Prakash Karat - Bhartiya Communist Party

संप्रग से चार सालों से अधिक के रिश्ते को समाप्त करते हुए वाम दलों ने परमाणु समझौते, महँगाई और अन्य मुद्दों पर आज समर्थन वापस ले लिया, जिससे मनमोहन सरकार अल्पमत में आ गई है। माकपा, भाकपा, फारवर्ड ब्लॉक और आरएसपी के वरिष्ठ नेताओं ने आज राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल से भेंट करके उन्हें समर्थन वापसी का अपना पत्र सौंप दिया। इसके अलावा उन्होंने राष्ट्रपति को दिए अन्य पत्र में माँग की कि `लोकसभा का सत्र तुरंत बुला कर प्रधानमंत्री को विश्वास मत हासिल करने को कहा जाए।'

सरकार और कांग्रेस नेतृत्व पर हमेशा `अमेरिका की ओर देखने' और करार पर संसद के बहुमत की `अवहेलना' का आरोप लगाते हुए वाम नेताओं ने कहा कि सरकार परमाणु करार पर पारदर्शी नहीं है। उन्होंने माँग की कि जिस सुरक्षा समझौते के मसौदे के आधार पर आईएईए के साथ करार को अंतिम रूप देना है, उसके मूल पाठ को सार्वजनिक किया जाए।

समर्थन वापसी का पत्र राष्ट्रपति को सौंपे जाने के बाद माकपा महासचिव प्रकाश करात ने संवाददाताओं से कहा कि कांग्रेस `विदेश और घरेलू दोनों नीतियों में दक्षिण पंथ की ओर और झुकने को कृत संकल्प है, जिससे साम्प्रदायिक शक्यों को उपजाऊ जमीन उपलब्ध होगी।'

भाकपा, आरएसपी और फारवर्ड ब्लॉक के महासचिवों की उपस्थिति में माकपा महासचिव ने कहा कि सरकार ने देश को ऐसे समय राजनीतिक संकट में डाला है जब जनता महँगाई और दोहरे अंक की मुद्रास्फीति की मार में दबी है। उन्होंने कहा कि बढ़ती महँगाई को काबू पाने के लिए वाम ने पाँच सुझाव दिए थे, लेकिन सरकार ने सबको नामंजूर कर दिया।

माकपा नेता ने कहा `हम उस सरकार का हिस्सा नहीं बने रह सकते हैं, जो जनता की तकलीफों के प्रति लापरवाह हो और जिसकी प्राथमिकता भारत की जनता की बजाय अमेरिका के राष्ट्रपति से की गई प्रतिबद्धताओं को पूरा करने की हो।'

परमाणु करार के मामले में संसद की भावना की `अवमानना' करने का आरोप लगाते हुए उन्हेंने कहा कि दोनों सदनों में हुई चर्चाओं से साफ है कि बहुमत इस करार के खिलाफ है। करात ने कहा कि सरकार ने संप्रग -वाम समिति की 16 नवंबर 2007 की बैठक में किए गए उस निर्णय का उल्लंघन किया है, जिसमें कहा गया है कि सरकार करार की दिशा में अगला कदम तभी उठाएगी जब समिति अपने निष्कर्षों को अंतिम रूप दे देगी।

विदेश-मंत्री प्रणव मुखर्जी के इस बयान पर कि आईएईए का मसौदा `गोपनीय' दस्तावेज है, उन्होंने कहा `हम यह जानना चाहते हैं कि किसने उसे गोपनीय दस्तावेज घोषित किया है। हम यह जानना चाहते हैं कि क्या सरकार ने आईएईए से इसे गोपनीय दस्तावेज घोषित करने को कहा है।'

उन्होंने कहा कि आईएईए में ऐसा कोई मूल पाठ गोपनीय नहीं करार दिया जा सकता है। सरकार के आग्रह पर ही ऐसा किया जा सकता है। करात ने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व और मनमोहन सरकार हमेशा अमेरिका की ओर देखते हैं। लेकिन `उन्हें अमेरिका से कुछ अच्छी बातें भी सीखनी चाहिए। बुश प्रशासन ने इसे (मसौदा प्रोटोकाल) अमेरिकी कांगेस में उपलब्ध करा दिया है। इंटरनेट पर कोई भी इसे देख सकता है।'

भारत केन्द्रित सुरक्षा समझौते मसौदे के मूल पाठ को भी सार्वजनिक किए जाने की माँग करते हुए करात ने कहा कि यह पाठ `हम पर स्थायी तौर पर बाध्य होगा। हमारे परमाणु रिएक्टर स्थायी तौर पर सुरक्षा निगरानी में रहेंगे।'

उन्होंने कहा `यह मूल पाठ हमसे छिपाया जा रहा है। हम चाहते हैं कि सरकार हमें आईएईए के वह नियम बताए जिसके तहत सुरक्षा या अतिरिक्त प्रोटोकाल संबंधी किसी दस्तावेज को गोपनीय रखने का प्रावधान है।' माकपा महासचिव ने कहा `यह वाम दलों का अपमान है कि जब आप मूल पाठ के साथ आते हैं (संप्रग-वाम बैठकों में) और फिर कहते हैं कि हम इसे आप को नहीं दिखा सकते हैं।'

उन्होंने कहा `इस कुख्यात करार के सभी कदमों पर मनमोहन सिंह सरकार पारदर्शी नहीं रही। देश उस समय तक करार को स्वीकार नहीं करेगा जब तक पूरे विपक्ष, वाम दलों और अन्य वर्गों द्वारा उठाए गए मुद्दोsं का स्पष्टीकरण नहीं दिया जाता है।'

करात ने कहा कि वाम दल उन छह बिंदुओं को कल सार्वजनिक करेगी, जिसे उसने संप्रग-वाम समिति में रखा था। इनके अलावा सरकार द्वारा रखे गए पाँच बिंदुआंs और कुछ अन्य सामग्रियों को भी सार्वजनिक किया जाएगा। उन्होंने कहा `परमाणु करार पर हमारा संघर्ष समाप्त नहीं हुआ है। यह जारी रहेगा। हम अन्य दलों से इस विरोध में शामिल होने को कहेंगे।'