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बिना डॉक्टर की राय न लें विटामिन
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By विनय वीर
प्रकाशित 07/8/2008
 
Do not take Vitamin Tablets without consulting doctor 26 वर्षीय आकाश चोपड़ा के चेहरे पर अचानक बहुत सारे मुहांसे निकल आये। डॉक्टर के पास जाने की बजाय, जैसा कि आमतौर पर अपने देश में होता है, आकाश ने स्वत ही अपना इलाज करना शुरू कर दिया। वे विटामिन-ई की गोलियाँ लेने लगे।

बिना डॉक्टर की राय न लें विटामिन
Do not take Vitamin Tablets without consulting doctor

26 वर्षीय आकाश चोपड़ा के चेहरे पर अचानक बहुत सारे मुहांसे निकल आये। डॉक्टर के पास जाने की बजाय, जैसा कि आमतौर पर अपने देश में होता है, आकाश ने स्वत ही अपना इलाज करना शुरू कर दिया। वे विटामिन-ई की गोलियाँ लेने लगे। 4 माह तक यह गोलियाँ नियमित खाने के बाद उनकी त्वचा तो बेहतर होने लगी लेकिन आँखों की बिनाई कमजोर होने का अहसास उन्हें होने लगा, साथ ही सिर में दर्द की भी शिकायत रहने लगी। वे डाक्टर के पास गये और उन्हें मालूम हुआ कि उन्होंने विटामिन-ई की खुराक जरूरत से ज्यादा ले ली है। गौरतलब है कि विटामिन-ई सप्ताह में 500 मिलीग्राम लेना चाहिए, जबकि वे रोज ही इतने मिग्रा की गोली खा रहे थे।

आकाश चोपड़ा के अनुभव से कुछेक बातें एकदम स्पष्ट हो जाती हैं। एक, हमें अपना इलाज स्वयं नहीं करना चाहिए और विटामिन्स भी डाक्टर की सलाह पर ही लेने चाहिए। दो, विटामिन से भी नुकसान होता है। तीन, अति हर चीज की बुरी होती है और यह बात विटामिन्स पर भी लागू होती है। ...और अंतिम यह कि विटामिन्स का भी साइड इफेक्ट होता है, इसलिए उन्हें सीमित मात्रा में डाक्टर की निगरानी में ही लेना चाहिए वरना जिगर खराब हो सकता है, जोड़ों में दर्द हो सकता है या जबरदस्त दस्तों की शिकायत हो सकती है।

विशेषज्ञों की राय है कि सिर्फ तीन स्थितियों में ही विटामिन सप्लीमेंट की मात्रा को बढ़ाना चाहिए-

  • अगर आपका हीमोग्लोबिन स्तर कम है और आप प्रेगनेंट हैं।
  • अगर आप गंभीर बीमारी से उठे हैं और आपके डाक्टर ने निश्चित अवधि के लिए विटामिन्स लेने के लिए कहा है।
  • अगर आप कुपोषित बच्चे हैं और आपको उचित पौष्टिक आहार नहीं मिलता। यह भी डाक्टर की निगरानी में ही किया जाना चाहिए।
  • बाकी लोगों को चाहिए कि वे संतुलित आहार लें।

विटामिन्स को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है-

1. फैट में घुलने वाले विटामिन्स- विटामिन ए,डी,ई और के। इन्हें फैट टिश्यूज़ हजम करते हैं और ये फैटी फूड्स और फिश लीवर आयल्स में पाये जाते हैं।

2. पानी में घुलने वाले विटामिन्स- विटामिन बी और सी। इन्हें शरीर स्टोर नहीं कर पाता और इसलिए इनकी रोज ही जरूरत पड़ती है। यह अनाज, पोल्ट्री और सिटरस फ्रूट्स में मुख्य रूप से पाये जाते हैं।

पानी में घुलने वाले विटामिन्स की मात्रा अगर शरीर में अधिक हो भी जाए तो उनसे कुछ खास नुकसान नहीं होता क्योंकि वे जिस्म से बाहर निकल जाते हैं। लेकिन अगर फैट में घुलने वाले विटामिन्स अधिक मात्रा में शरीर में पहुँच जाएँ तो उनसे बहुत से रोग हो सकते हैं, जैसे-

विटामिन-ए : सिरदर्द, चक्कर आना, जी मितलाना, उल्टी आना, थकन, जिगर को नुकसान पहुँचना, बालों का उड़ना और मासिक चक्र में अनियमितता।

विटामिन-डी : वजन कम होना, पीला पड़ना, कब्ज, बुखार, शरीर में जगह-जगह कैल्शियम का जमा होना (जिसे अक्सर कैंसर समझ लिया जाता है), बहरापन, मितली आना, गुर्दे में पथरी, हड्डियों का कमजोर होना, हाई ब्लडप्रेशर, हाई ब्लड कोलेस्ट्राल, दस्त और ज्यादा प्यास लगना।

विटामिन-ई : कमजोरी, थकन, हाई ब्लडप्रेशर आदि।

विटामिन-के : जिगर का बढ़ना।

पानी में घुलने वाले विटामिन्स की अधिकता भी साइड इफेक्ट्स पैदा कर सकती है। मसलन, विटामिन डी से सिरदर्द, क्रैंप्स, उल्टी हो सकती है और विटामिन सी से यूरिक एसिड का स्तर बढ़ना, गुर्दे व पेशाब की थैली में पथरी और यूरिनरी ट्रैक में जलन हो सकती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि विटामिन सप्लीमेंट्स लेने से कहीं बेहतर यह है कि प्राकृतिक तौर पर संतुलित आहार लिया जाए। एक रिपोर्ट के अनुसार एंटी ऑक्सीडेंट्स विटामिन लेने से असमय मृत्यु का खतरा 16 प्रतिशत बढ़ जाता है। विटामिन ई नियमित लेने से धूम्रपान करने वालों में फेफड़े के कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। भारतीय डॉक्टरों की राय है कि विटामिन सी की गोलियाँ खाना पूर्णत पश्चिमी संस्कृति है क्योंकि वहाँ आलू और ब्रेड पर लोग जिंदा रहते हैं। अपने देश में लोग सब चीजें खाते हैं, इसलिए अगर बहुत ही कुपोषण का मामला है तो ही विटामिन सप्लीमेंट लिये जाएँ, वह भी डॉक्टरों की निगरानी में, वरना संतुलित आहार, ढेर सारे फल और सब्जियों से ही काम चलाना चाहिए।