Petrol

कच्चे तेल की ऊँची कीमतों की मार से परेशान तेल कंपनियों को राहत देने के लिए सरकार आयकर एवं निगमित कर पर उपकर या अधिभार लगाने पर विचार कर रही है। उल्लेखनीय है कि पेट्रोलियम मंत्रालय पेट्रोल की कीमतों में दस रुपये प्रति लीटर डीजल में पाँच रुपये प्रति लीटर और एलपीजी की कीमतों में 50 रुपये प्रति सिलेंडर बढ़ोत्तरी का प्रस्ताव पहले ही पेश कर चुका है।

उधर, वित्त मंत्री पी. चिदंबरम द्वारा कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्कादों के उत्पाद शुल्क में कमी की अनिच्छा जताने पर मंत्रालय राजस्व के दूसरे स्रोतों की तलाश कर रहा है।

पेट्रोलियम मंत्री मुरली देवड़ा ने आज चिदंबरम से मुलाकात की, लेकिन सीमा और उत्काद शुल्क में तत्काल कमी करने के लिए वह उन्हें राजी करने में विफल रहे। तेल कंपनियों को पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री से 2,00,000 करोड़ रुपये का नुकसान होने की आशंका है। बीपीसीएल और एचपीसीएल के पास कच्चा तेल खरीदने के लिए केवल जुलाई तक ही नकदी है, जबकि इंडियन आयल सितंबर तक कच्चा तेल खरीदने में समर्थ है। पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें नहीं बढ़ा सकने के कारण इन कंपनियों को नकदी की भारी किल्लत हो गई है।

सूत्रों ने कहा कि अधिभार लगाने से कच्चे तेल के सीमा एवं उत्पाद शुल्क में कमी की भरपाई हो सकेगी। उल्लेखनीय है कि कच्चे तेल के सीमा शुल्क को पाँच फीसदी से घटाकर शून्य करने और पेट्रोल एवं डीजल के उत्पाद शुल्क में कटौती का प्रस्ताव है । पेट्रोलियम मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव एस. सुंदरेशन ने कहा कि तेल कंपनियाँ निर्णय के लिए दूसरे सप्ताह तक इंतजार नहीं पर सकतीं। उन्होंने कहा `हमें उम्मीद है कि इस संबंध में निर्णय जल्द लिया जाएगा।' देवड़ा ने कहा कि सरकार में कुछ लोग पेट्रोल की कीमतों को विनियंत्रित करना चाहते हैं। इस कदम से कीमतें 16 से 17 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ सकती हैं ।