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भारत और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के बीच मानक समझौते के मसौदे में साफ है कि एजेंसी भारत के सैन्य कार्यक्रम में हस्तक्षेप नहीं करेगी और समझौता केवल उन असैनिक परमाणु संस्थानों में ही लागू होगा जिनकी पहचान भारत करेगा। भारत केन्द्रित समझौते का मूल पाठ आज यहाँ सरकार ने जारी किया। उसमें भारत-अमेरिका असैनिक परमाणु करार के तहत योजना को माना गया है, जिसके तहत भारत अपने असैनिक परमाणु संस्थानों को सुरक्षा उपायों के अन्तर्गत लाएगा। सैनिक संस्थान इससे बाहर रहेंगे। करार के क्रियान्वयन में यह मसौदा एक महत्वपूर्ण कदम है। इसमें निरूपित है कि भारत यह शपथ लेगा कि सुरक्षा उपायों वाले संस्थानों में बनने वाली कोई भी वस्तु और उसके लिए प्राप्त सामग्री का इस्तेमाल किसी परमाणु हथियार के विनिर्माण में अथवा किसी अन्य सैन्य मकसद के लिए नहीं होगा।

दस्तावेज कहता है कि ऐसी वस्तुओं का इस्तेमाल विशिष्ट तौर पर शांतिपूर्ण प्रयोजन के लिए होगा और किसी भी परमाणु विस्फोटक उपकरण के विनिर्माण में उसका इस्तेमाल नहीं होगा। उल्लेखनीय है कि आईएईए ने कल घोषणा की थी कि दस्तावेज को बोर्ड ऑफ गवर्नर्स में वितरित किया जाएगा। दस्तावेज कहता है, `भारत चरणबद्ध ढंग से एजेंसी के सुरक्षा उपायों के तहत अपने असैनिक परमाणु संस्थानों को लाने के लिए सार्वभौम फैसले पर आधारित एक घोषणा-पत्र एजेंसी (आईएईए) के समक्ष दाखिल करेगा।'

`एजेंसी (आईएईए) भारत के आर्थिक अथवा प्रौद्योगिकी विकास में अड़चन को दूर करने के मकसद से सुरक्षा उपाय लागू करेगी और अपने मकसद के लिए इस समझौते से बाहर भारत द्वारा निर्मित, हासिल अथवा विकसित परमाणु सामग्री, गैर परमाणु सामग्री, उपकरण, पुर्जे, सूचना एवं प्रौद्योगिकी के भारत के इस्तेमाल संबंधी किसी गतिविधियों में बाधा नहीं डालेगी अथवा हस्तक्षेप नहीं करेगी।' राजनीतिक दलों तथा कुछ वैज्ञानिकों ने आशंका जतायी थी कि देश का सैन्य कार्यक्रम इस समझौते से प्रभावित हो सकता है। इस परिपेक्ष्य में सुरक्षा उपायों वाले परमाणु संस्थानों के अलावा भारत के परमाणु कार्यक्रम में हस्तक्षेप नहीं करने के बारे में यह प्रावधान महत्वपूर्ण है।

वामपंथी दलों ने समझौते का मूल पाठ अभी तक जारी नहीं करने के लिए सरकार की आलोचना की थी और सवाल उठाया था कि क्या वह ऐसा कुछ छिपा रही है, जिससे देश की परमाणु सार्वभौमिकता के साथ समझौता हो रहा है।

समझौते के मसौदे को आईएईए के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स से मंजूरी मिलनी है। भारत के संयंत्रों को कभी भी आपूर्ति में बाधा नहीं आए इसलिए सुरक्षा उपायों वाले संस्थानों के लिए परमाणु ईंधन का एक सामरिक भंडार विकसित करने संबंधी भारत के प्रयास को समर्थन की बात का उल्लेख मसौदे में है।

दस्तावेज बिना विस्तार में जाए कहता है कि भारत विदेशी ईंधन की आपूर्ति में बाधा की सूरत में अपने असैनिक परमाणु संयंत्रों का निर्बाध परिचालन सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षात्मक कदम उठाएगा।  समझौता ऊर्जा सुरक्षा तथा पर्यावरण के संरक्षण संबंधी दोहरी चुनौती से निपटने के लिए अपने तीन चरण वाले राष्ट्रीय परामाणु कार्यक्रम के पूर्ण विकास के लिए भारत की प्रतिबद्धता को मान्यता देता है।

वह अपनी जनता के कल्याण तथा अन्य शांतिपूर्ण प्रयोजन के लिए अनुसंधान तथा विकास संबंधी गतिविधि के भारत के अधिकार को भी मान्यता देता है। समझौते के तहत आईएईए भारत को एक उन्नत परमाणु प्रौद्यागिकी वाले देश के रूप में मान्यता देता है, जो अपने विकास के लिए असैनिक परमाणु सहयोग के विस्तार का आकांक्षी है।

समझौता मसौदे में सन् 2005 के भारत-अमेरिका परमाणु करार का भी उल्लेख है, जिसके तहत भारत ने इच्छा जाहिर की है कि वह अपने असैनिक और सैनिक संस्थानों और कार्यक्रमों की चरणबद्ध ढंग से पहचान कर उन्हें अलग अलग करेगा।

सुरक्षा मानक समझौते के मुताबिक अमेरिका के साथ किये गये परमाणु  करार में यह प्रावधान है कि भारत आईएईए के सुरक्षा उपाय  के तहत अपनी स्वेच्छा से असैन्य परमाणु प्रतिष्ठानों को रखेगा।  ताकि भारत और एजेंसी के अन्य देशों के बीच असैन्य परमाणु सहयोग  को बढ़ावा मिल सके।  आईएईए के सुरक्षा उपाय को भारत की ओर से स्वीकार  करने का आधार अंतरराष्ट्रीय सहयोग व्यवस्था है। इस व्यवस्था के  जरिये भारत की पहुँच अंतरराष्ट्रीय ईंधन बाजार तक होगी। भारत को  इसके माध्यम से कई देशों की कंपनियों से विश्वसनीय  बाधारहित  और निरंतर ईंधन मिल सकेगा।

इस प्रावधान में यह भी कहा गया है कि 45 सदस्यीय परमाणु आपूर्तिकर्ता  समूह (एनएसजी) की ओर से भारत को अंतरराष्ट्रीय समुदाय के  साथ परमाणु कारोबार करने की छूट संबंधी अनुमति मिलने के बाद ही सुरक्षा  उपाय समझौता लागू होगा।  सुरक्षा उपाय समझौता कहता है कि अगर भारत इस समझौते से  जुड़ी कोई भी परमाणु सामग्री,  गैर-परमाणु सामग्री या उपकरण आयात  करना अथवा किसी प्रतिष्ठान या किसी अन्य स्थान पर ले जाने का फैसला  करता है तो उसे इस बारे में आईएईए को अधिसूचित करना होगा।

इस प्रकार से अधिसूचित कोई भी प्रतिष्ठान भारत की ओर से  आईएईए को प्राप्त अधिसूचना की तारीख के बाद से इस समझौते  का अंग होगा    पुन: भारत को किसी भी प्रकार की परमाणु सामग्री,  गैर-परमाणु  सामग्री,  उपकरणों आदि की प्राप्ति के बारे में चार हफ्ते के भीतर  आईएईए को अधिसूचित करना होगा। मसौदा समझौता कहता है `इस समझौते में ऐसा कुछ नहीं है, जिससे अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत भारत के अन्य अधिकार और बाध्यताएँ प्रभावित होंगी।'

सुरक्षा उपाय समझौता भारत की ओर से अधिसूचित प्रतिष्ठान और भारत को दी जाने वाली परमाणु सामग्री, गैर-परमाणु सामग्री और अन्य उपकरणों पर लागू होगा। समझौते के तहत अधिसूचित प्रतिष्ठान में उत्पादित विशेष विखंडनीय पदार्थ समेत अन्य परमाणु सामग्री, उत्पादित प्रसंस्करित उपयोग में लाये जाने वाले अन्य सामान, उपकरण आदि भी सुरक्षा उपाय के दायरे में आएँगे।

संयुक्त राष्ट्र एजेंसी समझौते से संबद्ध सामग्रियों की एक सूची तैयार करेगी और हर 12 महीने पर सूची की प्रति भारत को भेजेगी। भारत के अनुरोध पर एजेंसी किसी भी समय सूची की प्रति दे सकती है। लेकिन इस संदर्भ में दो हफ्ते पहले अनुरोध करना होगा।  भारत के भीतर या किसी अन्य सदस्य देश को या अंतरराष्ट्रीय संगठन को प्रसंस्करण, पुन:प्रसंस्करण, परीक्षण या विकास के मकसद से सामग्रियों को अगर स्थानांतरित किया जाता है तो आईएईए के साथ मंजूर किये गये समझौते के तहत परमाणु सामग्री के संदर्भ में सुरक्षा उपाय निलंबित किया जा सकता है। सुरक्षा उपाय में यह भी प्रावधान है कि सामग्रियों की मात्रा समझौते में उल्लेखित सीमा से पार नहीं होगी।