BJP National President Rajnath Singh

पूर्ण बहुमत मिलने पर ही अयोध्या में रामजन्म भूमि मंदिर बनाने का वायदा पूरा करने का वचन दोहराते हुए भारतीय जनता पार्टी ने कहा है कि उसके लिए राम, कृष्ण और शिव राजनीतिक नहीं, राष्ट्रीय एवं सांस्कृतिक विषय हैं।

भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने आज यहाँ प्रदेश भाजपा मुख्यालय पर संवाददाताओं के सवालों के जवाब में कहा, `हम पूरे बहुमत से सत्ता में आए, तो राम मंदिर निर्माण का वायदा अवश्य पूरा करेंगे।' उन्होंने कहा कि भाजपा मानती है कि राम, कृष्ण और शिव इस देश में राजनीतिक विषय नहीं हैं, ये राष्ट्रीय एवं सांस्कृतिक प्रतीक हैं और यदि कोई इन सांस्कृतिक प्रतीकों से जुड़ता है, तो वह पूरे देश से जुड़ जाता है।

यह पूछने पर कि रामजन्म भूमि मंदिर मामले में वायदा खिलाफी के बाद क्या जनता भाजपा पर अब भी भरोसा करेगी, सिंह ने कहा, `जनता हम पर जरूर भरोसा करेगी, क्योंकि हमने केन्द्र में 24 दलों के साथ सरकार बनाकर गठबंधन धर्म पर अमल किया था और यह जनता भली-भांति जानती है।

राममंदिर के साथ क्या परमाणु करार, रामसेतु, अफजल गुरु को फाँसी और अमरनाथ श्राइन बोर्ड को दी जमीन वापसी को भी भाजपा चुनावी मुद्दा बनाएगी, इस सवाल पर उन्होंने कहा कि वह इसे चुनावी नहीं, राजनीतिक मुद्दे मानते हैं। चुनाव के दौरान हम इस पर अपनी पार्टी का नजरिया जनता के सामने अवश्य रखेंगे।

संप्रग सरकार से वामदलों की समर्थन वापसी के बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से देशहित में इस्तीफे देने की माँग करते हुए भारतीय जनता पार्टी ने कहा है कि 22 जुलाई को लोकसभा में राजग का पूरा प्रयास होगा कि संप्रग सरकार विश्वास मत हासिल नहीं कर सके, लेकिन इसके लिए हम कांग्रेस की तरह गलत रास्ते अख्तियार नहीं करेंगे।

यह पूछने पर कि गलत तरीकों से क्या उनका आशय सांसदों की खरीद फरोख्त से है, उन्होंने कहा कि मैं कुछ और नहीं कहना चाहता-सब जानते हैं कि सत्ता में कौन है और धन एवं धनवान किस के पास हैं।  राजग को विश्वास मत के खिलाफ और किन राजनीतिक पार्टियों का समर्थन मिल रहा है और विश्वास मत के खिलाफ उसकी रणनीति क्या है, इस सवाल के जवाब में सिंह ने कहा, `वह रणनीति का खुलासा नहीं कर सकते, इससे सब गड़बड़ हो जाएगा।'

भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि प्रधानमंत्री को पदत्याग कर नये जनादेश की तैयारी करनी चाहिए, क्योंकि वामदलों के स्थान पर समाजवादी पार्टी का समर्थन तो और भी बुरा होगा। हम पहले ही कहते रहे हैं कि वाम के साथ संप्रग का अवसरवादी गठजोड़ है, जिसके दुष्परिणाम देश को भुगतने पड़ेंगे और वही हुआ भी।

एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि सपा का साथ लेकर संप्रग सरकार ने यदि संसद में  विश्वास मत हासिल भी कर लिया, तो सरकार तो बच जाएगी, लेकिन प्रशासन नहीं रहेगा। इससे देश को भारी क्षति होगी। दरअसल उसे चिंता सरकार बचाने की है, देश बचाने की नहीं।

सिंह ने कहा कि अब गठबंधन की राजनीति में वर्तमान सरकार में घटित राजनीतिक घटनाओं से सिद्ध हो गया है कि भाजपानीत राजग ही देश को स्थाई गठबंधन सरकार दे सकता है। चार वर्ष तक वामदलों की कैद में रही संप्रग सरकार के कारण देश की आर्थिक एवं विदेशी नीति को भारी क्षति उठाना पड़ी है।

अमेरिका से परमाणु करार का विरोध करते हुए उन्होंने कहा कि हम अमेरिका से रिश्तों के विरोधी नहीं हैं, लेकिन यह घुटने टेक कर नहीं, बराबरी पर आधारित होने चाहिए। राजग इस करार की कमियों को लेकर सभी सांसदों से संपर्क कर रहा है कि इससे देश की परमाणु संप्रभुता कैसे प्रभावित होगी।

अमेरिका से बराबरी के रिश्तों पर जोर देने के लिए सिंह ने कहा कि यह करार हुआ, तो हम पोखरण तीन नहीं कर पाएँगे। हमने पोखरण में दो परमाणु विस्फोट कर के आर्थिक प्रतिबंध झेले, लेकिन घुटने नहीं टेके। उन्होंने कहा कि हमारे समय इन प्रतिबंधों और कारगिल युद्ध के बावजूद मुद्रास्फीति नहीं बढ़ी और महँगाई नियंत्रण में रही, संप्रग सरकार का यह कहना गलत है कि राजग शासनकाल में अंतर्राष्ट्रीय स्थितियाँ अनुकूल रहीं, इसलिए महँगाई नहीं बढ़ी। सरकार का यह कहना भी कुतर्क है कि महँगाई और अधिक विकास दर साथ-साथ नहीं चल सकती, हमने यह कर दिखाया था। उन्होंने आशंका व्यक्त करते हुए कहा कि महँगाई, आंतरिक और बाह्य सुरक्षा, खाद्यान्न संकट और किसानों की आत्महत्या जैसे अनेक ज्वलंत मुद्दों से जनता का ध्यान हटाने के लिए तो कहीं समर्थन वापसी जैसा कोई बड़ा राजनीतिक खेल नहीं हो रहा है। करार पर प्रधानमंत्री का रुख पहले से पता था, तो वामदल कैसे नहीं जान पाए और उन्होंने पहले ही समर्थन वापस क्यों नहीं लिया।

वामदलों पर निशाना साधते हुए भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि विरोध में बेईमानी नहीं होनी चाहिए। विभिन्न मुद्दों पर चार साल तक उन्होंने संप्रग सरकार की कई नीतियों का विरोध भी किया, लेकिन विरोध दिखाने की नैतिकता में उन्होंने ईमानदारी नहीं बरती।

पड़ोसी देशों के मामलों में देश की विदेश नीति को बेहद लचर बताते हुए सिंह ने अफगानिस्तान में भारतीय दूतावास पर तालिबानी हमले को एक बड़ी घटना बताया। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान के सबंध में भारत को अपनी सुरक्षा नीति की समग्र समीक्षा करनी चाहिए, जबकि आतंकवादियों और नक्सलियों के मामले में तो वह पहले से ही हाथ पर हाथ रखकर बैठी हुई है। महँगाई पर सरकार से श्वेत-पत्र जारी करने तथा सर्वदलीय बैठक बुलाने की माँग दोहराते हुए उन्होंने कहा कि अब तक श्वेत-पत्र जारी नहीं करना और सर्वदलीय बैठक नहीं बुलाने से लगता है, `दाल में कुछ काला' है। पार्टी के वरिष्ठ नेता जसवंत सिंह द्वारा सरकार गिराने के लिए सपा महासचिव अमर सिंह को प्रस्ताव देने के मामले में भाजपा अध्यक्ष ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि जसवंत सिंह ने ऐसा कोई प्रस्ताव अमर सिंह को नहीं दिया, यह उनकी `अमर' दिमागी उपज है। यह पूछने पर कि सरकार गिराने के लिए भाजपा वामदलों से हाथ मिलाने के बहाने क्या भविष्य में किसी गठबंधन का संकेत दे रही है, उन्होंने कहा कि कांग्रेस और वामपंथियों से कोई गठबंधन करना उसके लिए देश से धोखा करने के समान है।