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थामा हाथ - करार पर एकजुट
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By विनय वीर
प्रकाशित 07/9/2008
 
Mulayam Singh Yadav and Amar Singh मनमोहन सिंह सरकार से वाम दलों की समर्थन वापसी की घोषणा के घंटे भर के भीतर ही समाजवादी पार्टी (सपा) ने संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार और परमाणु करार को समर्थन देने का आज औपचारिक रूप से ऐलान कर दिया।

थामा हाथ - करार पर एकजुट
Mulayam Singh Yadav and Amar Singh

मनमोहन सिंह सरकार से वाम दलों की समर्थन वापसी की घोषणा के घंटे भर के भीतर ही समाजवादी पार्टी (सपा) ने संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार और परमाणु करार को समर्थन देने का आज औपचारिक रूप से ऐलान कर दिया।

सपा संसदीय दल की बैठक के बाद पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने सरकार और करार को बचाने की घोषणा की करार का समर्थन करने पर पार्टी के कुछ सांसदों के रूठने की खबरों को निराधार बताते हुए श्री यादव ने अपने सांसदों की परेड भी मीडिया के सामने करायी। श्री यादव और सरकार के साथ हुए इस गठजोड़ के सूत्रधार सपा महासचिव अमर सिंह ने कहा कि संप्रग सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आने की स्थिति में सपा के सांसद पार्टी के व्हिप पर एकजुट होकर सरकार को समर्थन देंगे।

श्री यादव ने साफ कहा कि उनकी पार्टी का सरकार में शामिल होने का कोई सवाल ही नहीं है। साथ ही उन्होंने कहा कि वह लोकसभा अध्यक्ष पद से श्री सोमनाथ चटर्जी को हटाने की माँग नहीं कर रहे हैं। श्री यादव ने अपने सांसदों की ओर इशारा करते हुए कहा कि पूरी पार्टी करार के समर्थन में एकजुट है। उन्होंने विशेष रूप से अपने मुस्लिम सांसदों की ओर इशारा किया, जिनमें श्री सलीम शेरवानी और अबू असीम आजमी उनके पीछे ही खड़े हुए थे।

पार्टी संसदीय दल ने एक प्रस्ताव भी पारित किया और श्री यादव के नेतृत्व में पूरी आस्था प्रकट की। पार्टी सूत्रों के अनुसार आज की बैठक में पार्टी के सात सांसद मौजूद नहीं थे। इनमें से दो सांसद अतीक अहमद और मोहम्मद अफजल तो जेल में है, जबकि राज बब्बर और बेनी प्रसाद वर्मा पार्टी छोड़ कर जा चुके हैं। श्री मुनव्वर हुसैन और शाहिद सिद्दिकी भी बैठक में नहीं थे।

सपा संसदीय दल ने कहा, `इस देश की एकता, स्वतंत्रता और अखण्डता के लिए साम्प्रदायिक शक्तियाँ गंभीर चुनौती हैं। संसद के चुनाव ज्यों-ज्यों निकट आ रहे हैं, साम्प्रदायिक तत्व अपनी राष्ट्र तोड़ों गतिविधियों को तेज कर रहे हैं। उनके कुकृत्यों से जम्मू और इन्दौर में लगी भयानक आग इस बात की पुष्टि करती है कि यदि सभी धर्मनिरपेक्ष शक्तियाँ एकजुट होकर उनको समाप्त नहीं करतीं तो देश के टुकड़े-टुकड़े होने की आशंका सदैव बनी रहेगी।'

प्रस्ताव में कहा गया कि सपा के लिए राजनैतिक स्वार्थ पीछे और देशहित सर्वोपरि रहा है। इसलिए इस समय भी हम देश की धर्मनिरपेक्ष ताकतों को आश्वासन देना चाहते हैं कि धर्मनिरपेक्षता की रक्षा में हमारे दल को कितनी भी कुर्बानी देनी हो हम तैयार हैं और उन्हें आश्वस्त करना चाहते हैं कि भाजपा के नेतृत्व में लामबंद साम्प्रदायिक तत्वों के उन्मूलन में सपा उनका साथ देगी।' पार्टी ने कहा कि करार के संबंध में सपा को भारत के प्रतिष्ठिता वैज्ञानिकों, रक्षा विशेषज्ञों और राजनैतिक चिन्तकों ने इस बात का विश्वास दिलाया है कि भारत अमेरिकी परमाणु करार राष्ट्र के हितों के अनुकूल है। उनकी बात पर भरोसा करके सपा ने राष्ट्रहित में इस करार का समर्थन करने का निश्चय किया है।'