Vampanthi Dal

परमाणु मुद्दे और बढ़ती महँगाई पर संप्रग सरकार के खिलाफ राष्ट्रव्यापी अभियान छेड़ते हुए वामपंथी पार्टियों ने आज सत्तारूढ़ पार्टी पर परमाणु समझौते के प्रति `जुनून' रखने और आम आदमी की समस्याओं को हल करने में नाकाम रहने का आरोप लगाया।

वामपंथी दलों ने कहा कि वे इस बात पर सहमत नहीं हो सकते कि देश अमेरिका का `कनिष्ठ सहयोगी' बने। जब देश मुद्रास्फीति और महँगाई की समस्या से जूझ रहा था, तो सरकार परमाणु समझौते को आगे बढ़ा रही थी, इसलिए उन्होंने सरकार से समर्थन वापस ले लिया।

परमाणु समझौते पर आगे बढ़ने के लिए सरकार को अल्पमत में होने के कारण अक्षम बताते हुए माकपा महासचिव प्रकाश करात ने कहा, `कांग्रेस का हाथ अमेरिका के साथ।' करात ने कहा कि विश्वास मत पर सरकार को हराने के लिए वामपंथी दल मेहनत करेंगे और उम्मीद जताई कि परमाणु समझौते के खिलाफ और पार्टियाँ उनका साथ देंगी।

वरिष्ठ सीपीएम नेता ने कहा, `अमेरिका में जॉर्ज बुश की लोकप्रियता 20-25 फीसदी है। वह अल्पमत के राष्ट्रपति हैं। हमारे प्रधानमंत्री भी अल्पमत सरकार का नेतृत्व कर रहे हैं। एक अल्पमत राष्ट्रपति और एक अल्पमत प्रधानमंत्री इस देश को अमेरिकी आधिपत्य में लाने की कोशिश कर रहे हैं।' उन्होंने कहा, `हम उन्हें (संप्रग) सहन कर रहे थे, क्योंकि हम भाजपा एवं अन्य सांप्रदायिक शक्तियों को सत्ता में नहीं आने देना चाहते थे।' समाजवादी पार्टी के साथ कांग्रेस का गठबंधन बनने के मुद्दे पर करात ने कहा कि वह पार्टी अब सरकार का समर्थन कर रही है, लेकिन कुछ समय पहले परमाणु समझौते के विरोध में वह वाम पंथी दलों के साथ थी।

मुद्रास्फीति और मूल्य वृद्धि पर नियंत्रण के लिए सरकार के   कोई कदम उठाने में नाकाम रहने पर करात ने कहा कि परमाणु समझौते का उपयोग अमेरिका बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए देश का दरवाजा खुलवाने में दबाव के तौर पर करेगा, जिसका देश पर बुरा असर होगा।

करात ने कहा, `ईरान के खिलाफ मतदान कर इस सरकार ने एक निंदनीय काम किया।' उन्होंने कहा कि अगर करार पर सरकार आगे बढ़ती है, तो देश अपनी विदेश नीति को गिरवी रख देगा और अंतर्राष्ट्रीय मामलों पर अमेरिका के पीछे चलेगा।

भाजपा के साथ सरकार के खिलाफ विश्वास मत के दौरान मतदान करने के बारे में करात ने कहा कि कांग्रेस को वाम पर ऊँंगली उठाने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1990 के दशक में कांग्रेस ने वी. पी. सिंह, एच. डी. देवगौड़ा और आई. के. गुजराल की सरकार गिराने के लिए `षड्यंत्र' किया और सांप्रदायिक पार्टी के साथ मतदान किया।

सीपीआई के महासचिव ए. बी. बर्द्धन ने कहा, `हमने कभी नहीं कहा कि हम भाजपा के साथ मतदान कर रहे हैं। हमने दूसरी पार्टियों से बात की है, भाजपा से नहीं। अगर दूसरी पार्टियाँ हमसे बात करना चाहती हैं, तो हम उन्हें बाहर नहीं निकाल सकते। हम संप्रग के खिलाफ इसकी नीतियों के कारण मतदान कर रहे हैं।' उन्होंने कहा कि वे सांप्रदायिक शक्तियों के खिलाफ लड़ाई जारी रखेंगे। उन्होंने आश्चर्य व्यक्त किया कि क्या भारत, ईरान, पाकिस्तान, भारत पाइपलाइन पर अमेरिकी दबाव में आगे नहीं बढ़ रहा है।

अभियान की शुरुआत संप्रग की अमेरिका समर्थित और लोक विरोधी नीतियों के अलावा समर्थन वापस लेने के कारणों के बारे में बताने के लिए की गई है। अभियान के तहत वाम दल लोगों के सामने विकास के लिए ऊर्जा के विकल्पों और किसानों, ग्रामीण क्षेत्रों के गरीबों एवं दूसरे लोगों के लिए हानिकारक आर्थिक नीतियों को खत्म करने की बात भी रखेंगे। बैठकों का आयोजन सभी बड़े केंद्रों, शहरों और गाँवों में किया जाएगा एवं पर्चों का प्रकाशन भी किया जाएगा।