कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने आज कहा कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भारत-अमेरिका परमाणु करार के मुद्दे पर दूरदृष्टि, प्रतिबद्धता और नेतृत्व का परिचय दिया है। सरकार के विश्वास मत हासिल करने से एक सप्ताह पहले उन्होंने परमाणु करार का जमकर . .
कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने आज कहा कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भारत-अमेरिका परमाणु करार के मुद्दे पर दूरदृष्टि, प्रतिबद्धता और नेतृत्व का परिचय दिया है। सरकार के विश्वास मत हासिल करने से एक सप्ताह पहले उन्होंने परमाणु करार का जमकर बचाव करते हुए कहा कि यह दीर्घावधि में देश के लिए फायदेमंद होगा। करार के विरोध पर सवाल उठाते हुए गांधी ने कहा कि यह उसी तरह का विरोध है, जैसा उनके स्वर्गीय पिता ने वर्ष 1980 में कंप्यूटर शुरू करने के वक्त झेला था। उन्होंने यहाँ एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, `उस समय सभी ने सोचा था कि यह फैसला (कंप्यूटर शुरू करने का फैसला) हास्यास्पद है। उस समय दलील दी गयी थी कि यह किसानों को कैसे फायदा पहुँचाएगा।'
गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने परमाणु करार पर आगे बढ़ने का फैसला कर दूरदृष्टि, प्रतिबद्धता और नेतृत्व का परिचय दिया है। उन्होंने कहा, `अगर परमाणु करार में जोखिम है, तो मैं प्रधानमंत्री को ऐसा जोखिम बार-बार उठाने के लिए कहूँगा।' उन्होंने कहा कि जीवन में कभी-कभी जोखिम उठाना पड़ता है। गांधी ने कहा कि करार देश के लिए लाभदायक और सरकार के लिए जोखिमभरा है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार गिरती है, तो यह करार भी नहीं हो पाएगा।
22 जुलाई को विश्वास मत के दौरान सरकार के बचने की संभावनाओं के बारे में गांधी ने कहा कि वह भविष्यवाणी नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा, `मैं भविष्यवाणी नहीं करता। एक बार मतदान हो जाने दीजिए। उसके बाद हम देखेंगे।' कांग्रेस नेता ने कहा कि करार का विरोध सिर्फ पार्टी की विचारधारा या राजनीतिक वजहों के आधार पर किया जा रहा है, लेकिन कांग्रेस का मानना है कि समझौते पर आगे बढ़ने का फैसला सही है। उन्होंने कहा, `हमारा रुख है कि करार देश के लिए अच्छा है।' उन्होंने कहा कि इससे देश के लिए अधिक सुरक्षा सुनिश्चित होगी। उन्होंने कहा कि कंप्यूटर और सूचना प्रौद्योगिकी के बाद भारत- अमेरिका परमाणु करार भारत के लिए परमाणु क्रांति में प्रवेश का मौका लेकर आया है।