बुश-मनमोहन मिलन
करार परस्पर हितकारी - बुशहमारे संबंध मधुरतम - मनमोहनभारत में राजनीतिक उथल-पुथल से बेफिक्र प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने आज अमेरिका के राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुश के साथ भारत-अमेरिका परमाणु करार की `प्रगति' पर बातचीत की। बुश ने इस करार को दोनो देशों के लिए महत्वपूर्ण बताया और सिंह के नेतृत्व कौशल की सराहना की। दोनों नेताओं ने एक स्वर में द्विपक्षीय सामरिक रिश्तों को मजबूत करने पर जोर दिया। उधर देश में वामपंथी दल परमाणु करार के मुद्दे पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली संप्रग सरकार से कुछ ही घंटे में समर्थन वापस लेने वाले हैं और इधर विश्वास से भरे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जीö8 शिखर सम्मेलन से इतर राष्ट्रपति बुश से मिलने के लिए सोपोरो से दो घंटे का फासला तय करके माउंट पोरोमोइ स्थित होटल विंडसर पहुँचे। दोनों नेताओं के बीच निर्धारित समय से 15 मिनट अधिक चली 50 मिनट की बैठक के बाद सिंह ने कहा, `अमेरिका के साथ हमारे संबंध आज से पहले कभी इतने अच्छे नहीं थे और मेरी सरकार की यह मंशा है कि जलवायु परिवर्तन का सवाल हो या वैश्विक अर्थ-व्यवस्था का, भारत और अमेरिका को अहम भूमिका निभानी है और कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होना है और वही होने जा रहा है।' बुश और सिंह दोनों ने एक-दूसरे की सराहना की और दोनों देशों के बीच निकट संबंधों की जरूरत बताई। बैठक के बाद दोनों नेता सहज भाव से प्रेस के सामने आए। बुश ने कहा, `हमने इस बारे में बात की कि भारत- अमेरिका परमाणु करार दोनो देशों के लिए कितना जरूरी है।' राष्ट्रपति ने कहा, `मैं प्रधानमंत्री का बहुत सम्मान करता हूँ। मैं भारत का भी बहुत सम्मान करता हूँ और मेरे विचार में यह बहुत जरूरी है कि अमेरिका नयी सामरिक भागीदारी बनाने के साथ ही एक रिश्ता बनाने के लिए अपने मित्रों के साथ काम करता रहे ताकि विश्व की समस्याओं को हल किया जा सके।' कई मुलाकातों के बाद दोनों नेताओं के बीच विकसित हुई आपसी समझ की बानगी पेश करते हुए बुश ने कहा, `कुल मिलाकर यह दो दोस्तों के बीच सचमुच एक अच्छी मुलाकात थी। और अब मि. प्राइम मिनिस्टर आज हमारे साथ आने के लिए आपका धन्यवाद और देश में आपके नेतृत्व के लिए बधाई।'परमाणु करार के लिए बहुत कुछ दाँव पर लगाने वाले प्रधानमंत्री सिंह के चेहरे पर भारत में चल रही राजनीतिक उठा पटक का प्रभाव कहीं नजर नहीं आया। सिंह ने कहा कि वह दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों से काफी प्रसन्न हैं, जो एक विशुद्ध सामरिक भागीदारी की शक्ल अख्तियार कर चुके हैं। सिंह ने कहा कि मुझे राष्ट्रपति बुश को यह बताते हुए काफी प्रसन्नता हो रही है कि जुलाई 2005 में हमारी पहली बैठक (जब दोनों ने परमाणु करार पर सहमति जताई) के बाद से हमारे संबंध बहुत आगे जा चुके हैं। हमने सभी क्षेत्रों में काफी तरक्की की है। हमने परमाणु सहयोग, रक्षा सहयोग और अंतरिक्ष सहयोग तथा शैक्षणिक आदान-प्रदान में प्रगति की है। सिंह ने कहा कि दोहा दौर की वार्ता की सफलता के लिए भारत और अमेरिका बहुपक्षीय क्षेत्रों में मिलकर काम कर रहे हैं। सिंह ने कहा `मैं दोनों देशों के बीच इस तरह के संबंध विकसित करने में राष्ट्रपति बुश की व्यक्तिगत तथा शानदार भूमिका के लिए उन्हें धन्यवाद देता हूँ। मैं यही कह सकता हूँ कि दोनों देशों के बीच इतने अच्छे संबंध कभी नहीं थे जितने आज हैं।' उन्होंने कहा `यह हमारी सरकार का मानना है और मैं समझता हूँ कि भारत की जनता और खास तौर से देश के बुद्धिजीवी वर्ग की भी यही इच्छा है कि तेजी से बदलते इस अंतर निर्भर विश्व में चाहे वह जलवायु परिवर्तन का मुद्दा हो या वैश्विक अर्थव्यवस्था का, भारत तथा अमेरिका को अहम भूमिका निभानी होगी और कंधे से कंधा मिलाकर काम करना होगा और यही होने जा रहा है। दोनों नेताओं ने बैठक के बाद टिप्पणियाँ तो की लेकिन किसी प्रश्न का जवाब नहीं दिया। बुश ने कहा `दोनों देशों के लिए इस परमाणु करार का क्या महत्व है इस पर हमने बातचीत की।' |
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