अफगानिस्तान स्थित भारतीय प्रतिष्ठानों और कर्मचारियों पर तालिबान के और ज़्यादा हमलों की आशंका के बीच सुरक्षा मसलों और उपायों पर अफगान अधिकारियों से विचार- विमर्श करने के लिए विदेश सचिव शिवशंकर मेनन आज काबुल पहुँचे।
अफगानिस्तान स्थित भारतीय प्रतिष्ठानों और कर्मचारियों पर तालिबान के और ज़्यादा हमलों की आशंका के बीच सुरक्षा मसलों और उपायों पर अफगान अधिकारियों से विचार- विमर्श करने के लिए विदेश सचिव शिवशंकर मेनन आज काबुल पहुँचे। काबुल स्थित भारतीय दूतावास पर घातक हमले के छह दिन बाद मेनन अफगानिस्तान गए हैं। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि मेनन अफगान अधिकारियों के साथ तालिबान और उसके संरक्षक आईएसआई को निक्रिय करने के उपायों पर विचार-विमर्श करेंगे।
भारतीय दूतावास पर किए गए आत्मघाती बम हमले में भारतीय विदेश सेवा के एक वरिष्ठ अधिकारी और ब्रिगेडियर स्तर के एक रक्षा अधिकारी मारे गए थे। इसके बाद से अफगानिस्तान में कार्यरत भारतीय कर्मचारियों के प्रति भारत सरकार की चिंता बढ़ गई है।
गुप्तचर सूत्रों के मुताबिक तालिबान कंधार और जलालाबाद स्थित भारतीय वाणिज्यिक दूतावासों पर हमलों की योजना बना रहा है। अफगानिस्तान में पुनर्निर्माण और विकास कार्यों में करीब 3,000 भारतीय कार्यरत हैं। इन सभी की और भारतीय दूतावासों की पुख्ता सुरक्षा सुनिश्चित करने के उपायों पर मेनन अफगान अधिकारियों के साथ विचार- मंथन करेंगे।
मेनन के साथ विदेश और गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों का एक दल भी गया है। एक अधिकारी ने यहाँ `प्रेट्र' को बताया, `यह सुरक्षा का कोई साधारण जाय़जा नहीं है। यह सुरक्षा पर केवल विचार-विमर्श ही नहीं है', लेकिन उन्होंने अधिक ब्यौरा देने से इनकार कर दिया।
बढ़ते खतरे को देखते हुए अफगानिस्तान स्थित भारतीय दूतावास और देश के अन्य हिस्सों में भारतीय प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के लिए भारत विशेष सशस्त्र बल तैनात कर सकता है। उल्लेखनीय है कि अफगानिस्तान स्थित भारतीय प्रतिष्ठानों की सुरक्षा का जिम्मा अभी आईटीबीपी ने संभाल रखा है।
गौरतलब है कि विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) नलिन सूरी की अगुआई में एक उच्च स्तरीय दल ने इससे पहले अफगानिस्तान स्थित भारतीय प्रतिष्ठानों की सुरक्षा की हालत का जाय़जा लिया था। उनके वापस आने के बाद सरकार ने विदेश सचिव को काबुल भेजने का निर्णय लिया।
काबुल स्थित दूतावास पर आत्मघाती हमले के फौरन बाद सूरी अपने दल के साथ काबुल गए थे। समझा जाता है कि सूरी के दल ने सरकार को वहाँ देश के प्रतिष्ठानों और कर्मचारियों के लिए भारी खतरे से अवगत कराया था।