति में सरकार का साथ देने के लिए यूएनपीए की प्रमुख घटक समाजवादी पार्टी को कांग्रेस द्वारा अपने पक्ष में करने के एक दिन बाद चौटाला की यह टिप्पणी आयी है।
कांग्रेस के साथ जाने के समाजवादी पार्टी के फैसले से निराश अगप ने कहा कि यूएनपीए के सभी घटक दल साथ मिलकर यह तय करेंगे कि मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व वाली पार्टी को गठबंधन में रखना है या नहीं। एजीपी के अध्यक्ष वृंदावन गोस्वामी ने `प्रेस ट्रस्ट' को बताया, `सपा को परमाणु करार का समर्थन करने का फैसला करने से पहले यूएनपीए के घटक दलों से सलाह लेनी चाहिये थी। अब सभी साथ मिलकर निर्णय करेंगे कि सपा को यूएनपीए में रखना है या नहीं।'
चौटाला ने कहा कि इनेलो परमाणु करार का ढमजबूत विरोर्धीं है और वह `अमेरिका के गुलाम बन जाने के तथ्य' को लेकर चिंतित है। ओमप्रकाश चौटाला ने कहा, `जब संप्रग सत्ता में आयी थी तब इन लोगों (सपा) ने अपमान सहने के बावजूद उसका समर्थन किया था। तब वह उत्तर-प्रदेश में भी कांग्रेस के समर्थन से सरकार चला रहे थे। कांग्रेस ने पहले भी उनका अपमान किया और एक बार फिर वह ऐसा ही करेगी।'
उन्होंने दावा किया कि सपा के बाहर होने के बाद भी यूएनपीए स्थिर रहेगा। उन्होंने कहा, `यूएनपीए कमजोर नहीं हुआ है। हम पूरी तरह मजबूत हैं। सभी अन्य सहयोगियों ने आपस में बातचीत की है और सभी के विचार एक से हैं। हम परमाणु करार के खिलाफ हैं और कांग्रेस का विरोध करते हैं। समाजवादी पार्टी का परमाणु करार को समर्थन देने का फैसला पार्टी या देश के हित के लिए अच्छा नहीं है।' इस बात को अस्वीकार करते हुए कि उन्होंने ही मुलायम सिंह को गठबंधन से बाहर करने की माँग की थी चौटाला ने कहा `वह (मुलायम) अपनी मर्जी से अलग हुए हैं। कांग्रेस को समर्थन करने के उनके फैसले से मुझे गहरा झटका लगा है।'
उन्होंने कहा, `मुलायम अच्छे राजनेता हैं और वह जमीन से जुड़े हैं। यह नहीं पता कि किसने उन्हें यह गलती करने के लिए प्रेरित किया।' चौटाला ने समाजवादी पार्टी के `अचानक लिये गये इस फैसले' पर अपनी नाखुशी नहीं छुपाई। यूएनपीए ने गत तीन जुलाई को फैसला किया था कि अपनी स्थिति तय करने के लिए परमाणु करार पर विशेषज्ञों से सलाह लेगी।
उन्होंने कहा, `अगर सरकार विश्वास मत चाहेगी तो यूएनपीए उसके खिलाफ मतदान करेगा। इसी तरह अगर कोई दल अविश्वास प्रस्ताव लाता है, तो यूएनपीए उसका समर्थन करेगा।