प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने आज घोषणा की कि भारत बहुत जल्द विवादास्पद भारत -अमेरिका परमाणु करार पर सुरक्षा मानक समझौते के लिए अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) से संपर्क करेगा। उन्होंने कहा कि भारत के एक बार आईएईए में जाने . .
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने आज घोषणा की कि भारत बहुत जल्द विवादास्पद भारत -अमेरिका परमाणु करार पर सुरक्षा मानक समझौते के लिए अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) से संपर्क करेगा। उन्होंने कहा कि भारत के एक बार आईएईए में जाने के बाद प्रक्रिया काफी तेजी से आगे बढ़ेगी। जापान में जी-8 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए विशेष विमान से जा रहे प्रधानमंत्री सिंह की ओर से संवाददाताओं को यह वक्तव्य वियना से आई उस रिपोर्ट के संदर्भ में दिया गया है, जिसमें कहा गया है कि सुरक्षा मानक समझौते को मंजूरी देने के लिए आईएईए बोर्ड की बैठक 28 जुलाई को होगी। उन्होंने कहा कि भारत को आश्वासन दिया गया है कि एकबार आईएईए में उसके जाने के बाद प्रक्रिया काफी तेजी से आगे बढ़ेगी। राहत और आत्मविश्वास से लबरेज दिख रहे प्रधानमंत्री ने साफ किया कि अगर वाम दल समर्थन वापस लेते हैं, तो सरकार संसद का सामना करने से भयभीत नहीं है।
विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी पर निशाना साधते हुए सिंह ने कहा कि भाजपा नेता को इस मुद्दे पर कोई सलाह देने की जरूरत नहीं है। सिंह जी-8 शिखर सम्मेलन से इतर 9 जुलाई को अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुश से मिलेंगे। उन्होंने कहा कि वह अन्य विश्व नेताओं से भी बातचीत करेंगे और आईएईए तथा परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) में करार के लिए समर्थन मांगेंगे। सिंह अब भी वाम दलों से मेल-मिलाप के अंदाज में दिखे। उन्होंने कहा वे `देशभक्त' हैं और ऐसा तरीका निकालना पसंद करेंगे, जिससे उनकी चिंताओं का निवारण हो जाए और करार भी आगे बढ़ जाए।
गौरतलब है कि वाम दलों ने धमकी दी है कि अगर सरकार ने करार पर अगला कदम बढ़ाया, तो वे समर्थन वापस ले लेंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि करार राष्ट्र हित में है और सरकार `भारत की विदेश नीति' या इस के सामरिक कार्यक्रम से समझौता नहीं करेगी। सिंह ने कहा, `मैं उनसे (जॉर्ज डब्ल्यू. बुश से) कह रहा हूँ और मैंने उनसे सदैव कहा है कि मैं असैनिक परमाणु सहयोग समझौते के प्रति वचनबद्ध हूँ। करार को आगे बढ़ाने का सदैव मेरा प्रयास होगा। हमारी सरकार इसके लिए प्रतिबद्ध है।' उन्होंने कहा, `निश्चित तारीख के संबंध में मैं कुछ नहीं कहूँगा, क्योंकि मैं विदेश में हूँ, लेकिन हम बहुत जल्द फैसला करेंगे।' शुरुआत में वह इस बात को कहने के प्रति अनिच्छुक थे कि सरकार कब आईएईए से संपर्क करेगी, लेकिन विशेष रूपरेखा के बारे में दबाव डालने पर उन्होंने कहा, `मैं फिलहाल नहीं कह सकता, लेकिन जब हम इस तरह का फैसला करेंगे, तो आप सुनेंगे। इससे पहले प्रधानमंत्री उन सवालों का जवाब दे रहे थे, जिसमें उनसे पूछा गया था कि जापान में जब वह अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुश से मिलेंगे, तो उनसे क्या कहेंगे। साथ ही सरकार आईएईए से कब संपर्क करेगी।
करार के संबंध में समय बीतते जाने के बारे में अमेरिका से आ रहे बयानों पर सिंह ने कहा, `हमें आश्वस्त किया गया है कि एक बार हम आईएईए में जाने का फैसला करते हैं, तो उसके बाद प्रक्रिया काफी तेजी से आगे बढ़ेगी।' वाम दलों के समर्थन वापस लेने की स्थिति में सरकार विश्वास मत हासिल करे, इसके संबंध में आडवाणी के बयान के बारे में पूछे जाने पर प्रधानमंत्री ने पलटकर कहा, `हम जब वहाँ पहुँचेंगे, तब पुल पार करेंगे। हम संसद का सामना करने से भयभीत नहीं हैं। हम उन संसदीय मानदंडों का पालन करेंगे, जिनका भारत जैसे महान लोकतंत्र को पालन करना चाहिए। श्रीमान आडवाणी को हमें सलाह देने की जरूरत नहीं है।'
राजनयिकों ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) बोर्ड की बैठक 28 जुलाई को होगी। इसमें भारत के लिए परमाणु नियमों को मंजूरी दी जाएगी। बैठक महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसके बाद ही अमेरिका के साथ ऐतिहासिक परमाणु करार को प्रभावी बनाने की दिशा में भारत आगे की कार्रवाई कर सकता है।
बगैर सुरक्षा मानक समझौते के भारत परमाणु प्रौद्योगिकी का निर्यात करने वाले देशों से व्यापार हासिल करने की उम्मीद नहीं कर सकता। समझौते को आईएईए बोर्ड की मंजूरी मिलने के कुछ दिन के भीतर ही एनएसजी की बैठक होने की उम्मीद है। राजनयिकों ने बैठक की तारीख की घोषणा में नाम न जाहिर करने की माँग की, क्योंकि यह गोपनीय सूचना है। इसकी घोषणा न तो औपचारिक तौर पर भारत ने की है और न ही आईएईए ने की है।