बाज़ार धड़ाम 15 माह के न्यूनतम स्तर पर
विश्व के शेयर बाजारों की मंदी और राजनीतिक अनिश्चितता के बीच देश के शेयर बाजार आज ताश के पत्तों की तरह ढह गए। बम्बई शेयर बाजार (बीएसई) का सेंसेक्स 654 अंक का गोता लगाकर 15 माह के न्यूनतम स्तर 12676.19 अंक पर बंद हुआ। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के निफ्टी ने 3861.10 अंक पर 179 अंक की डुबकी लगाई। अमेरिका के शेयर बाजार में कल आई मंदी के बाद एशिया के स्टॉक एक्सचेंज भी खासे दबाव में थे और इस प्रभाव से भारतीय शेयर बाजार भी बच नहीं सके। सत्र की शुरुआत से ही भारी दबाव में रहे सेंसेक्स और निफ्टी पूरे कामकाज के दौरान बिकवाली के शिकंजे में दिखे। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि विदेशी शेयर बाजारों की मंदी के साथ ही देश में जारी राजनीतिक अनिश्चितता शेयर बाजारों पर भारी पड़ रही है। कच्चे तेल की ऊँची कीमतों का अपना असर है, तो कंपनियों के तिमाही परिणाम भी बहुत उत्साहजनक नहीं नजर आ रहे हैं। सत्र की शुरुआत में सेंसेक्स कल के 13330.51 अंक की (तुलना में 13067.08 अंक पर करीब 260 अंक नीचा खुला और पूरे कामकाज में इससे ऊपर नहीं उठ सका। कामकाज के दौरान सेंसेक्स नीचे में 12605 अंक तक गिरने के बाद समाप्ति पर कुल 654.32 अंक अर्थात 4.91 प्रतिशत की भारी गिरावट के साथ 12676.19 अंक पर बंद हुआ। सेंसेक्स का यह स्तर चार अप्रैल, 2007 के 12676.19 अंक के बाद का न्यूनतम है। बाजार में बिकवाली का दबाव इतना अधिक था कि बीएसई के किसी भी वर्ग का सूचकांक इससे बच नहीं सका। बीएसई मिडकैप और स्मालकैप में क्रमश: 167.29 अंक तथा 209.16 अंक की गिरावट दर्ज की गई। एनएसई का निफ्टी कल के 4039.70 अंक की तुलना में 4039.30 अंक पर खुला और करीब एक अंक बढ़कर ऊँचे में 4040.70 अंक तक चढ़ने के बाद लुढ़कता हुआ नीचे में इस वर्ष के न्यूनतम स्तर 3835.50 अंक तक गिरा और समाप्ति पर कुल 178.60 अंक अर्थात 4.42 प्रतिशत की गिरावट से 3861.10 अंक पर बंद हुआ। एनएसई मिडकैप और जूनियर में क्रमश: 4.14 प्रतिशत तथा 4.13 प्रतिशत की गिरावट रही। बीएसई के अन्य वर्गों के सूचकांक में सबसे अधिक गिरावट धातु में रही। धातु सूचकांक 671.55 अंक अर्थात 5.21 प्रतिशत की गिरावट से 12225.64 अंक रह गया। कैपिटल गुड्स समूह का सूचकांक 564.26 अंक गिरकर 10175.75 अंक रह गया। बैंकेक्स को 462.52 अंक का झटका लगा, तो ऑयल एंड गैस में 307.37 अंक निकले। रियल्टी 259.08 अंक गिरा। हेल्थकेयर में 170.67 अंक का नुकसान हुआ। एशियाई शेयर बाजारों में चीन का शंघाई कम्पोजिट 3.4 प्रतिशत गिरा। जापान का निक्केई दो प्रतिशत और हाँगकाँग का हैंगसैंग 3.8 प्रतिशत नीचे आये। सत्र के दौरान बिकवाली का दबाव इतना अधिक था कि कुल 2,696 कंपनियों के शेयरों में हुए कारोबार में से मात्र 539 अर्थात 19.99 प्रतिशत के शेयर ही फायदे में रहे, जबकि 77.86 प्रतिशत अर्थात 2099 के शेयर नीचे और 58 के स्थिर थे। सेंसेक्स की सभी तीस कंपनियों के शेयर नुकसान में रहे। नुकसान वाली पहली बीस कंपनियों के शेयरों में चार से लेकर 14 प्रतिशत का भारी घाटा हुआ। अमेरिका विवाद के चलते औषधि वर्ग की अग्रणी रैनबैक्सी लैबोरेट्रीज के शेयर में 14.01 प्रतिशत की भारी गिरावट आई। कंपनी का शेयर 66.65 रुपये के नुकसान से 409.25 रुपये रह गया। कल भी यह दस प्रतिशत से अधिक टूटा था। अमेरिका की दो बड़ी वित्तीय कंपनियों की खबरों के बीच यहाँ बैंकिंग क्षेत्र के शेयरों पर भारी मार पड़ी। एचडीएफसी बैंक का शेयर 11.26 प्रतिशत अर्थात 116.30 रुपये लुढ़ककर 916.40 रुपये रह गया। आईसीआईसीआई बैंक के शेयर में 529.30 रुपये पर 8.72 प्रतिशत अर्थात 50.55 रुपये निकल गए। एसबीआई का शेयर 6.35 प्रतिशत अर्थात 79.90 रुपये के नुकसान से 1177.80 रुपये रह गया। हिंडाल्को इंडस्ट्रीज, रिलायंस कम्युनिकेशंस, एचडीएफसी, भेल, विप्रो, डीएलएफ, रिलायंस इन्फा, जयप्रकाश असोसिएट्स, टाटा स्टील, आईटीसी, एलएंडटी, हिन्दुस्तान यूनीलीवर, महिन्द्रा एंड महिन्द्रा, अम्बूजा सीमेंट, भारती एयरटेल और ओएनजीसी के शेयर सेंसेक्स के नुकसान वाले पहले बीस शेयरों में शामिल थे। |
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