Samajwadi Party - Amar Singh

संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार से समर्थन वापस लेकर वाम दलों की कारों का काफिला राष्ट्रपति भवन से रवाना ही हुआ था कि समाजवादी पार्टी (सपा) ने कुछ ही देर बाद अपने समर्थन का पत्र राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल को सौंप दिया।

सपा महासचिव अमर सिंह अपने सहयोगी नेता राम गोपाल यादव के साथ राष्ट्रपति से मिले और मनमोहन सिंह सरकार के प्रति अपना समर्थन दोहराया। पत्र सौंपने के बाद श्री सिंह ने संवाददाताओं से कहा कि सपा के चुनाव चिह्न पर जीते प्रत्येक सांसद का समर्थन अब संप्रग सरकार के साथ है। अलबत्ता एक सवाल के जवाब में उन्होंने माना कि पार्टी सांसद अतीक अहमद को उनकी पार्टी निलंबित कर चुकी है, जो इस समय जेल में हैं। श्री अमर सिंह ने परमाणु करार का समर्थन करने पर भारतीय जनता पार्टी के (गुप्त समझौते के) आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि वाम दलों को समझ लेना चाहिए कि अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश से भी बड़ा खतरा `आडवाणी-मोदी-मायावती' की तिकड़ी है और सांप्रदायिक ताकतों को पनपने का मौका नहीं देने के लिए ही सपा ने सरकार के समर्थन का निर्णय लिया है।

श्री सिंह ने कहा कि निर्दलीय सांसद बालेश्वर यादव भी सपा के साथ है। श्री सिंह ने कहा कि संप्रग को समर्थन देने का पत्र पहले से ही राष्ट्रपति के पास है, लेकिन कुछ समय पहले उत्तर-प्रदेश विधानसभा में जब कांग्रेस ने सपा सरकार से समर्थन वापस लिया था, तो उससे भ्रम की स्थिति पैदा हो गयी थी। सपा ने उस समय भी मनमोहन सिंह सरकार को दिए गए समर्थन की चिट्ठी वापस नहीं ली थी। सपा में परमाणु करार के समर्थन को लेकर मतभेद हैं जो उभर कर सामने आए हैं, लेकिन दिलचस्प बात यह है कि उसके जो सांसद सपा नेतृत्व के साथ नहीं हैं वे भी कांग्रेस को समर्थन दे रहे हैं। मसलन राज बब्बर और बेनी प्रसाद वर्मा सपा का दामन छोड़ चुके हैं, लेकिन ये दोनों कांग्रेस के साथ हैं। श्री अतीक अहमद को बहुजन समाज पार्टी के नजदीक माना जा रहा है, लेकिन श्री बेनी प्रसाद वर्मा उनके काफी करीबी हैं वह संप्रग के लिए उनका समर्थन जुटा सकते हैं। सपा के टिकट पर चुनाव जीते मुनव्वर हसन ही ऐसे सांसद हैं, जो बसपा के साथ खुलकर हैं।