वामपंथी दलों के सरकार से समर्थन वापस लेने के बाद कई निर्दलीय संसद सदस्यों और एक सांसद वाली पार्टियों ने भारत-अमेरिका परमाणु करार का समर्थन किया है और संभावना है कि ये लोकसभा में संभावित विश्वासमत पर संप्रग सरकार का समर्थन कर सकते हैं। ऐसे सांसद क्षेत्रीय स्तर पर भले ही कांग्रेस के काम-काज का विरोध करते रहे हों, लेकिन उनका मानना है कि परमाणु करार देश के हित में है। लद्दाख से निर्दलीय सांसद थुपस्तन छेवाँग ने लेह से फोन पर पीटीआई से कहा, `विश्वास मत पर मतदान की स्थिति में सरकार को समर्थन देने के बारे में हमने अभी कोई फैसला नहीं किया है।

मैं परमाणु करार का समर्थन करता हूँ, क्योंकि मेरा मानना है कि यह राष्ट्रीय हित में है, लेकिन सरकार का समर्थन करना भिन्न मुद्दा है।' छेवाँग ने कहा कि हालाँकि उन्होंने विगत में मनमोहन सिंह सरकार का समर्थन किया है, लेकिन जम्मू-कश्मीर के निवर्तमान मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद के `भेद-भावपूर्ण रवैये' को लेकर लद्दाख के लोग खुश नहीं हैं। उन्होंने कहा, `कोई फैसला करने से पहले मुझे अपने लोगों से सहमति लेनी होगी।' असम के बोडो प्रभाव वाले कोकराझार जिले से स्वतंत्र सांसद एस. के. विश्वमुतियारी ने कहा कि केंद्र सरकार से वामपंथी दलों का समर्थन वापस लेना दुर्भाग्यपूर्ण है और वह चाहते हैं कि संप्रग सरकार अपना कार्यकाल पूरा करे। उन्होंने कहा, `लेकिन शक्ति परीक्षण की स्थिति में सरकार का समर्थन करने के बारे में मैंने कोई फैसला नहीं किया है, क्योंकि अभी काफी समय है।' कोकराझार के सांसद ने कहा कि उन्होंने परमाणु करार का समर्थन किया है, लेकिन वह असम की कांग्रेसी सरकार के काम-काज से खुश नहीं है। मणिपुर के निर्दलीय सांसद मणि चरेनमाय ने कहा कि विश्वास मत की स्थिति में वह किसका समर्थन करेंगे, यह कहना अभी जल्दबाजी होगा। उन्होंने इंफाल से फोन पर पीटीआई से कहा, `मैं स्थिति पर नजर रख रहा हूँ, मैं समझता हूँ कि करार देश के हित में है, क्योंकि राष्ट्र को ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ रहा है।' उन्होंने कहा कि एक या दो मुद्दे के लिए सरकार को गिरा देना "ाrक नहीं है, क्योंकि सरकार के कई कार्यक्रमों का अभी पूर्ण कार्यान्वयन नहीं हुआ है।

मिजोरम से लोकसभा सदस्य वनललजावमा ने कहा कि वह अपनी पार्टी मिजो नेशनल फ्रंट के फैसले का पालन करेंगे। उन्होंने कहा कि पहले उनकी पार्टी राजग के साथ थी, लेकिन अभी वह केंद्र के किसी भी राजनीतिक ग"बंधन से संबद्ध नहीं है। वनललजावमा ने कहा, `व्यक्तिगत रूप से मैं समझता हूँ कि करार देश के लिए अच्छा है, क्योंकि इससे देश की ऊर्जा समस्या का हल संभव होगा, लेकिन मैं अपनी पार्टी के फैसले का पालन करूँगा।'