Umar Abdulla and Mehabooba Fufti

शहीदी दिवस पर कश्मीरियों ने आज उन नेताओं को अपने गुस्से का शिकार बना डाला जिन्होंने उनके अमरनाथ जमीन मुद्दे पर छेड़े गए आंदोलन में साथ देते हुए आजाद सरकार को गिरा दिया था। श्रीनगर स्थित शहीदी कब्रिस्तान में पहुँचे नेकां अध्यक्ष उमर अब्दुल्ला और पीडीपी अध्यक्षा महबूबा मुफ्ती पथराव में बाल-बाल बचे हैं। हालाँकि पुलिस की कार्रवाई में 30 से अधिक लोग जख्मी हुए हैं।

बवाल उस समय मचा था जब ये दोनों नेता, 1931 के `शहीदों' को श्रद्धांजलि देने शहीदी कब्रिस्तान पहुँचे तो वहाँ पहले से मौजूद अलगाववादियों के सैकड़ों समर्थकों ने उन पर हल्ला बोल दिया। हालाँकि इस हल्लेबाजी में महबूबा मुफ्ती कब्रिस्तान के भीतर ही नहीं जा पाईं और उमर अब्दुल्ला किसी प्रकार भीतर घुस तो गए लेकिन उन्हें पथराव में जान बचा कर  भागना पड़ा। असल में अलगाववादियों ने इस अवसर पर हड़ताल का आह्वान किया था और उन्हें लगने लगा था की राजनीतिज्ञ उनकी हड़ताल का श्रेय ले जाएँगे। नतीजतन राजनीतिज्ञों की इस कोशिश पर भड़के मीरवायज उमर फारूक के गुट के समर्थकों ने पथराव कर दोनों नेताओं को भगा दिया।

इतना जरूर था कि इस हिंसा पर टिप्पणी करते हुए नेकां नेताओं का कहना था कि नेकां और मीरवायज के नेतृत्व वाली एएसी के बीच तो पारंपारिक दुश्मनी थी पर उन्होंने महबूबा पर अपना गुस्सा क्यों निकाला इस पर उन्हें भी हैरानगी हुई थी।

इन दोनों नेताओं द्वारा जान बचा कर भाग निकलने के बावजूद आरंभ हुई हिंसा थमी नहीं थी। देखते ही देखते यह श्रीनगर शहर के दूसरे हिस्सों में भी फैल गई। हिंसा को थामने के लिए पुलिस ने आंसू गैस भी छोड़ी, लाठियाँ भी बरसाईं पर फायरिंग से ही काम बना। करीब 30 लोगों के जख्मी होने की खबर है।