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बालीवुड में नई कनक्शेन का जलवा
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By विनय वीर
प्रकाशित 07/13/2008
 
Bollywood Connection अब के पहले कभी भी बॉलीवुड में परिवर्तन का पहिया इतनी तेजी से नहीं घूमा। यह सच है कि हमेशा नई पीढ़ी अपने साथ ताजगी लाती है, लेकिन इस समय तो बॉलीवुड में नई जनरेशन ताजगी के तूफान का एहसास करवा रही है।

बालीवुड में नई कनक्शेन का जलवा
Bollywood Connection

अब के पहले कभी भी बॉलीवुड में परिवर्तन का पहिया इतनी तेजी से नहीं घूमा। यह सच है कि हमेशा नई पीढ़ी अपने साथ ताजगी लाती है, लेकिन इस समय तो बॉलीवुड में नई जनरेशन ताजगी के तूफान का एहसास करवा रही है। चाहे अभिनय हो, चाहे लेखन हो, निर्देशन हो या निर्माण हर क्षेत्र में इस समय नई पीढ़ी के प्रतिनिधि छाए हुए हैं।

माना जाता है कि लेखन उतना ही अच्छा होगा, लेखक जितना प्रौढ़ और परिपक्व होगा। लेकिन हाल की कुछ सबसे ज्यादा सफल और ताजगी से ओत-प्रोत फिल्में ऐसे नई पीढ़ी के लेखकों की देन हैं जो लेखक की पारंपरिक छवि में कहीं भी फिट नहीं बै"ते। मसलन, जयदीप साहनी को ही लें, `खोसला का घोसला', `चक दे इंडिया', `बंटी और बबली' तथा `आजा नचले' जैसी कामयाब और चर्चित फिल्मों के लेखक साहनी की कहानी बॉलीवुड के उस मस्तमौला, बेफिक्र नायक की कहानी है जो सालों से बॉलीवुड के पर्दे में दिखता रहा है, लेकिन हकीकत में वह ढूंढने से भी नहीं मिलता।

जयदीप साहनी न सिर्प नए कथानकों, ताजगी भरे विषयों, मौलिक प्रस्तुति और चौंका देने वाली पटकथाओं के जन्मदाता हैं बल्कि वह उतने ही सहज, बिंदास और मौलिक उत्साह व ताजगी से भरे हैं। उनकी पृष्ठभूमि साहित्यिक नहीं है। वह बॉलीवुड में धमाके के साथ प्रवेश करने के पहले आईटी कंसल्टेंट थे। एक दिन उन्होंने यह कहते हुए नौकरी छोड़ दी कि वह दो टकिये की नौकरी के लिए नहीं बने। वे पटकथा लिखने की कला सीखने लगे। तत्पश्चात जयदीप रामगोपाल वर्मा से मिले और `जंगल' का कंसेप्ट उन्हें सुनाया। इसके बाद तो फिर उन्होंने पीछे मुड़कर देखने का नाम ही नहीं लिया। एक से बढ़कर एक सुपरहिट फिल्में उनकी कलम से निकलने लगीं।

नई पीढ़ी स्पष्ट संवेदनशील और तेज-तर्रार है। नई पीढ़ी के शानदार निर्देशकों में अनीस बज्मी का नाम भला कौन नहीं जानता? बज्मी जब 13 साल के थे तब बॉलीवुड में आए थे। उन्होंने अपना फिल्मी सफर राजकपूर की `प्रेम रोग' के साथ शुरू किया। इसकी एडिटिंग, आर्ट डिजाइनिंग, सब कुछ में उन्होंने अपने आपको शामिल किया और यह करते हुए उन्होंने पाया कि अगर अच्छा डायरेक्टर बनना है तो लिखने की कला भी आनी चाहिए। फिर क्या था, बज्मी ने कलम उ"ा ली और 1988 में आई फिल्म `हम फरिश्ते नहीं' के डायलॉग उन्होंने ही लिखे। हालाँकि यह फिल्म ज्यादा सफल नहीं रही, लेकिन अनीस बज्मी चल निकले और लगभग 20 सफल फिल्मों के संवाद व पटकथाएँ उन्होंने लिखीं। जब वह निर्देशन के क्षेत्र में उतरे तो एक नया धमाका किया, `प्यार तो होना ही था', `नो एंट्री' और `वेलकम' जैसी सुपरहिट फिल्में दीं। उनकी नई फिल्म `सिंह इज किंग' प्रदर्शन के लिए तैयार है ।

डायरेक्शन के क्षेत्र में एक और नई पीढ़ी का युवा कमाल कर रहा है- इम्तियाज अली। जमशेदपुर के इम्तियाज 22 साल की उम्र में मुंबई वाया दिल्ली (मंडी हाउस) पहुँचे। सबसे पहले उन्होंने जी टीवी के लिए एक कार्यक्रम का निर्देशन किया, `पुरुष क्षेत्रे'। इसके बाद तो उनके पास टीवी कार्यक्रमों के निर्देशन के प्रस्तावों की लाइन लग गई, लेकिन इम्तियाज के दिलो-दिमाग में तो बड़ा पर्दा घूम रहा था। जब उन्हें अभय देओल और आयशा टाकिया स्टारर फिल्म `सोचा न था' में मौका मिला तो उन्होंने इसका भरपूर फायदा उ"ाया। हालाँकि फिल्म फ्लॉप गई लेकिन उनके पास प्रस्तावों की लाइन लग गई। इम्तियाज अली की लोकप्रियता वास्तव में सातवें आसमान पर पहुँची करीना कपूर और शाहिद कपूर जैसे सितारों से सजी `जब वी मेट' से। इम्तियाज कहते हैं मैं फिल्म मनोरंजन के लिए बनाता हूँ।

नई पीढ़ी के जलवागरों की सूची में अभिनेता दीपक डोबरियाल, कोरियोग्राफर वैभवी मर्चेंट, एडिटर आरती बजाज, गीतकार स्वानंद किरकिरे, अभिनेत्री असिन, कॉस्ट्यूम डिजाइनर सुरीली गोयल और कला निर्देशक नितिन देसाई का नाम भी शामिल है। दीपक डोबरियाल को अगर आप उसके नाम से न याद कर पा रहे हों तो `ओमकारा' के राज्जू को याद करिए। लंगडे त्यागी का खूंटीदार, दाढ़ी वाला दाहिना हाथ। आज दीपक डोबरियाल अपने सनसनाते, ताजगी भरे अभिनय के लिए बॉलीवुड की शान समझे जाते हैं। दीपक के पास आज कई बड़े-बड़े निर्माता-निर्देशकों की फिल्में हैं। अनुराग कश्यप की `गुलाल', राकेश मेहरा की `दिल्ली-6' और उन्हीं की `मुंबई कटिंग'।

वैभवी मर्चेंट के साथ कई सुपरहिट फिल्मों की सफलता जुड़ी है। नेशनल अवार्ड हासिल करने वाले गीत `ढोल बाजे' की कोरियोग्राफी उन्होंने ही की थी। `लगान' के मशहूर गाने `ओ री छोरी' में उन्हीं के नृत्य-निर्देशन का कमाल है। इसके अलावा `देवदास', `फिदा', `धूम-1', `धूम-2', `रंग दे बसंती' और अजर अमर हो चुके `बंटी और बबली' के गीत `कजरारे कजरारे' की कोरियोग्राफी तो अविस्मरणीय है।

कभी हिचकिचाहट के साथ बॉलीवुड में कदम रखने वाली सुरीली गोयल आज फिल्म इंडस्ट्री की प्रमुख कास्ट्यूम डिजाइनर हैं। फैशन इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन एण्ड मर्चेंडाइजिंग, लॉस एजिल्स से पढ़ाई करने वाली सुरीली ने पहली बार फिल्म `काल' में शाहरूख खान और मलाइका अरोडा के कपडों को डिजाइन किया था। इसके बाद `सलाम नमस्ते', `जानेमन', `तारा रम पम पम' जैसी फिल्मों में भी उन्होंने अपनी समृद्ध कल्पनाशीलता का इस्तेमाल करके फिल्म इंडस्ट्री में धाक जमा ली। सुरीली की आने वाली फिल्में हैं, `हर पल' और `लास्ट लीयर' जिसमें अमिताभ बच्चन और प्रीती जिंटा जैसे कलाकार हैं। नितिन देसाई ने वैसे तो कई साल पहले ही विधु विनोद चोपड़ा की 1942 - ए लव स्टोरी से अपने कला की समझ की बानगी दे दी थी। लेकिन `जोधा अकबर' और `एकलव्य व रॉयल गार्ड' में अपनी कलात्मकता को शिखर पर पहुंचा दिया। अब वह हॉलीवुड के लिए भी प्रस्ताव हासिल कर रहे हैं। ट्वेंटीएथ सेंचुरी फॉक्स जैसी फिल्म कंपनी उनके साथ मिलकर काम करने की योजना बनी रही है।