Finance Minister of India Mr. P. Chitambaram

बढ़ते मूल्यों पर अंकुश लगाने के लिए लोगों से माँग कम करने की अपील करते हुए वित्त- मंत्री पी. चिदंबरम ने कहा है कि सरकार मुद्रास्फीति की दर पर काबू पाने के लिए विभिन्न उत्पादों पर कर कम करना जारी नहीं रख सकती।

चिदंबरम ने एक समाचार चैनल को दिये इंटरव्यू में कहा, `कर कटौती जैसे राजकोषीय कदम एक हद तक मददगार है, लेकिन आप अनिश्चितकाल तक कर कटौती नहीं कर सकते, क्योंकि एक समय के बाद कटौती के लिए कुछ नहीं रह जाएगा।' इस साल सरकार ने अब तक विभिन्न खाद्य उत्पादों, सीमेंट, काटन तेल एवं अन्य उत्पादों पर शुल्क कम किया है या इसे पूरी तरह समाप्त कर दिया है, ताकि मुद्रास्फीति की दर पर अंकुश रखा जा सके।

चिदंबरम ने कहा कि मुद्रास्फीति की दर 13 साल के उच्चतम स्तर पर पहुँचकर 11.89 प्रतिशत हो गयी है। इस समय सरकार माँग को नरम करने के लिए मौद्रिक कदमों पर निर्भर कर रही है। उन्होंने कहा, `औसत माँग को कम करने का सर्वश्रेष्ठ तरीका मौद्रिक नीति है। इसीलिए भारतीय ऱिजर्व बैंक के लिए बचाव का यही पहला हथियार है।' वित्त-मंत्री ने कहा कि अन्य राजकोषीय कदम भी उठाए जा  सकते हैं, लेकिन यदि राजकोषीय हालात दबाव वाले हैं, तो निश्चित तौर पर आपको माँग नरम बनानी होगी। आने वाले समय में हमें इस पर विचार करना होगा।

जीडीपी विकास दर का अनुमान 2008- 09 के दौरान कम रहने के बारे में चिदंबरम ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय ब़ाजार में यदि कोई संकट नहीं रहता तो विकास दर 9 प्रतिशत हो सकती है। चालू वित्त वर्ष के दौरान विकास दर 8 प्रतिशत से अधिक ही रहेगी। कच्चे तेल के बढ़ते दामों का जिक्र करते हुए चिदंबरम ने कहा कि किसी ने उम्मीद नहीं की थी कि कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जाएगी और 146 डॉलर प्रति बैरल को छुएगी।