Markswadi Communist Party

वामपंथी पार्टियों ने परमाणु करार के मुद्दे पर परमाणु सुरक्षा उपायों को अंतिम मंजूरी के लिए अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के गवर्नर बोर्ड में जल्दी से जल्दी ले जाने की प्रधानमंत्री की घोषणा के बाद आज आखिरकार 50 महीने पुरानी कांग्रेस नीत संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार से समर्थन वापस लेने की औपचारिक घोषणा कर दी।

जापान जाते हुए विमान पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा कल की गयी घोषणा से उत्तेजित चारों वामपंथी पार्टियों ने आज सुबह मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के मुख्यालय में आनन-फानन में बुलाई गयी एक बैठक के बाद संवाददाताओं को बताया कि समर्थन वापस लेने के बारे में वे संप्रग वाम समिति के संयोजक एवं विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी को अभी कुछ देर पहले ही पत्र भेज चुके हैं और समर्थन वापसी का पत्र सौंपने के लिए उन्होंने कल सुबह राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल से कल दोपहर 12 बजे मुलाकात करेंगे। माकपा, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा), फॉरवर्ड ब्लॉक तथा रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी के शीर्ष नेताओं ने करीब एक घंटे की बैठक के बाद खचाखच भरे एक संवाददाता सम्मेलन में घोषणा की कि समर्थन वापसी का समय आ गया है, उन्होंने श्री मुखर्जी को अपने जवाबी पत्र में इसकी सूचना दे दी है और राष्ट्रपति को कल औपचारिक तौर पर समर्थन वापसी का पत्र सौंप दिया जाएगा। ज्ञातव्य है कि विकसित देशों के समूह जी-8 की शिखर बैठक में हिस्सा लेने के लिए जापान पहुँचे प्रधानमंत्री की कल ही अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश से परमाणु करार के अमल की दिशा में प्रगति को लेकर द्विपक्षीय बातचीत होनी है।

प्रेस कांपेंस को संबोधित करते हुए माकपा के महासचिव प्रकाश करात ने कहा कि यद्यपि करार पर अमल के बारे में 7 जुलाई तक ठोस फैसला बताने के वामदलों के अल्टीमेटम पर श्री प्रणव मुखर्जी ने कल हमें पत्र लिखकर 10 जुलाई को संप्रग वाम समिति की बैठक करने का प्रस्ताव किया था, लेकिन अव्वल तो सुरक्षा उपायों के मसौदे को समिति के समक्ष रखे बिना इस पर किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुँचा जा सकता और दूसरे, प्रधानमंत्री ने निष्कर्ष की प्रतीक्षा किये बिना गवर्नर बोर्ड में जाने की साफ घोषणा कर समिति की बैठक करने के श्री मुखर्जी के प्रस्ताव को निरर्थक बना दिया है। बैठक के बाद श्री मुखर्जी के नाम भेजे गए पत्र में चारों वाम दलों के महासचिवों ने उन्हें याद दिलाया है कि 16 नवंबर, 2007 को समिति की छठी बैठक में आईएईए से सुरक्षा उपायों पर बातचीत का फैसला किया गया था और बैठक के बाद जारी साझा विज्ञप्ति में कहा गया था कि सरकार बातचीत शुरू करेगी और समिति के निष्कर्षों को अंतिम रूप देने से पहले आईएईए से बातचीत के नतीजों को समिति के समक्ष विचारार्थ रखा जाएगा।' पत्र में कहा गया है कि सत्तारूढ़ संप्रग ने अपने वायदे से पीछे हटते हुए आज तक सुरक्षा उपायों के मसौदे का मूल पाठ समिति के समक्ष नहीं रखा है और यह मूल पाठ रखे बिना समिति इस पर किसी तरह के निष्कर्ष पर नहीं पहुँच सकती।

चारों महासचिवों ने पत्र में कहा कि ऐसी हालत में वैसे भी 10 जुलाई को समिति की एक और बैठक करने का कोई मतलब नहीं था और फिर प्रधानमंत्री ने विदेश जाते हुए जल्द ही आईएईए के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स में जाने के सरकार के फैसले की घोषणा कर दस तारीख को मीटिंग करने के अपने प्रस्ताव को निरर्थक बना दिया है। उन्होंने याद दिलाया कि वामपंथी पार्टियाँ पहले ही कह चुकी हैं कि अगर सरकार आईएईए के गवर्नर बोर्ड में जाती है तो वे समर्थन वापस ले लेंगे और `प्रधानमंत्री की घोषणा को देखते हुए अब वह समय आ गया है।' श्री करात ने भाकपा के महासचिव ए. बी. बर्धन, फॉरवर्ड ब्लॉक के महासचिव देवव्रत विश्वास तथा आरएसपी के महासचिव टी. जे. चंद्रचूडन की मौजूदगी में संवाददाताओं से कहा कि राष्ट्रपति से मुलाकात का समय मिलते ही समर्थन वापसी का पत्र उन्हें सौंप दिया जाएगा। करीब चार साल पहले संप्रग सरकार के गठन के वक्त चारों वामदलों ने उसे बाहर से समर्थन करने के बारे में राष्ट्रपति को अलग-अलग पत्र सौंपा था इसलिए माना जाता है कि कल भी समर्थन वापसी का पत्र वे साझा तौर पर नहीं देंगे।