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करार पर भारत के साथ हैं फांस व चीन
भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु करार को लेकर देश के राजनैतिक हलके में भले ही उथल-पुथल मची हो, पर वैश्विक स्तर पर उसे लगातार सहयोग मिल रहा है। परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह के प्रमुख देश फांस ने जहां एक ऐसी वैश्विक व्यवस्था की वकालत की है जिससे भारत अन्य देशों के साथ असैन्य परमाणु सहयोग कर सके, वहीं चीन ने संकेत दिया है कि करार का मुद्दा आईएईए के समक्ष आने पर वह उसका विरोध नहीं करेगा। फांस के राजदूत जेरोम बोनाफों ने बृहस्पतिवार को कहा कि अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी डआईएईए़ के साथ भारत का समझौता हो जाने की स्थिति में उनका देश नई दिल्ली के साथ बड़े पैमाने पर असैन्य क्षेत्र में परमाणु सहयोग करने को तैयार है। आईएईए के निदेशक मंडल की सुरक्षा मानक समझौते पर होने वाली बैठक से पूर्व आए फांस के इस बयान को भारत के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत और आईएईए ने सुरक्षा मानक समझौते को अंतिम रूप दे दिया है। इसे अब आईएईए के निदेशक मंडल को मंजूरी देनी है। बोनाफों ने दुनिया के अन्य देशों के साथ भारत को असैन्य परमाणु क्षेत्र में कारोबार के लिए छूट दिए जाने की वकालत की। गौरतलब है कि फांस 45 सदस्यीय परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह डएनएसज़ी का प्रमुख देश है। उन्होंने कहा कि हमें एक ऐसी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की जरूरत है जिसके तहत भारत शेष विश्व के साथ असैन्य परमाणु सहयोग कर सके। फांस के राजदूत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता के लिए भारत को समर्थन दिए जाने की बात भी दोहराई। बोनाफों ने भारत के साथ शिक्षा और मानवीय संपर्प के क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग बढ़ाने का भी समर्थन किया। उधर, चीन ने पहली बार संकेत दिया है कि जब परमाणु करार का मुद्दा अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी डआईएईए़ के समक्ष आएगा तो वह उसका विरोध नहीं करेगा। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लियू जियानचाओ ने बीजिंग में पत्रकारों से कहा कि मैं मानता हूं कि अंतरराष्ट्रीय दायित्वों को पूरा करते हुए देश परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग में शांतिपूर्ण सहयोग कर सकते हैं और मैं उम्मीद करता हूं कि संबंधित मुद्दों को संबंधित पक्षों के बीच वार्ता के माध्यम से हल किया जा सकता है। चीन विश्व की पांच मान्यताप्राप्त परमाणु शक्तियों में से एक है। वह अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी डआईएईए़ के साथ ही परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह डएनएसज़ी का भी एक प्रमुख सदस्य है। परमाणु व्यापार के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग पाने के उद्देश्य से भारत को उनकी मंजूरी जरूरी है। बुकमार्क किजिए
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