उत्सर्जन कोटा अनुचित - भारत
विकासशील देशों पर ग्रीनहाउस उत्सर्जन से संबंधित किसी भी किस्म के मात्रात्मक प्रतिबंध का विरोध करते हुए भारत ने आज औद्योगिक देशों से कहा कि जलवायु परिवर्तन का उपयोग शर्त या सुरक्षावाद पेश करने के लिए न करें। इससे पहले से ही जटिल हो चुकी विकास की चुनौतियों का मुकाबला करने की उनकी कोशिशों के रास्ते में रुकावट आएगी। प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के सम्मेलन `एमईएम' में जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि विकसित देशों ने ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी लाने के मामले में कोई प्रगति नहीं की है। उन्होंने जी-8 से कहा कि वह इस मामले में नेतृत्व करे। एमईएम में जी-8, पाँच विशेष आमंत्रित देश (ओ-5) और अन्य देश शामिल हैं। एमईएम को प्रमुख उत्सर्जक देशों की बैठक (मेजर इकनोमीज मीटिंग) भी कहा जाता है। सिंह ने एमईएम से कहा, `जितनी जल्दी उत्सर्जन को कम करते हैं हमें उसका अनुकरण करने के लिए अधिक प्रोत्साहन मिलेगा।' इस बैठक में अमेरिका के राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू . बुश, फ्रांस के राष्ट्रपति निकोलस सरकोजी, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री गार्डन ब्राऊन और जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल जैसे वैश्विक नेता मौजूद थे। सिंह ने कहा `जलवायु परिवर्तन सबके लिए भारी चुनौती है, लेकिन इसका उपयोग विकासशील देशों पर और शर्तें थोपने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।' प्रधानमंत्री ने यह साफ किया कि विकासशील देशों के लिए सतत और तेज आर्थिक विकास महत्वपूर्ण है, इसलिए वे फिलहाल उत्सर्जन पर मात्रात्मक प्रतिबंध पर विचार भी नहीं कर सकते हैं। जलवायु परिवर्तन के संबंध में विकसित देशों द्वारा विकासशील देशों को ज्यादा संसाधन और प्रौद्योगिकी देने का समर्थन करते हुए सिंह ने कहा कि गरीबी उन्मूलन विकासशील देशों के लिए पहली और अनिवार्य चुनौती है। |
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